कच्छ के रण में 'हरामी' नाला क्या है और ऐसा नाम क्यों पड़ा? जानिए
गुजरात में कच्छ के रण में शनिवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 'लंगर डालने वाले स्थान' (mooring place)की आधारशिला रखी है। इसके तैयार होने से बीएसएफ को भारत-पाकिस्तान सीमा पर करीब 450 जहाजों और विशेष भौगोलिक क्षेत्र की वजह से तैरने वाली सीमा चौकियों के संचालन में सहायता मिलेगी। इसे 257 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है।
सामरिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र सर क्रीक के नाम से मशहूर है, जहां करीब 22 किलोमीटर 'हरामी' नाला भी मौजूद है, जो अपने नाम और परिस्थितियों के चलते कुख्यात है। सुरक्षा बलों की सुविधा के लिए जिस 'लंगर डालने वाले स्थान' का भूमिपूजन शाह ने किया है, उसमें इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों के सामने खड़ी होने वाली सभी तरह की चुनौतियों को देखते उनकी खास जरूरतों का ख्याल रखा जाना है।

'हरामी' नाला क्या है?
गृहमंत्री ने इस कार्यक्रम के दौरान हरामी नाला के किनारे 1164 नंबर पिलर पर एक आउटपोस्ट टावर का भी उद्घाटन किया है। सीधे शब्दों में कहें तो हरामी नाला कच्छ के रण में स्थित लगभग 22 किलमीटर लंबा एक ज्वारीय चैनल है। यह ज्वारीय चैनल भारत और पाकिस्तान को विभाजित करता है। इसका एक हिस्सा राजस्थान के बाड़मेर जिले को भी जोड़ता है।
हरामी नाला में पानी के साथ-साथ बड़ी मात्रा में कीचड़ का भी बहाव रहता है। यह क्षेत्र झींगा और अन्य समुद्री जीवों के लिए बहुत ही उपयुक्त है। लेकिन, ये प्रजातियां यहां संरक्षित घोषित की गई हैं। लेकिन, दुर्गम क्षेत्र होने की वजह से इन्हें गैर-कानूनी तरीके से पकड़ने का गोरखधंधा भी यहां खूब होता है। यह दुर्गम इसलिए है, क्योंकि मौसम के साथ इस नाले का जल स्तर और इसकी धारा निरंतर बदलते रहते हैं।
'हरामी' नाला नाम क्यों पड़ा?
प्राकृतिक तौर पर देखें तो यह ज्वारीय चैनल इतना दुरूह है और इस तरह से अपना स्वरूप बदलता रहता है जिसका आकलन कर पाना बहुत ही मुश्किल है। इसकी प्राकृतिक अविश्वसनीयता के साथ ही यह चैनल 'हरामी' नाला का नाम से कुख्यात हुआ है तो इसके पीछे की वजह ये है कि यह पाकिस्तानी घुसपैठियों के लिए काफी माकूल जगह रही है। भारत में घुसपैठ के लिए आतंकवादी और असामाजिक तत्वों ने कई बार इसका गलत इस्तेमाल किया है।
कसाब ने भी किया 'हरामी' नाला का इस्तेमाल!
अक्सर गैर-कानूनी तरीके से मछली पकड़ने की वजह से इस इलाके से पाकिस्तानी मछुआरे पकड़े जाते रहे हैं। कई बार यहां से संदिग्ध और लावारिस पाकिस्तानी बोट भी बरामद की गई हैं। जाहिर है कि इन सब वजहों से 'हरामी' नाला भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती रहा है। माना जाता है कि 26 नवंबर, 2008 को मुंबई पर हमला करने वाला पाकिस्तान आतंकवादी अजमल कसाब और उसके 9 साथी भी 'हरामी' नाला होकर ही भारत को दहलाने आए थे।
एक और वजह है कि 'हरामी' नाला भारत के लिए बहुत बड़ी सुरक्षा चुनौती रहा है। यह मुंबई और गुजरात के तटवर्ती इलाकों के पास है पाकिस्तान की ओर से इसका दुरुपयोग किया जाता रहा है। जबकि, 'हरामी' नाला से होकर भारत की तरफ से पाकिस्तान की ओर जाना बहुत ही मुश्किल है। इन सब वजहों से इस क्षेत्र ने 'हरामी' नाला का नाम पा लिया है। विशेष भौगोलिक बाधाओं के बावजूद इसकी सामरिक अहमियत को समझते हुए सुरक्षा बलों के जवान यहां अपनी मुस्तैदी से रत्ती भर भी समझौता नहीं करते हैं।
अब हरामी नाला की निगरानी के लिए जो 9.5 मीटर ऊंचा आउटपोस्ट बना है, उसपर अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए है। यह सीमा पर होने वाली विपरीत गतिविधियों पर बहुत ही पैनी नजर रख पाने में सक्षम हैं। इस सीमा पर ऐसे सात आउटपोस्ट की दरकार बताई जाती रही है।












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