पश्चिम बंगाल में पास हुआ एंटी रेप बिल 'अपराजिता', मृत्युदंड समेत जानें अन्य क्या है प्रावधान?
West Bengal Aparajita Woman and Child Bill: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने विपक्ष के पूर्ण समर्थन से बलात्कार विरोधी विधेयक 'अपराजिता' को सर्वसम्मति से मंगलवार को पास कर दियाह है। 7 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में ट्रेनी महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के बाद ममता बनर्जी ने ये पहल की है।
पश्चिम बंगाल के कानून मंत्री मलय घटक ने इस बिल को विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया। आइए पांच प्वाइंट्स में जानते हैं इस विधेयक में क्या खास है और बालात्कार जैसे जघन्य अपराध करने वाले के लिए क्या सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।

बलात्कारियों और हत्यारों के लिए मृत्युदंड
बंगाल के एंटी रेप विधेयक में बलात्कारियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। खासकर केस में महिला के साथ दरिंदगी के बाद अगर पीड़िता की मृत्यु हो जाती है या वह कोमा में चली जाती है तो बलात्कारियों और हत्यारों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है।
21 दिनों के अंदर जांच पूरी करनी होगी
बलात्कार और हत्या के ऐसे मामलों में पुलिस को 21 दिनों के अंदर जांच पूरी करनी होगी। विधेयक में यह अनिवार्य किया गया है कि अपराधी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने के 36 दिनों के भीतर मृत्युदंड दिया जाए। इसके अलावा, अपराधी की सहायता करने वाले किसी भी व्यक्ति को पांच साल की जेल होगी।
गैंगरेप के दोषी को अजीवन कारावास
एंटी रेप बिल में प्रावधान किया गया है कि बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के दोषी व्यक्तियों को आजीवन कारावास की सजा दी जाए, और उन्हें पेरोल की सुविधा न दी जाए।
अपराजिता टास्क फोर्स की स्थापना
बलात्कार, एसिड अटैक और छेड़छाड़ के मामलों को संभालने के लिए हर जिले में अपराजिता टास्क फोर्स की स्थापना जाएगी। ये टॉस्क फोर्स ये निर्धारित करेगी कि अपराधियों को जल्दी से जल्दी पकड़ा जाए और उनके खिलाफ जल्द केस दर्ज करवाया जाए।
एसिड अटैककर्स को उग्रकैद
पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने एसिड अटैक को बलात्कार के बराबर माना है। इस विधेयक में महिलाओं पर एसिड अटैक करने वालों के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान है। ताकि ऐसा अपराध करने की सोच से भी लोग डरे।
पहचान उजागर करने वालों के लिए सख्त सजा
एंटी रेप विधेयक के अनुसार बलात्कार पीड़ितों की पहचान उजागर करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है। इसमें पीड़ित की पहचान उजागर करने पर तीन से पांच साल की सजा का प्रावधान है, जिससे उनकी निजता और सम्मान की रक्षा होगी।












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