तीसरी लहर में ऑक्सीजन की चुनौती का सामना करने की क्या है तैयारी ? जानिए
नई दिल्ली, 19 मई: कोविड की दूसरी लहर ने देश में जो तबाही मचाई है, उसके बाद तीसरी लहर को लेकर सरकार किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती। अस्पतालों से लेकर ऑक्सीजन सप्लाई चेन तक सरकार अब महामारी की संभावित तीसरी लहर को लेकर सभी तरह की तैयारियों में जुट गई है। लेकिन, यह सब उतना आसान नहीं है। उसके सामने कई चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती ये है कि अगर ऑक्सीजन प्लांट लगा भी दिए जाएं तो इतनी जल्दी उसे चलाने वाले प्रशिक्षित स्टाफ कहां से आएंगे। यह चुनौती सिर्फ ऑक्सीजन प्लांट को लेकर नहीं है। अस्थाई अस्पताल बनाने पर भी उसके लिए स्टाफ जुटाने में दिक्कत हो सकती है। लेकिन, इन चुनौतियों से निपटने की तैयारियों शुरू कर दी गई हैं।

तीसरी लहर से निपटने के लिए ट्रेंड वर्कफोर्स भी चाहिए
कोरोना वायरस महामारी की संभावित तीसरी लहर की तैयारियों को लेकर जो खाका तैयार किया जा रहा है, उसमें दिक्कत ये आ रही है कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों के इलाज के लिए विशाल मेक-शिफ्ट अस्पताल बना भी लिया जाए तो उसके लिए मैनपावर कहां से आएंगे। क्योंकि,इसके लिए बड़ी तादाद में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और टेक्निकल हैंड चाहिए। ऑक्सीजन सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए प्रशिक्षित लोग होने चाहिए। इन्हीं सब चुनौतियों से निपटने के लिए सोमवार को एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप की बैठक हुई है, जिसमें पैन्डेमिक मैनेजमेंट के मद्देनजर कम से कम वक्त में ट्रेंड वर्कफोर्स की उपलब्धता को लेकर चर्चा की गई है। इस बैठक की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया है कि इस बैठक में केंद्रीय स्टील और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप पुरी के अलावा कई लोग मौजूद थे।
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क्विक ट्रेनिंग मॉड्यूल विकसित करने की चर्चा
दरअसल, दूसरी लहर के अनुभव से सरकार यह मानकर चल रही है कि यदि वैज्ञानिकों की आशंका सही साबित हुई तो कई जगह पर अस्थाई अस्पताल या आइसोलेशन सेंटर कम वक्त में तैयार करने पड़ सकते हैं। लेकिन, इसके लिए मेडिकल उपकरणों को चलाने वाले लोगों की बड़ी तादाद में आवश्यकता पड़ेगी। जैसे कि सैंपल कलेक्शन, टेस्टिंग मशीन ऑपरेटर, डायग्नोस्टिक्स में सहायक, मरीजों की सहायता करने वाले या अस्पतालों में फ्लोर मैनेजमेंट करने वाले लोग अचानक कहां से आएंगे? जानकारी के मुताबिक इसके लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय से ऐसा क्विक ट्रेनिंग मॉड्यूल विकसित करने को कहा गया है, जो जल्द ही इन सेवाओं की आपूर्ति कर सके। यह चर्चा ऐसे वक्त में शुरू हुई है, जब सरकार देश के विभिन्न शहरों में ज्यादा से ज्यादा मरीजों की विशेष देखभाल के लिए 'जंबो अस्पताल' तैयार करने की सोच रही है।

500 नए ऑक्सीजन प्लांट लगाने की तैयारी
दूसरी लहर में देश ने मरीजों को वक्त पर सहायता मिलने में ऑक्सीजन की बहुत बड़ी किल्लत देखी है। सरप्लस ऑक्सीजन होने के बावजूद सप्लाई चेन के संकट से देश में कई दिनों तक हाहाकार मच चुका है। अगर भारतीय रेलवे ने तत्काल क्रायोजेनिक टैंकर ढोने की व्यवस्था नहीं शुरू की होती और एयर फोर्स के विमान मदद के लिए नहीं उतरते तो स्थिति और भी बदसूरत हो सकती थी। जाहिर है कि अबकी बार सरकार मेडिकल ऑक्सीजन की किसी भी तरह से किल्लत होने देने के लिए तैयार नहीं होगी। सरकार ने पहले ही देश के विभिन्न स्थानों पर 500 नए ऑक्सीजन प्रेशर स्विंग एब्जॉर्प्शन (पीएसए) प्लांट और ऑक्सीजन जेनरेशन यूनिट लगाने की घोषणा कर दी है। इनमें से कई प्लांट तो सीधे आईआईटी कानपुर की प्रोजेक्ट के तहत तैयार किए जाने हैं।

ऑक्सीजन प्लांट मैनेजमेंट के लिए 5,000 लोगों को ट्रेनिंग देने की तैयारी
सवाल फिर वही है कि 500 नए ऑक्सीजन प्रेशर स्विंग एब्जॉर्प्शन (पीएसए) प्लांट और ऑक्सीजन जेनरेशन यूनिट लगा तो दिए जाएंगे, लेकिन उसे चलाने वाले प्रशिक्षित लोग कहां से आएंगे। क्योंकि, इतनी बड़ी तादाद में इन्हें संचालित करने के लिए इस समय देश में लोग नहीं है। अब केंद्र सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए एक नई योजना पर काम करना शुरू कर दिया है, जिसके तहत ऑक्सीजन प्लांट मैनेजमेंट के लिए इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आ












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