अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी ने पाकिस्तान को लेकर मोदी सरकार पर क्या कहा

अमेरिकी सरकार ने अपनी एक Report में दावा किया है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत पाकिस्तान से निपटने में उदारता से पेश नहीं आएगा.

मोदी
FOREIGN MINISTRY OF UZBEKISTAN
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अमेरिकी सरकार ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत पाकिस्तान से निपटने में उदारता से पेश नहीं आएगा.

अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग की इस रिपोर्ट में उन जोख़िमों का ज़िक्र किया गया है जो साल 2023 में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोख़िम पेश कर सकते हैं.

इस रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष बढ़ने के साथ-साथ, चीन, यूक्रेन और रूस के अलावा जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को भी शामिल किया गया है.

अमेरिकी संसद की सुनवाई के दौरान इस रिपोर्ट को पेश किया गया है. इसमें बताया गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भरे रिश्ते गंभीर चिंता के विषय हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच कटुता भरे रिश्तों का इतिहास सत्तर साल से लंबा है.

दोनों देशों के बीच तीन हज़ार किलोमीटर से लंबी सीमा है, जिसमें कई जगहों पर दोनों देशों के बीच विवाद बना हुआ है.

सीमा विवाद के चलते दोनों देशों के बीच अब तक तीन बार युद्ध हो चुके हैं.

इसके साथ ही दोनों देश एक दूसरे पर अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और चरमपंथ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे हैं.

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में दोनों देशों के बीच तल्ख़ बयानबाजी भी हुई थी.

हालांकि, भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में सत्ता संभालने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिशें की थीं.

मोदी और शाह
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मोदी और शाह

पीएम मोदी ने साल 2015 में अफ़ग़ानिस्तान से लौटते हुए अचानक पाकिस्तान जाकर सबको चौंका दिया था. पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ उन्हें लेने हवाई अड्डे पहुँचे थे.

इसके बाद दोनों नेता हेलिकॉप्टर पर बैठकर पाकिस्तान के रायविंड गए थे.

इसके बाद पीएम मोदी नवाज़ शरीफ़ की पोती की शादी में भी शामिल हुए थे और दिल्ली लौटने से पहले दोनों नेताओं के बीच बैठक भी हुई थी.

पीएम मोदी की इस अघोषित पाकिस्तान यात्रा ने भारत-पाकिस्तान रिश्तों के जानकारों को चौंका दिया था.

हालांकि, इसके बाद पठानकोट वायुसेना अड्डे, उरी के सैन्य अड्डे और फिर पुलवामा में सैनिकों के काफ़िले पर हमले ने दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट भरने का काम किया.

उरी और पुलवामा के बाद भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई की बात कही थी.

पीएम मोदी
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परमाणु युद्ध का दावा

ट्रंप सरकार में अमेरिकी विदेश मंत्री रहे माइक पॉम्पियो ने हाल ही में रिलीज़ हुई अपनी किताब में दावा किया है कि साल 2019 के फरवरी महीने में भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध छिड़ने की नौबत आ गयी थी.

पॉम्पियो ने लिखा है कि 'दुनिया को शायद ठीक से ये नहीं पता है कि भारत और पाकिस्तान साल 2019 की फरवरी में परमाणु युद्ध लड़ने के कितने क़रीब आ गये थे. सच तो ये है कि मुझे भी ठीक से नहीं पता है. मुझे सिर्फ़ इतना पता है कि वे काफ़ी क़रीब आ गए थे.'

पॉम्पियो ने लिखा है कि वह 'वो रात कभी नहीं भूलेंगे' जब वह हनोई में 'परमाणु हथियारों को लेकर उत्तरी कोरिया के साथ बातचीत' कर रहे थे. और, 'भारत-पाकिस्तान ने कश्मीर की उत्तरी सीमा को लेकर दशकों पुराने विवाद में एक दूसरे को धमकाना शुरू कर दिया था.'

इस किताब में पॉम्पियो ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मौजूदा विदेश मंत्री एस जयशंकर को लेकर भी लिखा है जिस पर भारत सरकार की ओर बयान दिया गया है.

हालांकि, परमाणु युद्ध पर किए गए दावे पर भारत सरकार की ओर से औपचारिक टिप्पणी नहीं आई है.

नरेंद्र मोदी
HARISH TYAGI/EPA-EFE/REX/Shutterstock
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क्या कहती है अमेरिकी रिपोर्ट?

अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग की ओर जारी की गई रिपोर्ट में दोनों देशों के बीच तनाव को चिंताजनक बताया गया है.

रिपोर्ट में लिखा गया है, "भारत और पाकिस्तान के बीच संकट विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि इन दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच तनाव बढ़ने का जोखिम है."

हालांकि, रिपोर्ट ये भी बताती है कि 'दोनों देश साल 2021 की शुरुआत में हुए संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने पर आपसी सहमति बनने के बाद अपने संबंधों में मौजूदा शांति को बनाए रखने में इच्छुक नज़र आते हैं.'

इस रिपोर्ट में पाकिस्तान के प्रति आलोचनात्मक रुख़ अपनाया गया है.

रिपोर्ट कहती है कि 'पाकिस्तान एक लंबे समय से भारत विरोधी चरमपंथी समूहों का समर्थन करता रहा है. पाकिस्तान अगर भारत को उकसाने वाली कार्रवाई करता है या वह ऐसा करता हुआ दिखता है तो उस पर भारत की ओर से सैन्य पलटवार किया जा सकता है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पाकिस्तान की ओर से असली उकसावे पर सैन्य बल के साथ जवाब देने की संभावना ज़्यादा है. और दोनों ओर से आपसी रिश्तों में तनाव को देखने का नज़रिया संघर्ष का जोख़िम बढ़ाती है जिसमें कश्मीर में हिंसक अशांति या भारत में चरमपंथी हमला टकराव की वजह बन सकती है.'

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