NPR क्या और 2010 से कितना है अलग

एनपीआर
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मोदी कैबिनेट ने मंगलवार को 2021 की जगगणना और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर को अपडेट करने की मंज़ूरी दे दी.

जनगणना 2021 में शुरू होगी लेकिन एनपीआर अपटेड का काम असम को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रैल 2020 से सितंबर 2020 तक चलेगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गृह मंत्रालय ने 2021 की जनगणना के लिए 8, 754 करोड़ रुपए और एनपीआर अपडेट करने के लिए 3,941 करोड़ रुपए के ख़र्च के प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दी है.

एनपीआर यानी नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर क्या है?

एनपीआर सामान्य रूप से भारत में रहने वालों या यूजुअल रेजिडेंट्स का एक रजिस्टर है. भारत में रहने वालों के लिए एनपीआर के तहत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है. यह भारतीयों के साथ भारत में रहने वाले विदेशी नागरिकों के लिए भी अनिवार्य होगा. एनपीआर का मक़सद सामान्य रूप से देश में रहने वाले लोगों के व्यापक रूप से पहचान से जुड़ा डेटाबेस तैयार करना है.

पहला एनपीआर 2010 में तैयार किया गया और इसे अपडेट करने का काम साल 2015 में घर-घर जाकर सर्वे के ज़रिए किया गया. अब इसे एक बार फिर से अपडेट करने का काम 2020 में अप्रैल महीने से सितंबर तक 2021 की जनगणना में हाउसलिस्टिंग फेज के साथ चलेगा.

इसे नागरिकता क़ानून 1955 और सिटिज़नशिप (रजिस्ट्रेशन ऑफ सिटिज़न्स एंड इश्यू ऑफ नेशनल आइडेंटिटी कार्ड्स) रूल्स, 2003 के प्रावधानों के तहत गाँव, पंचायत, ज़िला, स्टेट और राष्ट्रीय स्तर पर किया जाएगा.

एनआरसी
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यूजुअल रेजिडेंट्स का मतलब क्या है?

सिटिज़नशिप रूल्स, 2003 के अनुसार एक यूजुअल रेजिडेंट वो है जो भारत के किसी इलाक़े में पिछले छह महीने से रहा है या इसे ज़्यादा समय तक रहना चाहता है. एनपीआर के तहत जो डेटाबेस तैयार होगा उसमें जनसांख्यिकीय जानकारी के साथ बायोमिट्रिक ब्यौरा भी लिया जाएगा. इसके तहत आधार, मोबाइल नंबर, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी और भारतीय पासपोर्ट नंबर की जानकारी ली जाएगी.

आधार साझा करना सुप्रीम कोर्ट के नियम के हिसाब के ख़ुद की मर्जी से होगा. जनसांख्यिकी जानकारी के तहत व्यक्ति का नाम, घर के मुखिया से संबंध, माता-पिता का नाम, विवाहितों के पति और पत्नी के नाम, लिंग, जन्मतिथि, सिंगल और विवाहित, जन्म स्थान, राष्ट्रीयता, वर्तमान पता, वर्तमान पते पर कब तक रहना है, स्थायी निवास, प्रोफ़ेशन और शैक्षणिक डिग्रियों की जानकारी मांगी जाएगी.

2010 के एनपीआर में 15 पॉइंट्स का डेटा संग्रह किया गया था. इसमें माता-पिता की जन्म तिथि और जन्म स्थान के अलावा पिछले निवास स्थल की जानकारी नहीं मांगी गई थी. एनपीआर 2010 में डेटा संग्रह का काम 2011 की जनगणना में हुआ था.

भारत
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जनगणना क्या है?

जनगणना में आबादी की गिनती की जाती है. यह हर दस साल बाद होती है. जनगणना 2021 भारत की 16वीं जनगणना है. पहली जनगणना 1872 में हुई थी. हालांकि आज़ादी के बाद यह आठवीं जनगणना होगी. पहली बार 2021 की जनगणना में डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है.

एनपीआर और एनआरसी में क्या फ़र्क़ है?

एनपीआर एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स से अलग है. एनआरसी में विदेशी नागरिक शामिल नहीं हैं. सिटिज़नशिप रूल्स 10 दिसंबर, 2003 को नोटिफाई हुआ था. इसी के तहत एनआरसी की बात कही गई थी जिसमें भारतीय नागरिकों, जो भारत में रह रहे हैं या भारत से बाहर, उनका एक रजिस्टर तैयार करने का प्रावधान है. मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एनपीआर और एनआरसी में कोई संबंध नहीं है.

उन्होंने ये भी कहा कि एनपीआर डेटा का इस्तेमाल एनआरसी में नहीं किया जाएगा. लेकिन गृह मंत्रालय की 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया था कि एनपीआर एनआरसी का पहला चरण है. हालांकि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा है कि एनपीआर जनसंख्या रजिस्ट्रेशन है न कि नागरिकता रजिस्टर.

उन्होंने कहा कि एनपीआर का एनआरसी से कोई संबंध नहीं है. एनपीआर और एनआरसी को लेकर सरकार के भीतर से ही कई तरह के विरोधाभासी बयान आए हैं.

अमित शाह
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किन राज्यों ने एनपीआर को नहीं लागू करने की घोषणा की है?

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने घोषणा की है कि वो अपने राज्य में एनआरसी और सीएए लागू नहीं करेगी. ममता बनर्जी ने कहा था, ''बिना राज्य सरकार की अनुमति के एनपीआर का काम प्रदेश में शुरू नहीं किया जा सकता है.'' केरल और राजस्थान ने भी ऐसी ही घोषणा कर रखी है. सीएए के बाद ग़ैर-बीजेपी शासित राज्यों ने एनपीआर और एनआरसी को लेकर असहयोग की घोषणा कर रखी है.

एनपीआर से असम को अलग क्यों रखा गया है?

असम में एनपीआर को लागू नहीं किया जाएगा. असम में हाल ही में एनआरसी को लागू किया गया था और इसके तहत अवैध प्रवासियों को गिरफ़्तार किया गया. एनआरसी का उद्देश्य अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजना है.

एनपीआर का विरोध क्यों हो रहा है?

कई राजनीतिक धड़ों का कहना है कि एनपीआर को एनआरसी से अलग कर नहीं देखा जा सकता. उसी तरह सीएए के बार में भी कहा जा रहा है कि इसे एनआरसी से जोड़कर ही देखना चाहिए. फॉरवर्ड ब्लॉक के विधायक अली इमरान राम्ज़ ने इसके विरोध में तर्क दिया है, ''अगर आप एनआरसी को रोकना चाहते हैं तो पहले एनपीआर को रोकना होगा. जनगणना के नाम पर दोनों को अंजाम देने की साज़िश है. अगर कोई राज्य सरकार एनआरसी के ख़िलाफ़ है तो पहले उसे एनपीआर रोकना चाहिए.''

23 जुलाई, 2014 को तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजुजू ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा था, ''सरकार ने नेशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिज़न्स बनाने का फ़ैसला किया है. यह एनपीआर के डेटा के आधार पर किया जाएगा.''

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