जिस काले कानून से उर्मिला मातोंडकर ने की CAA की तुलना, जानिए क्या है वो
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का बॉलीवुड की कई हस्तियों ने विरोध किया, जिसमें अब उर्मिला मातोंडकर का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने सीएए की तुलना अंग्रेजों के समय में आए रॉलेट एक्ट से की है। रॉलेट ऐक्ट को ब्रिटिश शासकों ने 1919 में प्रथम विश्व युद्ध के बाद पास कराया था और इस कानून को इतिहास में काला कानून भी कहा जाता है।
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गुरुवार को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर पुणे में आयोजित कार्यक्रम में पहुंची उर्मिला ने कहा, '1919 में आया रॉलेट एक्ट और 2019 में आया सीएए दोनों को इतिहास में काले कानून के तौर पर याद किया जाएगा। सीएए गरीबों के खिलाफ है। जैसा कि कहा जा रहा है कि ये कानून मुस्लिम विरोधी भी है। हम ऐसा कानून नहीं चाहते जो धर्म के आधार पर मेरी पहचान और नागरिकता का पता लगाता हो।'
क्या था रॉलेट एक्ट?
काला कानून कहे जाने वाला रॉलेट एक्ट भारत की ब्रिटानी सरकार द्वारा भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने के लिए बनाया गया था। ये कानून सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली सेडिशन समिति की सिफारिशों के आधार पर बनाया गया था। इससे ब्रिटिश सरकार को ये अधिकार प्राप्त हो गया था, कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाए, उसे जेल में बंद कर सकती थी। यानी सरकार को ये अधिकार था कि वह किसी को भी बिना पूछताछ और सबूत के जेल में डाल सकती थी।
कानून के आने से बाद से इसका जमकर विरोध हुआ था। रॉलेट एक्ट को एक काला कानून इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि इसके तहत अपराधी को उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले का नाम जानने का भी अधिकार नहीं था। तब देशव्यापी हड़तालें, जूलूस और प्रदर्शन होने लगे थे। महात्मा गांधी ने बड़े पैमाने पर हड़ताल का आह्वान किया था।
रॉलेट एक्ट के विरोध में हुए आंदोलन का संबंध जलियांवाला बाग से भी था। 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में हजारों लोग रॉलेट एक्ट के विरोध में एकत्रित हुए थे। तब अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने इस बाग के मुख्य द्वार को बंद करवा दिया था और निहत्थी भीड़ पर बिना किसी चेतावनी के 10 मिनट तक गोलियों की बरसात करवाई थी। इस घटना में करीब 1000 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 1500 से ज्यादा घायल हुए थे। हालांकि ब्रिटिश सरकार मरने वाले लोगों की संख्या 379 और घायल लोगों की संख्या 1200 बताती है।












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