Delhi Smog: क्या है GRAP सिस्टम जिसे दिल्ली में प्रदूषण को रोकने के लिए किया जाता है लागू
Delhi Smog GRAP-1: सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। आज राजधानीवासियों की सुबह घनी धुंध की चादर के साथ हुई। आनंद विहार, अक्षरधाम से लेकर कई इलाको में AQI लेवल 330 को पार कर गया। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने GRAP-1 को लागू कर दिया है, ताकि प्रदूषण के स्तर कम किया जा सके। ऐसे में आइए जानते हैं क्या हैं GRAP के अलग-अलग लेवल और क्यों पड़ी इसकी जरूरत।
GRAP (Graded Response Action Plan) दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक योजनाबद्ध प्रणाली है। इसे मुख्य रूप से ठंड के मौसम में लागू किया जाता है, जब वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है और धुंध (स्मॉग) की समस्या गंभीर हो जाती है। इस योजना को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) ने 2017 में लागू किया था।

GRAP की अहम बातें
GRAP का उद्देश्य वायु प्रदूषण की स्थिति के अनुसार चरणबद्ध तरीके से उपाय लागू करना है। जैसे ही प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, उसी हिसाब से कड़े कदम उठाए जाते हैं। इसे चार चरणों में विभाजित किया गया है। मध्यम (Moderate), खराब (Poor), बहुत खराब (Very Poor), और गंभीर (Severe)। इसी लिहाज से Grap लेवल 1,2,3,4 को लागू किया जाता है।
लेवल -1
जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 201-300 के बीच होता है। तो इसे लागू किया जाता है। इस दौरान लागू होने वाले प्रतिबंध और सावधानी
- कचरे को खुले में जलाने पर प्रतिबंध।
- सड़कों की नियमित सफाई और पानी का छिड़काव।
- यातायात को सुचारू बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और सिग्नलिंग सुधार।
- निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय सुनिश्चित करना।
लेवल- 2
जब AQI 301-400 के बीच होता है तो इसे लागू किया जाता है, इस दौरान लागू होने वाले प्रतिबंध और सावधानी
- डीजल जनरेटरों के उपयोग पर प्रतिबंध (आवश्यक सेवाओं को छोड़कर)।
- कचरे को खुले में जलाने पर सख्त निगरानी।
- निर्माण और तोड़-फोड़ की गतिविधियों पर सख्त निगरानी, विशेष रूप से धूल को नियंत्रित करने के लिए।
- सड़कों पर पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा।
लेवल -3
जब AQI 401-450 के बीच होता है तो इसे लागू किया जाता है। इस दौरान लागू होने वाले प्रतिबंध और जरूरी सावधानी
- निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध (आवश्यक परियोजनाओं को छोड़कर)।
- सड़कों पर यांत्रिक सफाई और पानी का छिड़काव।
- ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध (आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर)।
- ईंट भट्टों, गर्म मिश्रण संयंत्रों, और स्टोन क्रशरों जैसे प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर प्रतिबंध।
- पार्किंग शुल्क में वृद्धि।
लेवल- 4: आपात स्थिति
जब AQI 450 या उससे अधिक हो जाता है और प्रदूषण गंभीर स्तर पर लगातार 48 घंटे तक बना रहता है तो इसे लागू किया जाता है। इस दौरान लागू होने वाले प्रतिबंध
- निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध।
- ट्रकों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध (मूलभूत आवश्यकताओं को छोड़कर)।ऑड-ईवन स्कीम जैसे यातायात प्रतिबंध, ताकि निजी वाहनों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके।
- स्कूलों, कॉलेजों, और अन्य शैक्षिक संस्थानों को बंद करना।
- इनडोर और आउटडोर खेल गतिविधियों पर रोक।
ध्यान देने वाली बात है कि अगर ग्रैप-1 पहले से लागू है और ग्रैप-2 लागू किया जाता है तो पहले से लागू लेवल-1 के प्रतिबंध के साथ लेवल-2 के प्रतिबंध इसमे जुड़ जाते हैं। ऐसा ही आगे के लेवल पर भी होता है।
GRAP के विभिन्न लेवल का उद्देश्य वायु प्रदूषण की गंभीरता के आधार पर सही समय पर उचित कदम उठाना है। इससे लोगों के स्वास्थ्य को प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाने में मदद मिलती है, विशेषकर उन दिनों में जब दिल्ली और NCR क्षेत्र में वायु गुणवत्ता बहुत खराब होती है।












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