भारत-चीन सेना के बीच ऐसा क्या हुआ कि आ गई हिंसक झड़प की नौबत? 45 साल बाद घटी इतनी बड़ी घटना
नई दिल्ली। भारत-चीन के बीच सीमा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, लद्दाख की गैलवान घाटी में सोमवार की रात दोनों देशों की सेनाओं में हिंसक झड़प के बाद भारत के एक ऑफिरसर समेत 3 जवान शहीद हो गए। वहीं, ऐसी भी खबरें हैं कि इस झड़प में चीन के पांच जवानों की मौत हो गई है हालांकि, चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने इसकी पुष्टि करने से इनकार कर दिया है। सेना के सूत्रों का कहना है कि हिंसक झड़प में किसी भी तरफ से गोलीबारी नहीं की गई है, भारतीय क्षेत्र पर दोनों ओर से शारीरिक लड़ाई हुई जिसमें पत्थर और लोहे की छड़ से हमला किया गया।

सोमवार की रात क्या हुआ?
भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक सोमवार की रात लद्दाख की गैलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई। समझौते के अनुसार चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र से पीछे हट रहे थे। तभी अचानक उनमें से कुछ ने भारतीय कमांडिंग ऑफिसर (कर्नल) पर लोहे की छड़ और पत्थरों से हमला कर दिया। चीन की तरफ से इस कार्रवाई का जवाब भारतीय सैनिकों ने भी दिया।
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पत्थर और डंडे से हमला
सूत्रों के मुताबकि दोनों तरफ से गोलीबारी नहीं हुई, पत्थर और डंडे से हमला किया गया। दोनों सेनाओं के बीच कई घंटे तक यह झड़प चली, फिर करीब आधी रात को भारत और चीनी सैनिकों में झड़प खत्म हुई। इस हमले में कर्नल सहित भारतीय सेना के 3 जवान शहीद हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक झड़प में चीन की सेना को भी नुकसान पहुंचा है। सेना के बीच हिंसक झड़प का सही स्थान अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।

क्या होता है डी-एस्केलेशन का मतलब
डी-एस्केलेशन का मतलब होता है दो देशों के बीच तनाव की तीव्रता को कम करना। साफ शब्दों में कहें तो दो देशों के बीच बन रहे युद्ध जैसे तनाव को कम करने के लिए जो कदम उठाया जाता है उसे डी- एस्केलेशन कहते हैं। इससे पहले भी ही जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा तो भारत ने ये फैसला किया गया था कि भारतीय सैनिक गलवान घाटी ,पैंगोंग सो, डेमचोक के सारे विवादित इलाकों में चीनी सैनिकों के आक्रामक अंदाज से निपटने के लिए कड़ा रुख अपनाएंगे बाद में चीन भारत के साथ उच्च स्तरीय बात के लिए तैयार हुआ और भारत चीन के बीच बैठक भी हुई।

1975 के बाद दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प
सन् 1975 के बाद से यह पहला मौका है जब चीन से लगी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर सेना को अपने सैनिक गंवाने पड़े हैं। जो बात और भी हैरान करने वाले हैं उसके मुताबिक इस ताजा घटनाक्रम में एक भी गोली दोनों तरफ से नहीं चली है। सन् 1975 के बाद पीएलए के साथ हुई टकराव में सेना को पहली बार अपने सैनिक गंवाने पड़े हैं। उस समय अरुणाचल प्रदेश में भारतीय दल जिस समय गश्त पर था उस पर चीनी जवानों ने हमला बोल दिया था।
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