क्या है कर्नाटक वाल्मीकि कॉरपोरेशन घोटाला? जिसमें ईडी ने कांग्रेस के पूर्व मंत्री के घर पर भी की छापेमारी
बेंगलुरू में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने बुधववार की सुबह कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से संबंधित कथित घोटाले में कई जगहों पर छापेमारी की। ईडी ने बेंगलुरू के कई इलाकों में छापेमारी की जिसमें कर्नाटक के पूर्व अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी नागेंद्र का अपार्टमेंट और निगम के अध्यक्ष बसनगौड़ा दद्दाल के ठिकाने भी शामिल थे। आइए जानते हैं क्या है कर्नाटक वाल्मीकि कॉरपोरेशन घोटाला?

बता दें ईडी की ये छापेमारी यूनियन बैंक ऑफ इंडिया एमजी रोड शाखा में निगम के खातों से लगभग 94 करोड़ रुपये की हेराफेरी से जुड़ी है। इन पैसों को अवैध रूप से विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया गया, जिनमें से कुछ फर्जी संस्थाओं से जुड़े थे। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के मुंबई हेडआफिस ने इस मामले में सीबीआई से शिकायत की थी।
बुधवार की सुबह 7 बजे से ही बेंगलुरू में ईडी की टीमों ने विजयनगर, बीईएल सर्किल, जगजीवनरामनगर और कोरमंगला समेत कई इलाकों में छापेमारी शुरू कर दी। निशाने पर आए ठिकानों में पूर्व मंत्री नागेंद्र का डलास कॉलोनी स्थित अपार्टमेंट भी शामिल था।
करोड़ों रुपये अवैध ट्रांसफर हुए थे
कर्नाटक का करोड़ों का कथित घोटाला तब प्रकाश में आया जब विकास निगम के लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन पी ने कर्नाटक के निगम द्वारा संचालित निगम के खाते से 187 करोड़ रुपये का अवैध ट्रांसफर का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली थी। 52 वर्षीय निगम अधीक्षक चंद्रशेखरन पी. ने एक सुसाइट नोट छोड़ा था।
मंत्री को देना पड़ा था इस्तीफा
उन्होंने सुसाइड नोट में आरोप लगाया था कि 2024-25 प्रोजेक्ट के लिए आवंटित 187 लाख रुपये को अध्यक्ष की जानकारी के बिना अनधिकृत खाते में ट्रांसफर कर दिया गया है। इसके बाद तत्कालीन कर्नाटक के आदिवासी कल्याण मंत्री बी नागेंद्र को इस्तीफा देना पड़ा था।
कई अकाउंट में करोड़ों रुपये जमा किए गए थे
26 फरवरी, 2024 को निगम के खाते से प्रबंध निदेशक और अकाउंट्स के अवैध हस्ताक्षरों करके 88 मिलियन अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। इस अनधिकृत हस्तांतरण ने संदेह पैदा किया और आगे की जांच की गई।
निमग के अधीक्षक ने भी किया था ये खुलासा
बता दें निगम के अधीक्षक चंद्रशेखर ने खुलासा किया था कि आईटी कंपनियों और हैदराबाद के सहकारी बैंक के कई अकाउंट में 88 करोड़ 62 लाख रुपये अवैध रूप से जमा किए गए थे। कर्नाटक सरकार ने इसकी जांच के लिए पुलिस की टीम गठित की थी लेकिन जिस बैंक से पैसा ट्रांसफर किया गया था, उसने ये कथित घोटाले को सीबीआई को सौंप दिया।
कर्नाटक के हाई-प्रोफाइल कांग्रेस नेता जांच के घेरे में
बता दें कर्नाटक के पूर्व मंत्री नागेंद्र इस घोटाले में कथित संलिप्तता है जिस कारण वो खास तौर पर रामक्या उत्सव अपार्टमेंट में एक प्लॉट के मामले में जांच के घेरे में हैं। ईडी ने इन छापों के जरिए सबूतों की तलाश में जुटी हुई है।
इसके अलावा ईडी की छापेमारी वाले स्थानों में येलहंका में मौजूदा कांग्रेस विधायक बसवनगौड़ा दद्दल का घर भी शामिल था। ईडी ने और सबूत जुटाने के लिए वाल्मीकि विकास निगम बोर्ड के दफ्तरों पर भी छापेमारी की।












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