West Bengal Election: नादिया में BJP एजेंट लहूलुहान, हावड़ा में CRPF से भिड़े लोग, आखिरी दौर में भारी तांडव!
West Bengal Election 2026 Phase 2: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान की शुरुआत शांत नहीं रही। बुधवार सुबह सात बजे जैसे ही 142 सीटों पर वोटिंग शुरू हुई, राज्य के कई हिस्सों से हिंसा, तोड़फोड़ और झड़प की खबरें आने लगीं। सुरक्षा के कड़े इंतजामों और केंद्रीय बलों की 2,321 कंपनियों की तैनाती के बावजूद बंगाल का चुनावी मिजाज एक बार फिर आक्रामक नजर आ रहा है।
कहीं पोलिंग एजेंट लहूलुहान हैं, तो कहीं EVM की खराबी ने मतदाताओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है। आखिर किन इलाकों में हुआ है सबसे ज्यादा बवाल और क्या सुरक्षा बल स्थिति को संभालने में कामयाब रहे? आइए जानते हैं मतदान के शुरुआती घंटों में क्या-कुछ हुआ...

नादिया में BJP एजेंट पर हमला
वोटिंग शुरू होते ही नादिया जिले के छपरा स्थित बूथ नंबर 53 से सनसनीखेज खबर सामने आई। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ टीएमसी से जुड़े 'उपद्रवियों' ने उनके एक पोलिंग एजेंट के साथ बेरहमी से मारपीट की। इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है और मतदान केंद्र के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना सुबह करीब 6 बजे हुई, ठीक उसी समय जब वोटिंग की तैयारियां चल रही थीं और पार्टी कार्यकर्ता अपने-अपने बूथों की ओर जा रहे थे। छपरा विधानसभा क्षेत्र से BJP उम्मीदवार, सैकत सरकार ने दावा किया कि उनकी पार्टी का एक बूथ एजेंट पोलिंग स्टेशन जाते समय हमले का शिकार हो गया।
रॉड और बंदूक के बट से अटैक करने का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी पार्टी से जुड़े कुछ लोगों ने उस कार्यकर्ता पर हमला किया। सरकार के अनुसार, हमलावरों ने हमले के दौरान लाठियों, रॉड और यहां तक कि बंदूक के बट का भी इस्तेमाल किया, जिससे एजेंट गंभीर रूप से घायल हो गया।
घायल पोलिंग एजेंट को तुरंत इलाज के लिए पास के एक अस्पताल ले जाया गया। BJP ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे अपने कार्यकर्ताओं को डराने और वोटिंग प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश बताया है।
ISF एजेंट को भी बनाया निशाना
उसी जिले से एक अलग घटनाक्रम में, इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) से जुड़े एक पोलिंग एजेंट पर भी हमले के आरोप लगे हैं। इससे पता चलता है कि वोटिंग के दौरान तनाव केवल दो पार्टियों तक ही सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसमें क्षेत्र के कई राजनीतिक दल शामिल हो सकते हैं।
इन रिपोर्टों ने चुनावों के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है, खासकर उन क्षेत्रों में जो कड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए जाने जाते हैं।
स्वतंत्र और निष्पक्ष वोटिंग को लेकर चिंताएं
इस तरह की घटनाएं शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। मतदाताओं और राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने अक्सर हिंसा को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोग बिना किसी डर के अपना वोट डाल सकें, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया है।
EVM की खराबी और सुरक्षा बलों से भिड़ंत
बाली (Bally) में स्थिति तब बिगड़ गई जब एक पोलिंग बूथ पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में खराबी आ गई। मशीन में आई तकनीकी गड़बड़ी ने मतदाताओं और सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों के बीच तीखी बहस को जन्म दिया, जिसने देखते ही देखते झड़प का रूप ले लिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सीआरपीएफ ने दो लोगों को हिरासत में लिया है।
हिंसा और तोड़फोड़ की चपेट में कई इलाके
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, मतदान के शुरुआती घंटों में न केवल नादिया और बाली, बल्कि शांतिपुर, निमतला और भांगर जैसे कई संवेदनशील इलाकों से हिंसा और तोड़फोड़ की खबरें मिली हैं। कई जगहों पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को मोर्चा संभालना पड़ा।
अंतिम चरण का पूरा गणित
पश्चिम बंगाल के इस अंतिम और निर्णायक रण में सात जिलों की 142 विधानसभा सीटों पर किस्मत का फैसला होना है।
- कुल मतदाता: 3,21,73,837
- मतदान केंद्र: 41,001 (सभी पर वेबकास्टिंग की सुविधा)
- सुरक्षा व्यवस्था: 2,321 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बलों की, जिसमें अकेले कोलकाता में 273 कंपनियां तैनात हैं।
दूसरे चरण में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी
पश्चिम बंगाल के चुनाव अपनी तीव्र राजनीतिक सरगर्मी के लिए जाने जाते हैं, और दूसरा चरण भी इसका कोई अपवाद नहीं लगता। वर्चस्व की लड़ाई में कई पार्टियों के आमने-सामने होने से, खासकर उन सीटों पर जहां मुकाबला कड़ा है, अक्सर झड़पें और आरोप-प्रत्यारोप सामने आते रहते हैं।
जैसे-जैसे वोटिंग जारी है, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि अधिकारी ऐसी घटनाओं से कैसे निपटते हैं और क्या वोटिंग प्रक्रिया बाकी बचे घंटों में भी शांतिपूर्ण बनी रहती है।















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