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गुरमेहर विवाद पर देश के दूसरे कैंपसों की राय?

पटना यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई कर रहे छात्र मनीष यादव के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय का विवाद केंद्र सरकार की नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए सुनियोजित ढंग से खड़ा किया गया।

गुरमेहर कौर
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गुरमेहर कौर

दिल्ली के रामजस कॉलेज में छात्र संगठन एबीवीपी और आइसा के बीच झड़प और उसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा गुरमेहर कौर की पोस्ट के वायरल होने की ख़बर केवल दिल्ली तक नहीं है, बल्कि इसका असर दिल्ली के बाहर के विश्वविद्यालयों तक भी पहुंचा है.

ऐसे में अलग-अलग शहरों की बड़ी यूनिवर्सिटी और कॉलेज के छात्र इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं, इस बारे में हमारे स्थानीय सहयोगियों ने अलग-अलग छात्रों से बात की.

मनीष
Seetu Tewari
मनीष

पटना यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई कर रहे छात्र मनीष यादव के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय का विवाद केंद्र सरकार की नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए सुनियोजित ढंग से खड़ा किया गया.

वे कहते हैं, "एक तरफ़ ये लोग कहते हैं भारत माता की जय और दूसरी तरफ़ लड़कियों के साथ मारपीट, बाल पकड़ खींचना - ये दोहरा चरित्र नहीं तो क्या है. छह महीने से नजीब ग़ायब है, लेकिन इसकी चिंता किसी को नहीं है."

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रांची के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज के छात्र गुरप्रीत सिंह के मुताबिक पिछले साल जेएनयू में विवाद देखने को मिला और इस साल रामजस कॉलेज में हिंसा हुई, ये ठीक बात नहीं है.

गुरप्रीत सिंह
Ravi Prakash
गुरप्रीत सिंह

उन्होंने कहा, "बलात्कार की धमकियां दी गईं. कहा गया कि हर किसी को वंदे मातरम का नारा लगाने के लिए कहा गया, मैं इसे ग़लत मानता हूं. मेरे ख़्याल से छात्रों को अपनी राष्ट्रीयता को दर्शाने के लिए किसी से सर्टिफ़िकेट नहीं चाहिए. लेकिन इसके साथ मैं ये भी कहना चाहूंगा कि गुरमेहर कौर ने जिस तरह से अपने पिता की मौत की वजह युद्ध को बताया, वह भी ठीक नहीं था."

रांची विश्वविद्यालय
Ravi Prakash
रांची विश्वविद्यालय

रांची विश्वविद्यालय के ही एक अन्य छात्र ने कहा, "जब से केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है, तब से देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को टारगेट किया जा रहा है. जेएनयू, आईआईटी, आईआईएफ़टी में एबीवीपी के छात्र सुनियोजित ढंग से सर्टिफ़िकेट दे रहे हैं कि कौन देशद्रोही है और कौन देशभक्त. जेएनयू में देशद्रोही नारे लगाने के मामले में कोर्ट उन लोगों को क्लीन चिट दे चुकी है जिसे ये लोग दोषी बता रहे थे."

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गौरव
Imran Qureshi
गौरव

दक्षिण भारत के बैंगलोर यूनिवर्सिटी के छात्र गौरव के मुताबिक यूनिवर्सिटी कैंपस में हिंसा तक बात का पहुंचना ठीक बात नहीं हैं.

उन्होंने कहा, "मेरे ख़्याल से हमें आपस बहस नहीं करना चाहिए. आपसी बातचीत से रास्ता निकालना चाहिए. डिबेट करना चाहिए. किसी को भी बलात्कार की धमकी या फिर किसी के इगो को हर्ट करना ग़लत है. किसी का कॉलर पकड़ना, मारपीट ये सब ठीक नहीं है. अगर कोई मसला है, समस्या है तो उसे बातचीत के ज़रिए ही निपटाने की कोशिश होनी चाहिए."

अर्चना
Imran Qureshi
अर्चना

बेंगलुरु की एक अन्य छात्रा अर्चना के मुताबिक गुरमेहर कौर के साथ जो भी हुआ वो ग़लत हुआ है. अर्चना को इस बात पर भी अचरज हो रहा है कि ऐसे हादसे केवल दिल्ली में क्यों हो रहे हैं. उनका कहना है कि प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए.

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आभा त्रिपाठी
Samiratmaj Mishra
आभा त्रिपाठी

लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रा आभा त्रिपाठी के मुताबिक आज़ाद देश में रहने के बाद भी जेएनयू जैसे विश्वविद्यालय में लोग किस आज़ादी की मांग कर रहे हैं. आभा कहती हैं कि दुनिया के कई देशों में अपनी बात रखने की आज़ादी नहीं है, लेकिन हमारे यहां आपको मन के मुताबिक कुछ भी करने की आज़ादी तो है.

प्रभात रंजन मिश्रा
Samiratmaj Mishra
प्रभात रंजन मिश्रा

इसी यूनिवर्सिटी के एक अन्य छात्र प्रभात रंजन मिश्रा कहते हैं, "दरअसल यूनिवर्सिटी में ऐसे विवाद प्रोपगैंडा के तहत होते हैं. जब लोग चर्चा में आना चाहते हैं तो एक धड़ा राष्ट्र के ख़िलाफ़ बयान देने लगता है, अपने नियम क़ानून बनाने लगता है. दूसरा धड़ा उसका विरोध करके चर्चित होना चाहता है. दोनों का अतिरेक ग़लत है. इस पर अंकुश लगाने की ज़िम्मेदारी सरकार की है, लेकिन वह ध्यान ही नहीं दे पाती."

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