क्या हैं संत रामपाल, इमाम बुखारी और आसाराम बापू में समानताएं?
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। संत रामपाल, जामा मस्जिद के इमाम बुखारी और फिलहाल जेल की हवा खा रहे आसाराम बापू में क्या समानताएं हैं? बेशक, इन सबमें एक समानता तो यह है कि ये बातें धर्म और सत्य की करते हैं, पर कानून का उल्लंघन करने से भी इन्हें कोई परहेज नहीं होता है। आसाराम बापू जेल में हैं। कब वहां से उन्हें राहत मिलेगी, कोई नहीं जानता। उन पर रेप जैसे गंभीर आरोप हैं।

जेल की हवा खाएंगे रामपाल
अभी तक रामपाल पर हत्या के आरोप थे, जिसके लिये उन्हें कोर्ट में पेश होना था, लेकिन खुद को कानून से ऊपर समझने वाले रामपाल ने कहा कि उनके लिये कानून कुछ नहीं और जब पुलिस ने जबरन गिरफ्तारी का ऑपरेशन शुरू किया तो पुलिस और समर्थकों के बीच हुई हिंसा में 10 लोग मारे गये। जाहिर है उन 10 मौतों के जिम्मेदार भी संत रामपाल हैं। संत रामपाल भी जेल की हवा खा सकते हैं। अपने को संत का दावा करने वाले शख्स के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो, यह शर्मनाक हैं।
इमाम से डरती पुलिस
अब बात दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी की। उऩके भी तमाम गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं, पर दिल्ली पुलिस उन्हें कोर्ट के सामने पेश नहीं कर पाई । क्या दिल्ली पुलिस उनसे डरती है... राजधानी के नामवर सामाजिक कार्यकर्ता पवन धीर कहते हैं कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। संत राम पाल के आश्रम से जिस तरह सेगोलिया चलीं उससे साफ है कि संत रामपाल धर्म के साथ-साथ तमाम गड़बड़ भी कर रहे थे। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि भारत में आस्था के नाम पर कानून का उल्लंघन करना सामान्य हो गया है।
सरकार दे कड़ा संदेश
जानकार मानते हैं कि संत रामपाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके सरकार एक बेहतर संदेश दे सकती है। संदेश यह जाएगा कि भले ही देश का संविधान सबको अपनी आस्था के अनुसार किसी धर्म को मानने का अधिकार देता है, पर धर्म के नाम पर लूट-खसोट स्वीकार नहीं की जाएगी।












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