Pollachi Case: क्या है पोलाची केस? भय और ब्लैकमेल में फंसी पीडितों को पांच साल बाद मिला न्याय
Pollachi Case: तमिलनाडु का पोलाची एक शांत, सामान्य सा कस्बा एक दिन अचानक ही राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। साल 2019 में इस छोटे से शहर का नाम पूरे देश में एक भयावह अपराध के प्रतीक के रूप में उभरा।
जिसमें महिलाओं के यौन शोषण, ब्लैक मेल और एक संगठित गिरोह की घिनौनी साजिश का भंडाफोड़ हुआ जिसने तमिलनाडु ही नहीं बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। अब, पांच साल बाद, कोयंबटूर की एक महिला विशेष अदालत ने मंगलवार को इस मामले में फैसला सुनाया।

विशेष न्यायाधीश नंदिनी देवी ने नौ आरोपियों थिरुनावुकारसु, सबरीसन, वसंत कुमार, सतीश, मणिवन्नन, हरनपॉल, बाबू, अरुलानाथम और अरुण कुमार - को दोषी करार दिया। दोष सिद्ध होने के बाद अदालत ने दोपहर में सजा सुनाने की प्रक्रिया शुरू की।
What Is Pollachi Case: कैसे हुई इस घिनौनी साजिश की शुरुआत?
यह मामला 12 फरवरी 2019 को तब सामने आया, जब एक 19 वर्षीय छात्रा अपने भाई के साथ पुलिस स्टेशन पहुंची। छात्रा को व्हाट्सएप के जरिए एक लड़के ने संपर्क किया। उसने खुद को उसके कॉलेज सीनियर बताया और धीरे-धीरे उससे दोस्ती बढ़ाई। फिर एक दिन उसने उसे मिलने के लिए मक्किनमपट्टी बुलाया, जहां वह कार में तीन और साथियों के साथ मौजूद था।
मुलाकात के दौरान लड़के ने छात्रा के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और उसके साथी मोबाइल से इस पूरी घटना का वीडियो बना रहे थे। लक्ष्मी किसी तरह वहां से भागकर अपने घर पहुंची और अपने भाई को सब कुछ बताया। लक्ष्मी के भाई और उसके दोस्तों ने आरोपियों का पीछा कर उन्हें पकड़ने की कोशिश की। इसके बाद 19 फरवरी को मामला पुलिस तक पहुंचा।
पुलिस ने 25 फरवरी को तीन मुख्य आरोपियों सबरीराजन, वसंत कुमार और सतीश को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान उनके मोबाइल फोन से चार आपत्तिजनक वीडियो क्लिप्स बरामद हुईं, जिनमें विभिन्न महिलाओं को प्रताड़ित होते देखा गया।
Pollachi Case: सुनियोजित अपराध और शिकार बनतीं गईं कॉलेज छात्राएं
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई अकेली घटना नहीं थी। यह एक संगठित गिरोह था जो सुनियोजित तरीके से युवतियों को अपने जाल में फंसाता था। थिरुनावुकारसु नामक व्यक्ति इस गिरोह का मुखिया था, जो एक फाइनेंस कंपनी चलाता था।
उसके सहयोगी - सबरीराजन (इंजीनियरिंग स्नातक), सतीश (कपड़ों की दुकान का मालिक), और अन्य - कॉलेज की छात्राओं से दोस्ती कर, उन्हें मिलने के लिए बुलाते थे। फिर उन्हें फार्म हाउस ले जाकर उनका यौन शोषण करते और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करते थे। पीड़ितों में अधिकतर लड़कियां पोलाची और आस-पास के कॉलेजों से थीं। गिरोह अक्सर शादी का झूठा प्रस्ताव देकर या फर्जी पहचान पत्रों का उपयोग कर लड़कियों का विश्वास जीतता था।
Pollachi Case: पुलिस जांच और राजनीतिक साया
इस केस में एक और बड़ा मोड़ तब सामने आया जब कि आरोपियों में से एक नागराज, जो बाद में गिरफ्तार हुआ, AIADMK पार्टी का सदस्य था। उसने पीड़िता के भाई की पिटाई की थी। बाद में भारी विरोध के बाद उसे पार्टी से निकाल कर दिया गया।
मामले की संवेदनशीलता के बावजूद, तमिलनाडु के गृह विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई। 13 मार्च को विभाग ने एक आदेश जारी किया जिसमें गलती से पीड़िता का असली नाम और कॉलेज सार्वजनिक कर दिया गया। इससे न केवल उसकी सुरक्षा को खतरा पहुंचा, बल्कि अन्य पीड़ितों में डर का माहौल बन गया और कई महिलाएं शिकायत करने से पीछे हट गईं।
Pollachi Case Judgement: इंसाफ की ओर पहला बड़ा कदम
हालांकि पुलिस ने शुरुआत में केवल चार वीडियो और चार ही आरोपियों की बात की थी, लेकिन समय के साथ यह स्पष्ट होता गया कि अपराधियों का नेटवर्क बहुत बड़ा और गहरा था। पीड़ितों की संख्या भी कहीं अधिक हो सकती थी, लेकिन सामाजिक कलंक और डर के चलते अधिकांश महिलाएं सामने नहीं आईं।
मामले की जांच बाद में सीबी-सीआईडी को सौंप दी गई और अब, पांच साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद न्यायपालिका ने दोषियों को सजा देकर पीड़ितों के पक्ष में पहली बार बड़ा आदेश दिया है।
पोलाची केस न केवल यौन अपराधों के भयावह चेहरे को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे समाज, राजनीति और प्रशासन की खामियां पीड़ितों को न्याय से दूर रख सकती हैं। लेकिन यह फैसला इस बात की उम्मीद जरूर देता है कि देर से ही सही, इंसाफ मिल सकता है और दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जा सकता है।
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