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EFTA क्या है, जिसके साथ भारत ने करार कर रच दिया इतिहास? मोदी सरकार ने कैसे की ये अरबों की डील

हाल ही में भारत और यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के चार देशों के साथ एक अहम समझौता हुआ है। इसके तहत भारत में 10 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं भारत में अगले 15 सालों के दौरान 100 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद है। इस समझौते में शामिल चार देश आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड हैं।

ये एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट तात्पर्य है कि इनमें शामिल देश एक दूसरे के देशों में आयात, निर्यात होने वाली चीजों में कस्टम ड्यूटी या तो कम कर देते हैं या तो हटा देते हैं। इसके साथ ही आयात-निर्यात के नियमों में भी सख्ती नहीं बरती जाती है।

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भारत और EFTA जनवरी 2008 से ही आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर चर्चा कर रहे थे। इस समझौते के तहत भारत और EFTA के चार देशों के साथ व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इस एग्रीमेंट को मोदी सरकार की बड़ी जीत बताया जा रहा है।

समझौते के तहत व्यापार की जाने वाली चीजों में अधिकतम संख्या पर सीमा शुल्क को कम या खत्म किया जाएगा। इस समझौते के तहत 14 चीजों को लेकर सहमति बनी है, जिसमें उत्पत्ति के नियम, सेवाओं में व्यापार, निवेश में बढ़ावा और सहयोग देना, सरकारी खरीद, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स, व्यापार सुविधा आदि शामिल हैं।

इस ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर स्विट्जरलैंड ने भारत को टफ निगोशिएटर बताया है। स्विट्जरलैंड की आर्थिक मामलों की सचिव हेलेना बुडलिगर आर्टिडा ने इंडिया टुडे को बताया कि इस समझौते को लेकर हुई बातचीत कोई छोटी-मोटी दौड़ नहीं बल्कि एक मैराथन थी।

हेलेना आर्टिडा ने कहा कि भारत के साथ बातचीत काफी मुश्किल थी। हमसे कहा गया था कि आपको भारत के बाजारों में इतनी आसानी से एक्सेस नहीं मिलेगा। पहले टैरिफ रेट तय किए जाए, तब हमें भारत के बाजारों में एंट्री मिलेगी। इसके लिए एमओयू साइन करने की जरूरत थी। हम इस पूरी प्रक्रिया को समझते हैं और हमने इसका पालन भी किया।

भारत-ईएफटीए समझौते के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि इन नई शर्तों से भारत में दवाओं की लागत नहीं बढ़े। हेलेना ने स्पष्ट किया कि बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) को लेकर भी बातचीत हुई, जो डब्ल्यूटीओ के कानूनों के अनुरूप है।

हेलेना ने कहा कि यह समझौता उतना आसान नहीं था। ऐसे कई क्षेत्रीय विवाद थे, जिन पर सहमति बन पाना मुश्किल था, जिनमें कश्मीर भी था। हेलेना ने कहा कि स्विट्जरलैंड एक निष्पक्ष देश है, हम अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हैं और किसी तरह के विवाद की स्थिति में संयुक्त राष्ट्र का रुख करते हैं।

आपको बता दें कि व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर का निवेश के लिए किया गया है। इस डील में लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा। डील पूरी होने के बाद अब इंतजार इन देशों के संसद से मंजूरी मिलने का है। मंजूरी मिलने के बाद भारत से मुक्त व्यापार होगा।

हालांकि इस समझौते के तहत एग्रीकल्चर, सोया, डेयरी और कोयला को इस डील में शामिल नहीं किया गया है। पीएलआई से जुड़े सेक्टर्स के लिए भारताय बाजार को नहीं खोला गया है।

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