क्या है नया भूमि अधिग्रहण कानून, जिसका लाभ चाहते हैं किसान? सरकार से क्या-क्या है डिमांड, जानें सबकुछ

Delhi Farmers Protest: किसानों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा एक बार फिर से सुर्खियों में है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में आज सोमवार को हजारों किसान नोएडा से दिल्ली की ओर मार्च करने पर अड़े हैं। किसान पांच प्रमुख मांगों को लेकर सोमवार को संसद परिसर की ओर मार्च करेंगे, जिसके कारण दिल्ली-एनसीआर क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और रूट डायवर्जन किया गया है।

असल में काफी वक्त से किसान नोएडा की तीनों अथॉरिटी का घेराव कर रहे हैं। रविवार को किसान और प्रशासन के बीच बैठक हुई, लेकिन जब मांगों पर सहमति नहीं बनी तो उन्होंने दिल्ली में आकर विरोध प्रदर्शन कपने की बात कही हैं। किसानों की मांग है कि जमीन अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को 10 फीसदी विकसित प्लॉट दिया जाए और नया भूमि अधिग्रहण कानून का लाभ मिले।

Farmers Agitation

क्या है विरोध कर रहे किसानों की मांग?

किसानों का कहना बै कि नए भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के मुताबिक 1 जनवरी 2014 के बाद अधिग्रहित भूमि का 4 गुना मुआवजा दिया जाना चाहिए। किसानों का कहना है कि गौतमबुद्ध नगर जिले में पिछले 10 सालों से सर्किल रेट भी नहीं बढ़ाया गया है, ऐसे में नए भूमि अधिग्रहण कानून के लाभ जिले में लागू किए जाने चाहिए। किसानों की ये भी मांग है कि उनको जमीन अधिग्रहण के बदले 10 फीसदी विकसित लैंड मिलना चाहिए। इतना ही नहीं इसपर उन्हें 64.7 फीसदी की दर से मुआवजे की भी मांग की है। उन्होंने भूमिधर, भूमिहीन किसानों के बच्चों के लिए रोजगार की भी मांग की है।

ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर ये नया भूमि अधिग्रहण कानून क्या है? भूमि अधिग्रहण अधिनियम को समझने से पहले जानते हैं कि आखिर ''भूमि अधिग्रहण'' क्या होता है? भूमि अधिग्रहण का मतलब, उस प्रक्रिया से होता है, जिसके तहत केंद्र या राज्य सरकार र सार्वजनिक हित से प्रेरित होकर क्षेत्र के बुनियादी विकास, औद्योगीकरण या अन्य गतिविधियों के लिए नियमानुसार नागरिकों की निजी संपत्ति का अधिग्रहण करती हैं। इसके बदले में लोगों को उनकी जमीन के बदले भूमि के मूल्य के साथ ही उनके पुनर्वास के लिए मुआवजा दिया जाता है।

Land Acquisition Act, 2013: क्या है नया भूमि अधिग्रहण कानून?

🔴 भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के कुछ विसंगतियों को दूर करने और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई समितियों के सुझावों के आधार पर भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 कानून बनाया गया था। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 भारत सरकार द्वारा पारित एक कानून है।

🔴 भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत उचित मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित करने का प्रावधान है। भूमि अधिग्रहण से लोगों के अनैच्छिक विस्थापन को कम करना, प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना, प्रभावित लोगों को विकास में शामिल करना इस नए कानून का लक्षय है।

🔴 भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत भूमि अधिग्रहण के लिए निजी क्षेत्र की परियोजनाओं में कम से कम 80 फीसदी और सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं में कम से कम 70 फीसदी भू-मालिकों की सहमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

🔴 भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत सिंचित बहु-फसल भूमि और दूसरी कृषि भूमि के अधिग्रहण पर कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।

🔴 भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत केंद्र या राज्य सरकार ज्यादा से ज्यादा सिर्फ तीन साल के लिए अस्थायी रूप से भूमि अधिग्रहण कर सकती है। ऐसे मामलों में पुनर्वास और पुनर्स्थापन का कोई प्रावधान नहीं है।

🔴 भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत निजी अस्पतालों और निजी शिक्षण संस्थानों को छोड़कर बाकी सभी पर यही नियम लागू होता है।

प्वाइंट में समझे, क्या है विरोध कर रहे किसानों की डिमांड?

  • कानूनी रूप से गारंटीकृत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)
  • कृषि ऋणों की माफी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन
  • पिछले विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज किए गए पुलिस मामलों को वापस लेना, 2021 लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय
  • भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की बहाली
  • 2020-21 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान मरने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा
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