West Bengal SIR पर संग्राम जारी, सुवेंदु अधिकारी ने CEC को लिखे पत्र में ममता के आरोपों को बताया झूठ
West Bengal SIR: बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासी संग्राम मचा हुआ है। चुनाव आयोग ने पर्यवेक्षक की कार पर हुए हमले पर नाराजगी जताते हुए डीजीपी से रिपोर्ट मांगी है। दूसरी ओर प्रदेश की सीएम ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग करते हुए आयोग को पत्र लिखा है। अब सीएम की इस चिट्ठी के जवाब में विधानसभा में नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने आयोग को एक जवावी चिट्ठी भेजी है।
सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर अपना पत्र शेयर करते हुए दावा किया है कि इस बार बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार दोबारा नहीं बनेगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजे गए पत्र में अधिकारी ने ममता बनर्जी के एसआईआर पर किए दावों के बेबुनियाद बताया है।

West Bengal SIR: सुवेंदु अधिकारी ने पत्र में ममता बनर्जी पर साधा निशाना
बीजेपी नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में दावा किया है कि ममता बनर्जी SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रही हैं, लेकिन उनके तर्क तथ्यों पर नहीं बल्कि राजनीतिक डर पर आधारित हैं। इस पत्र में आगे उन्होंने लिखा कि SIR के जरिए बंगाल की मतदाता सूची में मौजूद फर्जी वोटरों, मृतकों के नाम और अवैध घुसपैठियों की पहचान हो रही है। लंबे समय से सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस इन अवैध प्रवासियों को संरक्षण देने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी इस प्रक्रिया के विरोध में हैं।।
Suvendu Adhikari ने गिनाए वोटर लिस्ट संशोधन के फायदे
- मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का मकसद मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाना है। निष्पक्ष चुनाव के लिए यह जरूरी है।
- सोशल मीडिया पर शेयर किए पोस्ट में उन्होंने यह भी लिखा कि ममता बनर्जी इस प्रक्रिया के बारे में झूठ बोल रही हैं। प्रदेश के मतदाताओं के बीच भ्रम फैलाने का काम किया जा रहा है।
- अपने पत्र में अधिकारी ने यह भी लिखा कि अब 2026 के विधानसभा चुनाव में जनता अपना मन बना चुकी है और ममता बनर्जी के झूठे दावों में नहीं फंसने वाली है।
चुनाव आयोग का कहना है कि यह एक नियमित संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसे किसी भी राजनीतिक दल के दबाव में रोका नहीं जा सकता। ममता बनर्जी का आरोप है कि इस अभ्यास के जरिए बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन होगा। उन्होंने 2026 विधानसभा चुनाव तक के लिए इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की थी। बंगाल के चुनाव में SIR अब केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि यह बंगाल की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।












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