क्या होता है 'हेकलर वीटो' सिद्धांत? कर्नाटक हाईकोर्ट में हिजाब विवाद पर सुनवाई के दौरान हुआ इसका जिक्र
नई दिल्ली, फरवरी 16। हिजाब विवाद को लेकर मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील देवदत्त कामत हाईकोर्ट के समक्ष तुर्की और दक्षिण अफ्रीका की अदालतों के कुछ निर्णय का हवाला दिया। इस दौरान देवदत्त कामत ने 'हेकलर वीटो' का जिक्र किया। कल से ही ये शब्द सुर्खियों में बना हुआ है, लेकिन कई लोग ये जानना चाहते हैं कि आखिर ये 'हेकलर वीटो' है क्या, जिसका जिक्र कर्नाटक हाईकोर्ट में किया गया और इसका हिजाब विवाद मामले से क्या संबंध है?

हेकलर वीटो को लागू नहीं किया जा सकता- कामत
देवदत्त कामत ने कर्नाटक हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा था कि कोई राज्य किसी को सड़क पर बाहर जाने से सिर्फ इसलिए नहीं रोक क्योंकि कोई उन्हें पसंद नहीं करता, ऐसे में मौलिक अधिकारों पर पाबंदी लगाने के लिए हेकलर वीटो को लागू नहीं किया जा सकता। देवदत्त कामत ने इस दौरान संविधान के आर्टिकल 25 का हवाला देते हुए कहा कि यदि राज्य यह कहता है कि किसी के सिर पर स्कार्फ पहनने से परेशानी हो सकती है और इसलिए इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है, तो इस तरह के तर्क की अनुमति नहीं है।
क्या होता है हेकलर वीटो?
आपको बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका में हेकलर वीटो सिद्धांत एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके जरिए सामाजिक रूप से शक्तिशाली समूह सार्वजनिक अव्यवस्था या अशांति की धमकी देकर आलोचना वाले या असुविधाजनक भाषण को बंद कर सकते हैं। इसके अलावा यह एक ऐसी स्थिति है जो एक पार्टी स्पीकर के संदेश से असहमत होती है वहां स्पीकर को चुप करा दिया जाता है। कानूनी अर्थों में हेकलर वीटो तब होता है जब प्रतिक्रिया करने वाले पक्ष के व्यवहार को रोकने के लिए सरकार की ओर से स्पीकर के अधिकार को कम या प्रतिबंधित किया जाता है।












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