चीन के शंघाई पोर्ट पर ट्रैफिक जाम लगने से दुनिया भर में क्या-क्या हो सकता है महंगा
शंघाई में लॉकडाउन की वजह से सड़कों के रास्ते सामान ढोने और उन्हें बाजारों और फैक्टरियों में पहुंचाने वाले ट्रकों का चलना भी मुश्किल हो गया है. लेकिन इससे दुनिया के तमाम देश क्यों डर हुए हैं.
चीन में कोरोना संक्रमण के नए मामले बढ़ने के बाद दर्जनों शहरों में पूरी तरह लॉकडाउन लगा है. ओमिक्रॉन वैरिएंट के फैलने की वजह से ढाई करोड़ की आबादी वाला शंघाई शहर संक्रमण की अब तक की सबसे खराब लहर से जूझ रहा है. शंघाई चीन के बड़े कारोबारी शहरों में से एक है और इसे देश की वित्तीय राजधानी भी कहा जाता है. ये शहर न सिर्फ एक इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर है बल्कि यह चीन के सबसे प्रमुख बंदरगाहों में से भी एक है. चीन के अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए ये बंदरगाह काफी अहम है. साल 2021 तक यहां से चीन का 17 फीसदी कंटेनर ट्रैफिक गुजरता था. चीन का 27 निर्यात इसी बंदरगाह से होता है. पिछले दस साल से ये दुनिया के दस बड़े बंदरगाहों में शुमार रहा है. लेकिन शंघाई में लॉकडाउन की वजह से सड़कों के रास्ते सामान ढोने और उन्हें बाजारों और फैक्टरियों में पहुंचाने वाले ट्रकों का चलना भी मुश्किल हो गया है. इस वजह से फॉक्सवैगन और टेस्ला जैसी कंपनियों को अपना कामकाज रोक देना पड़ा है.
एसेट मैनेजमें फर्म जेनस हेंडरसन में इन्वेस्टमेंट मैनेजर माइक केर्ली ने बताया, "कोविड प्रतिबंधों की वजह से बंदरगाह के अंदर और बाहर की सड़क बंद होने से कंटेनर का बैकलॉग लग गया है. इससे उत्पादकता 30 फीसदी घट गई है." कोविड की वजहों से लोगों को घरों में रहने को गया है और इससे सामानों की अनलोडिंग के लिए जरूरी कागजातों की जांच और प्रोसेस करने वाले कर्मचारी भी कम हो गए हैं.
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कंटेनर का जमावड़ा
पहली दिक्कत तो ये है कि सामान ले जाने वाले जहाजों का समुद्र तटों पर जमावड़ा लगा है. ये जहाज अंदर जाने के लिए ग्रीन लाइन के इंतजार में यहां खड़े हैं. वेसल्स वैल्यू के डेटा बताते हैं कि टैंकर, बल्क कैरियर और कंटेनरशिप का वेटिंग टाइम कितना ज्यादा बढ़ गया है. दूसरी दिक्कत ये है कि बंदरगाह में हजारों कंटेनर्स के जमा होने से ग्लोबल सप्लाई चेन में फिर अड़चनें आने लगी हैं. ये सब ऐसे वक्त हो रहा है कि जब विश्लेषक कोरोना के बाद रिकवरी को लेकर भरोसेमंद बयान दे रहे थे.
यूरोपियन यूनियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के अनुमान के मुताबिक शंघाई में इस वक्त ट्रकों की 40 से 50 फीसदी तक कमी हो गई है. शहर के 30 फीसदी कामकाजी लोगों के ही काम पर लौटने की संभावना है. कोविड की नई लहर के बाद बगैर लक्षण वाले लोगों को भी कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर चौदह दिनों के अनिवार्य क्वारंटीन में भेजा जा रहा है. उन्हें उन सेंट्रलाइज्ड क्वारंटीन फैसिलिटीज में भेजा जा रहा है, जिन्हें लोग काफी खराब हालात वाले बता रहे हैं.
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वॉशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर और कपड़ों की सप्लाई पर असर
शंघाई में दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट तो चालू है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है यहां भीड़ लगातार बढ़ जा रही है. शंघाई से जो सामान निर्यात होता है उनमें अहम हैं वॉशिंग मशीनें, वैक्यूम क्लीनर, सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे और कपड़े. केर्ली कहते हैं, "इस हालात की वजह से फिलहाल मार्केट में इन चीजों की कमी हो सकती क्योंकि इन चीजों का 30 से 50 फीसदी निर्यात शंघाई के बंदरगाह से होता है." कंपनी ने कहा, "6 अप्रैल में हमारे पिछले अपडेट के बाद हालात सुधरे नहीं हैं. सड़क यातायात सीमित हो गया है और टर्मिनल अभी भी भरे हुए हैं. यहां तक कि रेफ्रिजरेटेड जोन की कनेक्शन कैपिसिटी पर भी काफी दबाव पड़ रहा है."
इस हालात पर दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी मस्क ने इस सप्ताह पहले अपने बयान में कहा, "सामान ले जाने वाले कई जहाज अपने मार्ग में अब शंघाई को छोड़ कर दूसरे बंदरगाहों से गुजरेंगे. कंटेनर स्पेस की कमी होने की वजह से यह स्थिति आई है." लेकिन दुनिया पर इसका जो असर पड़ेगा, उसे रोकना मुश्किल है. इस हालात ने सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ जाएगा. आयात की रफ्तार धीमी हो जाएगी और महंगाई में इजाफा हो जाएगा.
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शंघाई पोर्ट के जाम का महंगाई का कनेक्शन
इनवेस्टमेंट बैंक नेटिक्सिस बैंक की एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिस्ट एलिसिया गार्सियो हेरेरो का कहना है कि शंघाई बंदरगाह की समस्याओं की वजह से निर्यात को लेकर बड़ी चिंता पैदा हो गई है. इसके साथ ही दुनिया में महंगाई बढ़ने का भी खतरा और बड़ा होता जा रहा है'' . न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, शंघाई (अमेरिकी यूनिवर्सिटी की कैंपस यूनिवर्सिटी) में इकोनॉमिक्स और फाइेंनस के प्रोफेसर रोड्रिगो जिदान ने बीबीसी मुंडो से कहा, "शंघाई बंदरगाह की क्षमता अब फरवरी और मार्च की तुलना में और कम हो गई है, इसलिए इस समस्या से निपटने में वक्त लगेगा. अगर शंघाई में कल को लॉकडाउन खत्म भी हो जाता है तो भी बंदरगाह में लगा बैकलॉग को खत्म होने में वक्त लगेगा." जिदान कहते हैं, "इन हालातों के देखते हुए अभी कुछ समय तक महंगाई बरकरार रहेगी. कई ऐसे सामान हैं, जिनकी कीमतें स्थिर होने में वक्त लग सकता है."
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बैंक ऑफ अमेरिका के विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे गहरा असर अप्रैल के महीने में देखने को मिल सकता. उनका कहना है, "शंघाई प्रशासन इस दिक्कत पर गौर कर रहा है और इसने हाल के दिनों में इसे सुलझाने के कदम उठाने शुरू किए हैं. लेकिन अगले तीन से छह सप्ताह में इन दिक्कतों का असर पूरी दुनिया में दिखने लगेगा. और यह दूसरी तिमाही के अंत तक बना रह सकता है." लातिन अमेरिकी देशों पर इसका काफी ज्यादा असर दिख सकता है.
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