अयोध्या विवाद पर सुनवाई के लिए गठित 5 जजों की संविधान पीठ क्यों है अलग?
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नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में पांच जजों की संविधान पीठ 10 जनवरी को सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया मास्टर ऑफ रोस्टर हैं और इस केस में गठित बेंच को देखते हुए माना जा रहा है कि सीजेआई मामले की गंभीरता को समझते हैं। अयोध्या विवाद को लेकर देश में सियासत तेज रही है और कई हिंदू संगठन इसकी जल्दी सुनवाई की मांग कर रहे हैं।

सबसे अहम बात ये है कि तीन जजों की बेंच के बदले अब 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ अयोध्या मामले पर सुनवाई करेगी। इस बेंच में सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस ए बोबदे, जस्टिस एनवी रमाना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाय चंद्रचूड इस बेंच में शामिल हैं। इसके पहले, अयोध्या मामले की सुनवाई 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ को भेजने की मुस्लिम पक्ष की मांग को कोर्ट ने ठुकरा दिया था, लेकिन अब 5 सदस्यीय बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।
इस बेंच में सभी वरिष्ठ जज शामिल हैं जो अयोध्या विवाद पर सुनवाई करेंगे। जस्टिस सिकरी 6 मार्च, 2019 को रिटायर होंगे। बता दें कि पिछले साल, सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और रोस्टर को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज की थी। हालांकि उस वक्त राम मंदिर का मुद्दा इसमें शामिल नहीं था। समय-समय पर वरिष्ठ जजों द्वारा महत्वपूर्ण केसों की सुनवाई का मुद्दा उठता रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के हर जज का उतना ही महत्व है और उनके दिए गए फैसले ही अहम होते हैं। कोई भी फैसला, छोटा या बड़ा नहीं होता है। इस नए बेंच में कोई भी जज पुराने बेंच में शामिल नहीं रहा है। इसके पहले, पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाले बेंच में जस्टिस अशोख भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल रहे थे। दीपक मिश्रा के रिटायरमेंट के बाद अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए नए बेंच का गठन किया गया था।












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