छोटे शहर का रूप ले रहे केरल के गांव
बेंगलुरू। भारत के गांव में केवल 8.68 प्रतिशत जनसंख्या ही निवास करती है और एक गांव की जनसंख्या बस 10,000 तक ही होती है लेकिन भारत का केरल ही एक अकेला ऐसा राज्य है जहां कि 92.21 प्रतिशत जनसंख्या गांवों मे रहती है। जो कि सेंसेक्स 2011 के आंकड़ों के जरिये साबित हुआ हैं।
आज की पीढ़ी गांवों में रहना पसंद नहीं करती है इस कारण लगातार गांवों की जनसंख्या में गिरावट आ रही है इसके पीछे कारण वहां पर बुनियादी जरूरतों का अभाव है लेकिन इसके विपरीत केरल में उलट स्थिति है इसलिए अगर यह कहा जाये कि छोटे शहर का रूप ले रहे केरल के गांव, तो गलत नहीं होगा।
केरल के बाद अरूणाचल, मेघालय और हिमाचल ऐसे राज्य हैं जहां के गांवों के जनसंख्या में इजाफा हुआ है लेकिन नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, गोवा, आंध्र प्रदेश और गोवा के गांवों की जनसंख्या में पिछले सेसेंक्स के मुकाबले कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
आपको जानकर अचरज होगा कि अब भारत नें छोटे गांवों की संख्या घट रही है, देश में पिछले एक दशक में गांवों की तुलना में शहरी आबादी ढाई गुना से भी अधिक तेज़ी से बढ़ी है लेकिन केरल में इससे ठीक उल्टा हुआ है।
भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त के कार्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दशक में देश की जनसंख्या में 17.64 प्रतिशत का बढ़ी है। यह वृद्धि गांवों में 12.18 और शहरी क्षेत्रों में 31.80 प्रतिशत रही। गावों की जनसंख्या में सबसे ज़्यादा वृद्दि की दर बिहार में 23.90 प्रतिशत रही है जो कि एक शुभ संकेत है।
केरल के गांव ज्यादा विकसीत और साफ
रिपोर्ट के मुताबिक देश की आबादी का 68.84 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 31.16 फीसदी शहरी होता है जिसमें 89.96 प्रतिशत ग्रामीण आबादी हिमाचल प्रदेश में और सबसे ज़्यादा 97.50 फीसदी शहरी जनसंख्या देश की राजधानी दिल्ली में है।













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