Mgnrega Scheme: मनरेगा क्या है? कब शुरू हुई, कितनी कमाई होती है, नए बिल से क्या बदलेगा- जानें हर सवाल का जवाब
Mgnrega Scheme: भारत में ग्रामीण रोजगार और आजीविका की चर्चा मनरेगा के बिना अधूरी मानी जाती है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) बीते लगभग बीस वर्षों से देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए आय और सुरक्षा का बड़ा आधार रहा है।
अब केंद्र सरकार इस कानून को समाप्त कर एक नए विधेयक के जरिए नई ग्रामीण रोजगार योजना लागू करने की तैयारी में है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि मनरेगा की भूमिका क्या रही, इससे ग्रामीणों को कौन-कौन से फायदे मिलते थे और प्रस्तावित नए बिल से आम ग्रामीण मजदूरों की जिंदगी में क्या और कैसे बदलाव आने वाला है...

What is MGNREGA: मनरेगा क्या है, कब शुरू हुई?
मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम साल 2005 में संसद से पारित हुआ और 2006 से पूरे देश में लागू किया गया। यह दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजनाओं में से एक मानी जाती है।
इस कानून का मूल उद्देश्य था- ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हर परिवार को कम से कम 100 दिन का मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराना, ताकि गरीबी कम हो, पलायन रुके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
मनरेगा के तहत किसे और कैसे काम मिलता था?
18 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी ग्रामीण नागरिक हो वो इसके लिए एलिजिबल था। सड़क निर्माण, तालाब खुदाई, नहर, खेतों की मेड़, जल संरक्षण, बागवानी, सामुदायिक संपत्तियों का निर्माण जैसे सार्वजनिक कार्य। मनरेगा को ग्रामीण मजदूरों का कानूनी अधिकार कहा जाता था क्योंकि काम मांगने पर सरकार को 15 दिन के भीतर रोजगार देना अनिवार्य था।
अगर काम नहीं मिलता, तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान था। मजदूरी सीधे बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते में ट्रांसफर की जाती थी। कम से कम एक-तिहाई श्रमिक महिलाओं का होना अनिवार्य था। सोशल ऑडिट के जरिए काम और भुगतान की जांच होती थी।
MGNREGA Income Per Day: मनरेगा में कितनी कमाई होती थी?
अब तक ज्यादातर राज्यों में मनरेगा के तहत मजदूरी करीब ₹220 प्रतिदिन के आसपास थी (राज्य के हिसाब से थोड़ा अंतर)। एक परिवार साल में 100 दिन काम करके करीब ₹22,000 तक कमा सकता था, जो ग्रामीण गरीब परिवारों के लिए बड़ा सहारा था।
केंद्र सरकार ने मनरेगा की जगह नई योजना लाने का फैसला किया है। इसका नाम रखा गया है 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)'(VB-G RAM G) । इस नई योजना के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। मजदूरी को ₹220 से बढ़ाकर ₹240 प्रतिदिन किए जाने की बात सामने आई है। सड़क, जल संरक्षण, तालाब, बागवानी, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और सामुदायिक विकास पर ज्यादा फोकस होगा।
क्या मनरेगा पूरी तरह खत्म हो जाएगी?
हां...नए बिल में साफ लिखा है कि 2005 का MGNREGA कानून रद्द (Repeal) किया जाएगा। यानी नया कानून लागू होने के बाद मनरेगा नहीं रहेगी, केवल नई योजना ही लागू होगी। संसद से पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नया कानून लागू होगा। कानून लागू होने के 6 महीने के भीतर राज्यों को नई योजना लागू करनी होगी। पुराने जॉब कार्ड की जगह नया डिजिटल और बायोमेट्रिक आधारित पंजीकरण सिस्टम आएगा।
मजदूरी दरें तय होंगी या बदलेंगी?
नए बिल में मजदूरी की निश्चित राशि नहीं लिखी गई है। इसका मतलब मजदूरी दरें केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर तय करेंगी। फिलहाल यह साफ नहीं है कि मजदूरी हर राज्य में बढ़ेगी या नहीं।
क्या सभी को 125 दिन का काम मिलेगा?
125 दिन का रोजगार गारंटी के तौर पर होगा, लेकिन इसके लिए शर्तें हैं जिसमें पहली शर्त यह है कि परिवार ग्रामीण होना चाहिए। वयस्क सदस्य को बिना कौशल वाला श्रम करने के लिए तैयार होना होगा। काम केवल सरकार द्वारा तय सार्वजनिक परियोजनाओं में मिलेगा। यह अपने-आप नहीं, बल्कि काम मांगने पर मिलेगा।
नए बिल में यह प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकारें बोवाई और कटाई के मौसम में कुछ समय के लिए सरकारी काम रोक सकती हैं। ताकि खेती के समय मजदूरों की कमी न हो। उस दौरान मजदूर खेतों में काम कर सकेंगे और सरकारी काम बाद में मिलेगा।
कुल मिलाकर क्या बदलेगा?
मनरेगा से शुरू हुई ग्रामीण रोजगार की कानूनी गारंटी अब एक नए ढांचे में जा रही है।सरकार का दावा है कि इससे रोजगार के दिन बढ़ेंगे, मजदूरी सुधरेगी और ग्रामीण बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।हालांकि, विपक्ष और मजदूर संगठनों का कहना है कि मनरेगा जैसी मजबूत कानूनी सुरक्षा कमजोर हो सकती है। अब असली तस्वीर तब साफ होगी, जब नया कानून लागू होगा और ज़मीन पर इसका असर दिखेगा।
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