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आखिर क्या है डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, क्यों हो रहा इसका विरोध, क्या हैं इसके प्रावधान

केंद्र सरकार ने गुरुवार को डेटा प्रोटेक्शन बिल (Digital Personal Data Protection (DPDP) Bill, 2023) को लोकसभा में पेश किया। केंद्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बिल को लोकसभा में पेश किया। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर यह बिल क्या है, इस बिल से आम लोगों को क्या लाभ मिलेगा।

इन सवालों का जवाब हम आपके लिए इस लेख के जरिए लेकर आए हैं। हालांकि केंद्र की ओर से दावा किया जा रहा है कि इस बिल के जरिए डेटा को सुरक्षित किया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष का आरोप है कि यह बिल लोगों के निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है।

digital privacy protection bill

यह बिल मुख्य रूप से उन लोगों के लिए लेकर आया गया है जोकि लोगों के निजी डेटा को संभालते हैं और लोगों के अधिकारों को संरक्षित रखना इसका मुख्य उद्देश्य है। सीमा पार डेटा को शेयर करने को सीमित करने के उद्देश्य से भी इस बिल को लाया गया। जो कंपनियां डेटा का दुरुपयोग करती हैं उनके खिलाफ कार्रवाई करने के उद्देश्य से भी इस बिल को सरकार लेकर आई है।

क्या है मुख्य उद्देश्य?
बिल को लाने के मुख्य उद्देश्य की बात करें तो डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया का गठन करना है, जिसके जरिए केंद्र सरकार डेटा को सुरक्षित कर सकती है। बोर्ड के सदस्य डेटा की सुरक्षा के लिए अहम कदम उठा सकते हैं।

क्या इससे सरकार को फायदा मिलेगा?
इस बिल में प्रस्तावित प्रावधान पर नजर डालें तो अगर अगर अच्छे उद्देश्य से कोई कदम उठाया गया है तो केंद्र सरकार, बोर्ड के चेयरमैन, बोर्ड के सदस्य या किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

कंपनियों पर क्या असर होगा?
अगर किसी कंपनी ने यूजर का डेटा लिया है और उस डेटा की अब कंपनी को बिजनेस के तौर पर उसकी जरूरत नहीं है तो फिर कंपनियों को इस डेटा का इस्तेमाल बंद करना होगा और लोगों से उनकी जानकारी लेना भी बंद करना होगा।

अगर बच्चे के ऊपर किसी भी तरह का दुष्प्रभाव पड़ता है तो किसी भी कंपनी या संस्थान को यह अधिकार नहीं होगा कि वह व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल कर सके। राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले को देखते हुए सरकार को डेटा हासिल करने का अधिकार होगा।

कितना जुर्माना होगा?
इस बिल के तहत अगर नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो भारी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। नियम का उल्लंघन करने पर अधिकतम 250 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है जबकि न्यूनतम 50 करोड़ रुपए का जुर्माना लग सकता है।

क्या है बड़ी चिंता?
इस बिल का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि सरकार, बोर्ड और इसके सदस्यों को इन नियमों के दायरे से बाहर करना गलत है। यह सूचना के अधिकार में संशोधन है। यह बिल निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है ,इसके जरिए सरकार लोगों को नजर रख सकती है।

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