बंगाल की राजनीतिक हिंसा पर मुंह पर ताला डालकर क्यों बैठ जाता है सिस्टम?
West Bengal post poll violence: पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनावों के बाद कूच बिहार में भाजपा की एक स्थानीय महिला पदाधिकारी रोशोनारा खातून को कथित तौर पर घर से खींचकर निर्वस्त्र करने की घटना के बाद पार्टी की एक और मुस्लिम महिला कार्यकर्ता ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर इसी तरह की घटना को अंजाम देने का आरोप लगाया है।
राज्य के नॉर्थ 24 परगना जिले के जगतदल में बीजेपी की एक महिला कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि टीएमसी के लोगों ने उसपर धारदार हथियार से हमला किया और कथित तौर पर उसके शरीर के कपड़े फाड़ डाले।

4 जून के नतीजों के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोप
सिर में गंभीर चोटों की वजह से अस्पताल में भर्ती पीड़िता का आरोप है कि जब वह पानी लेने गई थी तो टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने उसे निशाना बनाया। उसका आऱोप है कि 4 जून के नतीजों के बाद से सत्ताधारी दल के लोग भाजपा कार्यकर्ताओं का परेशान कर रहे हैं।
हालांकि, बैरकपुर के टीएमसी नेता सोमनाथ श्याम का दावा है कि 'कुछ मुस्लिम महिलाओं के बीच पानी को लेकर विवाद हो गया था। यह किसी राजनीतिक दल-तृणमूल, बीजेपी या सीपीएम से संबंधित मसला नहीं है।'
कूच बिहार में भाजपा की मुस्लिम महिला कार्यकर्ता को निर्वस्त्र करने का आरोप
इससे पहले कूच बिहार में एक मुस्लिम महिला को कथित तौर पर इसीलिए पीटा गया था और उसके कपड़े उतारकर पानी में फेंक दिए गए थे, क्योंकि वह बीजेपी से जुड़ी है। लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा की ओर से कम से कम ऐसे तीन आरोप अबतक सामने आ चुके हैं, जिसमें टीएमसी सवालों के घेरे में है। विधानसभा चुनावों के बाद भी वहां भारी हिंसा हो चुकी है।
मुस्लिम महिला की टीएमसी कार्यकर्ता की सरेआम पिटाई वाला वीडियो वायरल
यही नहीं, उत्तर दिनाजपुर जिले के एक कंगारू कोर्ट का वीडियो भी बहुत ही वायरल है। इसका जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा तक में कर चुके हैं। इसमें गिरफ्तार शख्स भी सत्ताधारी दल टीएमसी से ही जुड़ा है, जो जेसीबी के नाम से कुख्यात है और स्थानीय विधायक का खास बताया जाता है।
उसके थाने में जाने का वीडियो भी वायरल है, जिसमें उसके बॉडी लैंग्वेज से लग रहा है कि पुलिस उसकी मेजबानी करने ले जा रही हो। संदेशखाली की घटना के दौरान भी देश बंगाल से ऐसे दृश्य देख चुका है, जिसने राजनीति और अपराध की साठगांठ का नया इतिहास रचा है। संदेशखाली की घटना का भी प्रधानमंत्री ने संसद में जिक्र किया है।
सभी दल हो रहे हैं राजनीतिक हिंसा के शिकार
सवाल है कि बंगाल में चुनाव के बाद और चुनाव से पहले जिस तरह की सियासी हिंसा को अंजाम दिया जाता है, उसके बारे में सिस्टम को पता नहीं है? ऐसा नहीं है कि हिंसा का शिकार कोई एक ही दल हो रहा है। लेकिन, सत्ताधारी दल का रवैया और उसके कारनामे हमेशा संदेह के घेरे में रहे हैं।
भाजपा सांसद ने 200 कार्यकर्ताओं की हत्या का उठाया है मुद्दा
दो दिन पहले ही लोकसभा में बंगाल के विष्णुपुर से भाजपा के नव-निर्वाचित सांसद सौमित्र खान ने दावा किया है कि प्रदेश में उनकी पार्टी के 200 से ज्यादा कार्यकर्ताओं का मार दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने उत्तर दिनाजपुर के जिस चोपड़ा की रूह कंपा देने वाली घटना का संसद में जिक्र किया, वह सीधे-सीधे हमारे सिस्टम पर तमाचा है। क्योंकि, तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय विधायक हमीदुल रहमान का वह वीडियो भी वायरल है, जिसमें वह अपने इलाके को 'मुस्लिम राष्ट्र' बताने का दुस्साहस कर रहे हैं।
बंगाल में कानून का राज चलेगा या 'शरिया' का?
उनकी दलील है कि जिस महिला की बेरहमी से टीएमसी के गुंडे ने पीटी, वह मुसलमान थी। इसलिए उसने आरोपी का बचाव किया। उन्होंने पीड़िता के चरित्र का 'प्रमाण पत्र' देते हुए कहा कि वह समाज को खराब कर रही थी ,इसलिए 'शरिया' के नियमों के मुताबिक उसे सजा दी गई।
बंगाल में पूरा सिस्टम फेल हो चुका है?
ऐसे में क्यों न मान लिया जाए कि बंगाल में पूरा सिस्टम फेल हो चुका है? राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी महिला हैं और उनका विधायक देश के कानून की जगह 'शरिया' की बातें कर रहा है और फिर भी वह उसके खिलाफ कुछ क्यों नहीं कर पा रही हैं?
बंगाल के भयावह हालात देखकर भी पीएम क्यों मजबूर हैं?
देश के प्रधानमंत्री को भी बंगाल की भयावह तस्वीर को संसद में रखना पड़ रहा है। देश के संविधान ने उन्हें ऐसी स्थिति में दखल देने के लिए पर्याप्त शक्तियां दे रखी हैं। फिर बंगाल के हालात पर वे क्यों मजबूर बने बैठे हैं?
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बंगाल पर सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं ले सकता है स्वत: संज्ञान?
पिछले कुछ समय से हमारी न्यायपालिका ऐसे मामलों में बहुत ही प्रो-ऐक्टिव होकर काम कर रही है। इस वजह से कई बार आम जनता की अंतिम उम्मीद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पर ही टिक जाती है। लेकिन, सवाल उठता है कि जिस सुप्रीम कोर्ट की कलम मणिपुर की भयानक तस्वीरों को देखने के बाद चल सकती है, वही बंगाल में आकर क्यों रुक जाती है?












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