Sikkim avalanche: हिमस्खलन क्या है? नाथुला के पास आई बड़ी आपदा
एवलांच क्या है? यह क्यों होता है? सिक्किम में नाथुला के पास बहुत भयानक हिमस्खलन हुआ है, जिसमें कई लोगों की मौत हुई है और काफी लोग जख्मी हैं। राहत-बचाव का काम चल रहा है।

सिक्किम के मशहूर पर्यटक स्थल नाथुला दर्रे के पास मंगलवार को भयानक हिमस्खलन हुआ है, जिसमें कई लोगों की मौत होने की सूचना है और काफी लोग जख्मी हो गए है। राहत और बचाव का काम लगातार चल रहा है। यह हिमस्खलन मंगलवार दोपहर बाद हुआ है। भारत-चीन सीमा पर स्थित होने की वजह से यहां पर्यटकों की भारी तादाद रहती है। आइए जानते हैं कि एवलांच क्या होता है, स्नो एवालंच के कारण क्या हैं और यह कितना खतरनाक है। यह भी जानते हैं कि अबतक का सबसे भयानक एवालंच कहां हुआ।

एवलांच क्या है?
नेशनल ज्योग्राफिक की वेबसाइट में एवलांच के बारे में बताया गा है कि इसके दौरान बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मिट्टी और दूसरे पदार्थ तेजी से पहाड़ों से नीचे की तरफ लुढ़कने लगते हैं। अगर एवलांच के दौरान पत्थर या मिट्टी गिरती है तो उसे भूस्खलन कहते हैं। लेकिन, जब बर्फ पहाड़ों से अचानक बहुत ही तेजी से नीचे लुढ़कती है तो वह हिमस्खलन कहलाता है।

हिमस्खलन कब होता है?
हिमस्खलन तब शुरू होता है, जब बड़ी मात्रा में बर्फ टूटकर नीचे की ओर गिरनी शुरू हो जाती है। जैसे-जैसे बर्फ नीचे गिरने लगती है, वह बर्फ की सफेद नदी का शक्ल अख्तियार कर लेती है और बर्फीले पदार्थ बादलों की तरह हवा में उड़ने लगते हैं। हिमस्खलन के दौरान टूटने वाली बर्फ की मात्रा 10 लाख टन तक हो सकती है। हिमस्खलन के दौरान बर्फ 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी ज्यादा तेज गिर सकती है। अक्सर, यह स्थिति तब बनती है, जब स्नोपैक की परतें खिसक जाती हैं। यह बर्फ की वह सतहे हैं जो एक क्षेत्र में बन जाती है। ठंड के दिनों कई मीटर मोटी स्नोपैक बन सकती है, जो मोटाई और टेक्स्चर में भिन्न होती है।

हिमस्खलन के कारण क्या हैं?
हिमस्खलन के विभिन्न कारण हो सकते हैं। यह तूफान, तापमान, हवा, पहाड़ों की ढलान, भौगोलिक क्षेत्र, वनस्पति और स्नोपैक की स्थिति से प्रभावित हो सकता है। ज्यादातर ताजा बर्फबारी के बाद हिमस्खलन के होने की संभावना रहती है। क्योंकि, स्नोपैक का स्तर नया रहता है। अगर नई-नई जमा हुई बर्फ तूफान की चपेट में आती है तो दबाव की वजह से उसके खिसकने की आशंका बढ़ जाती है। भूकंप की वजह से भी हिमस्खलन हो सकता है। लेकिन, बहुत ही हल्के कंपन की वजह से हिमस्खलन की घटनाएं हो सकती हैं।
हिमस्खलन को कंट्रोल भी किया जा सकता है
स्की करने वाला एक शख्स भी बड़े हिमस्खलन का कारण बन सकता है। तथ्य यह है कि 90 फीसदी हिमस्खलन की घटनाओं में पीड़ित खुद कारक होता है या उसके साथ मौजूद लोग इसका कारण बनते हैं। आज की तारीख में हिमस्खलन की निश्चित भविष्यवाणी करने में वैज्ञानिक भी सक्षम नहीं हैं। लेकिन, वह स्नोपैक, तापमान और हवा की स्थिति के अनुमान से इसकी खतरनाक स्थिति के बारे में अनुमान जरूर जता सकते हैं। हिमस्खलन को जानबूझकर अंजाम देकर भी खतरे को टाला जा सकता है, जिसे एवलांच कंट्रोल कहते हैं।
हिमस्खलन के खतरे
हिमस्खलन को भयंकर प्राकृतिक घटनाओं में शामिल किया जाता है। हिमस्खलन में इतनी ताकत हो सकती है कि यह सामने पड़े मजबूत से मजबूत ढांचे को भी तबाह कर सकता है। यह हमेशा से ही जानलेवा माना जाता है। 1970 में एक विशाल हिमस्खलन में पेरू का युंगे शहर ही तबाह हो गया था। इसमें 18,000 लोगों की जान चली गई थी।












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