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Skill Development Scam: क्या है करोड़ों रुपये का कौशल विकास घोटाला, जिसमें चंद्रबाबू नायडू हुए गिरफ्तार

Skill Development Scam Chandrababu Naidu arrested: तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को करोड़ों रुपये के एपी राज्य कौशल विकास निगम (APSSDC) घोटाले में शनिवार तड़के गिरफ्तार कर लिया गया। ये घोटला पूरे आंध्र प्रदेश में कौशल विकास घोटाला (स्किल डेवलपमेंट स्कैम) के नाम से जाना जाता है।

चंद्रबाबू नायडू को गिरफ्तार सीआईडी ने शनिवार सुबह नंद्याल (Nandyal) से किया है। चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी के बाद कई टीडीपी नेताओं को भी नजरबंद कर दिया गया है। कौशल विकास घोटाला 350 करोड़ रुपये का है। इस मामले चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ साल 2021 में एफआईआर दर्ज की गई थी।

Skill Development Scam Chandrababu Naidu arrested

गैर-जमानती आरोपों में गिरफ्तार हुए चंद्रबाबू नायडू

नंद्याल रेंज के डीआइजी रघुरामी रेड्डी और अपराध जांच विभाग (CID) की टीम ने शनिवार 09 सितंबर की सुबह करीब 6 बजे चंद्रबाबू नायडू को गिरफ्तार कर विजयवाड़ा ले गई।

इस मामले में चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी पर सीआरपीसी की धारा 50(1)(2) के तहत की गई है। चंद्रबाबू नायडू को धारा 120(8), 166, 167, 418, 420, 465, 468, 471, 409, 201, 109 आर/डब्ल्यू 34 और 37 आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की अन्य धाराओं के तहत गैर-जमानती आरोपों पर गिरफ्तार किया गया है।

Skill Development Corporation scam: क्या है एपी राज्य कौशल विकास निगम घोटाला?

आंध्र प्रदेश पुलिस के अपराध जांच विभाग ने मार्च 2023 में पिछले तेलुगु देशम पार्टी शासन के दौरान एपी राज्य कौशल विकास निगम में 3300 करोड़ के कथित घोटाले की जांच शुरू की थी।

जांच भारतीय रेलवे यातायात सेवा (आईआरटीएस) के पूर्व अधिकारी अरजा श्रीकांत को जारी किए गए नोटिस के बाद हुई है। अरजा श्रीकांत 2016 में एपीएसएसडीसी के सीईओ थे। इस मामले में अरजा श्रीकांत आरोपी भी थे लेकिन बाद में वह सरकारी गवाह बन गए। इस मामले में तीन आईएएस अधिकारियों के बयान भी लिए गए हैं।

2016 में टीडीपी सरकार के कार्यकाल के दौरान, बेरोजगार युवाओं को उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए कौशल प्रशिक्षण प्रदान करके सशक्त बनाने के उद्देश्य से एपी राज्य कौशल विकास निगम की स्थापना की गई थी। जिसके तहत युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण देने के लिए योजना शुरू की गई थी।

इस योजना के तहत हैदराबाद और इसके आसपास के इलाकों में स्थित उद्योगों में काम करने के लिए युवाओं को ट्रेनिंग दी जाती थी। सरकार ने इस योजना की जिम्मेदारी एक कंपनी को दी थी। इस योजना के तहत छह क्लस्टर्स बनाए गए और इन पर कुल 3300 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। जिसके हर क्लस्टर पर 560 करोड़ रुपये खर्च होना था।

CID की प्रारंभिक जांच में क्या खुलासा हुआ था?

- टीडीपी सरकार ने 3300 करोड़ की एक परियोजना के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया।

-इस समझौता ज्ञापन में सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया लिमिटेड और डिजाइन टेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक संघ शामिल था।

- सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया को कौशल विकास के लिए छह केंद्र स्थापित करने का काम सौंपा गया था।

- राज्य सरकार को कुल परियोजना लागत का लगभग 10% योगदान देना था, जबकि सीमेंस और डिजाइन टेक शेष धनराशि अनुदान सहायता के रूप में देंगे।

CID की जांच में कई बातें आई सामने...

- ट्रेंडर प्रोसेस की कमी थी: परियोजना मानक निविदा प्रक्रिया का पालन किए बिना शुरू की गई थी।

- राज्य कैबिनेट ने इस परियोजना के लिए मंजूरी नहीं दी थी।

-धन का दुरुपयोग: सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया कथित तौर पर परियोजना में अपने किसी भी संसाधन का निवेश करने में विफल रही और इसके बजाय राज्य द्वारा आवंटित 371 करोड़ का एक बड़ा हिस्सा अपनी शेल कंपनियों को भेज दिया।

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