क्या है जम्मू कश्मीर आरक्षण और पुनर्गठन विधेयक? क्या लोकसभा चुनाव में भाजपा को होगा इससे फायदा?

J&K Reservation and Reorganisation Amendment Bill: जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2023 लोकसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया है। यह बिल 6 दिसंबर 2023 को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। अब जम्मू कश्मीर आरक्षण और पुनर्गठन विधेयक को राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री अमित शाह पेश करने वाले हैं। इस विधेयक को लेकर जम्मू कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर से चर्चा होने लगी है और बहस का दौर शुरू हो गया है।

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इन विधेयकों के पास होने को लेकर सत्ता के गलियारों में चर्चा होने लगी है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार इस विधेयक के जरिए जम्मू-कश्मीर की भाजपा इकाई को मजबूत करने वाली है। तो आइए जानें ये विधयेक क्या है और इसके पास हो जाने से क्या होगा फायदा?

J&K Reservation Reorganisation Amendment Bill

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा का इस विधयक के पीछे का मकसद लोकसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर में अच्छा प्रदर्शन करना है। वहीं इसके साथ ही साथ आगामी विधानसभा चुनाव में भी अपनी पकड़ मजबूत करनी है। भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में कश्मीर घाटी के किसी क्षेत्रीय दल से बिना हाथ मिलाए जम्मू कश्मीर की सत्ता चाहती है।

क्या है जम्मू कश्मीर आरक्षण और पुनर्गठन विधेयक?

  • -जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक-2023, जम्मू और कश्मीर आरक्षण अधिनियम, 2004 को संशोधन करता है। वहीं जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक-2023, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को संशोधित करके लाया दया है।
  • -यह 2019 अधिनियम में संशोधन करने और कश्मीरी प्रवासियों और पीओके से विस्थापित व्यक्तियों को विधान सभा में प्रतिनिधित्व प्रदान करने का कोशिश करता है।
  • -जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 के मुताबिक, ये उस वर्ग जो "कमजोर और वंचित वर्ग (सामाजिक जाति)" के रूप जाना जाता था। लेकिन अब "अन्य पिछड़ा वर्ग" के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  • -इसके अलावा जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 में गुज्जरों के साथ पहाड़ियों को अनुसूचित जनजाति को भी दर्जा देने का प्रावधान है।
  • -जम्मू कश्मीर आरक्षण और पुनर्गठन विधेयक में कश्मीरी प्रवासी समुदाय से दो सदस्यों को नामित करने का प्रावधान है, जिसमें एक महिला सदस्य होगी और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से विस्थापित व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक व्यक्ति को विधान सभा में नामित करने की उपराज्यपाल की शक्ति होगी।
  • -इस विधेयक में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सीटों की कुल संख्या 107 से बढ़ाकर 114 करने का प्रस्ताव है, जिनमें से 7 अनुसूचित जाति के सदस्यों के लिए और 9 सीटें अनुसूचित जनजाति के विधायकों के लिए आरक्षित होंगी।
  • - विधेयक के मुताबिक, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विधानसभा की 24 सीटें खाली रहेंगी। इसलिए, विधानसभा की प्रभावी ताकत 83 है, जिसे संशोधन में बढ़ाकर 90 करने का प्रयास किया गया है।
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