West Bengal Lok Sabha Chunav: बंगाल में ज्यादा मतदान किस तरह के परिणाम का रुझान है? 5 प्वाइंट में जानिए
West Bengal Lok Sabha Election: बंगाल में सोमवार यानी 20 मई को पांचवें चरण के चुनाव के साथ ही 25 सीटों पर मतदान संपन्न हो चुका है। राज्य में कुल 42 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें से बाकी 17 सीटों पर अगले दो चरणों- 25 मई और 1 जून को वोटिंग होनी है। अबतक के पांचों चरणों में देश के अन्य हिस्सों से अलग पश्चिम बंगाल में ज्यादा मतदान रिकॉर्ड किया गया है।
आमतौर पर माना यही जाता है कि ज्यादा मतदान सत्ता-विरोधी लहर का संकेत है। वैसे बंगाल में ज्यादा वोटिंग का ट्रेंड कोई नया नहीं है। लेकिन, इस बार जिस तरह से देश के अन्य राज्यों में कम वोटिंग अबतक एक चिंता की वजह रही है, बंगाल, असम, त्रिपुरा और आंध्र प्रदेश ने इस मामले में ज्यादा हौसला दिखाया है।

बंगाल में यूपी, महाराष्ट्र के बाद सबसे ज्यादा सीटें
इन राज्यों में बंगाल की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है, क्योंकि यूपी की 80 और महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों के बाद सबसे ज्यादा 42 लोकसभा सीटें यही हैं। 2019 में भाजपा ने अगर 303 सीटों के आंकड़े को छुआ था तो उसमें बंगाल में अप्रत्याशित रूप से उसे मिलीं 18 सीटें भी शामिल थीं।
बीजेपी को बंगाल में पहले की तरह शिकायतें करने की जरूरत नहीं पड़ रही
इस बार बंगाल में मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी महिलाओं पर अत्याचार, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और भ्रष्टाचार को सबसे बड़ा मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ रही है। हालांकि, बंगाल में इस बार भी अबतक का कोई चरण हिंसा के बगैर संपन्न नहीं हुआ है, लेकिन सबसे प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी, सत्ताधारी टीएमसी पर चुनावों से संबंधित उस तरह के आरोप नहीं लगा रही है, जिस तरह से पिछले चुनावों में देखा गया है।
भाजपा के तमाम दिग्गज नेता बंगाल में अबतक हुए मतदान से काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं। भाजपा के नेता ही नहीं, दिग्गज चुनावी रणनीतिकार भी इस बार बंगाल में बदलाव की बयार बहने का संकेत दे रहे हैं।
भाजपा कर रही है बंगाल में बड़ी जीत का कर रही है दावा
हाल ही में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में प्रदेश में बीजेपी के बहुत अच्छे प्रदर्शन की संभावना जताई है। उन्होंने कहा, 'बंगाल में हमें 24 से 30 सीटें मिलेंगी।' इससे पहले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा भी बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत का दावा कर चुके हैं।
उन्होंने कहा, 'मुझे पश्चिम बंगाल में पार्टी के लिए प्रचार करने का अवसर मिला, जिसमें हमने मतदाताओं में बीजेपी के प्रति गजब का उत्साह देखा। मुझे भरोसा है कि पार्टी 42 में से 32 लोकसभा सीटें जीतेगी।'
ममता बनर्जी वोटर टर्नआउट के आंकड़ों पर जता रही हैं चिंता
दूसरी तरफ इस बार चुनाव आयोग की ओर से बाद में मतदान के आंकड़े जारी करने को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाने वालों में टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हैं। इस बार 85 साल से अधिक के बुजुर्गों और दिव्यांगों को घर पर बैलेट के जरिए मतदान की सुविधा मिलने की वजह से भी मतदान के आंकड़े अपडेट होने में देरी हो रही है।
लेकिन, ममता पहले दो चरणों के बाद ही मतदान प्रतिशत अपडेट होने पर चिंता जता चुकी हैं। उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग ने पहले जो आंकड़े जारी किए थे, उसमें फाइनल टर्नआउट में करीब 5.75% की अचानक उछाल चिंताजनक है। कई ईवीएम लंबे समय से गायब होने के कारण भाजपा की ओर से नतीजों में हेरफेर करने की आशंका जताई जा रही है।'
यही नहीं ममता बनर्जी जिस तरह से सीएए से नागरिकता चले जाने जैसे दावे कर रही हैं, उससे भी लग रहा है कि उन्हें इस कानून के लागू होने से बहुत बड़ी आबादी के समर्थन में सेंध लगने की आशंका है।
चुनाव विश्लेषक प्रशांत किशोर भी भाजपा के पक्ष में लगा रहे हैं अनुमान
उधर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने आरटीवी को दिए एक हालिया इंटरव्यू में अपने उस दावे की फिर से पुष्टि की है कि इस बार के चुनाव में भाजपा को पश्चिम बंगाल के साथ ही ओडिशा, तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में पहले से ज्यादा सीटें मिलने की संभावना है।
उन्होंने चुनाव शुरू होने से पहले पीटीआई को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में पश्चिम बंगाल में भाजपा के इस बार सबसे बड़ी पार्टी बनने की भविष्यवाणी की थी।
प्रधानमंत्री ने इस बार पश्चिम बंगाल पर किया है सबसे ज्यादा फोकस
एक तथ्य यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल सबसे ज्यादा सभाएं पश्चिम बंगाल में ही की हैं। वे चुनाव तारीखों के औपचारिक ऐलान से पहले से ही प्रदेश में राजनीतिक सभाएं शुरू कर चुके थे।
संदेशखाली की घटनाओं पर उन्होंने तभी से टीएमसी सरकार को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। तारीखों के ऐलान से ठीक पहले सीएए को लागू करके भी बीजेपी ने अपना पांच साल से सुरक्षित रखा हुआ कार्ड भी चल दिया।
रविवार को मेदिनीपुर की रैली में पीएम मोदी के भाषणों को अगर संकेत समझें तो उसमें काफी कुछ इशारा मिल सकता है। उन्होंने कहा, 'बीजेपी की इस आंधी ने टीएमसी के आतंक के सभी किले ध्वस्त करने शुरू कर दिए हैं। यही कारण है कि बंगाल में टीएमसी वाले जरा ज्यादा ही बौखला गए हैं। अब 25 मई को बस एक और प्रहार की जरूरत है। बंगाल में फिर टीएमसी के आतंक, अत्याचार और भ्रष्टाचार के किले को गिरते देर नहीं लगेगी।'












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