पश्चिम बंगाल चुनावः ममता-शुभेन्दु, तृणमूल-बीजेपी नहीं, नंदीग्राम को कुछ और चाहिएः ग्राउंड रिपोर्ट

नंदीग्राम लगातार सुर्खियों में है, 10 मार्च को नामांकन भरने गईं ममता बनर्जी पर कथित हमले की ख़बर ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है.अब आज ममता को 50 हज़ार मतों से हराने की चुनौती दे चुके उनके पुराने सहयोगी शुभेन्दु अधिकारी बीजेपी की ओर से अपना पर्चा दाख़िल करने जा रहे हैं. मगर इस सियासी संग्राम के बीच क्या है नंदीग्राम की ज़मीनी सच्चाई? नंदीग्राम से ग्राउंड रिपोर्ट.
नंदीग्राम - नाम में ग्राम लगा है मगर नंदीग्राम कोई एक ग्राम नहीं है.
जिस नंदीग्राम का नाम सुर्खियों में है वो एक विधानसभा सीट है जिसमें 138 गाँव आते हैं.
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में स्थित नंदीग्राम प्रदेश की राजधानी कोलकाता से 160 किलोमीटर दूर है.
वहाँ नंदीग्राम नाम का एक छोटा टाउन या क़स्बा भी है मगर वहाँ मुश्किल से 5-6 हज़ार लोग रहते हैं. जबकि पूरे नंदीग्राम विधानसभा की आबादी 2011 में ही सवा तीन लाख से ज़्यादा थी.
यानी नंदीग्राम गाँवों और किसानों का इलाक़ा है. 13 साल पहले किसानों ने यहाँ से अपनी ज़मीनों को बचाने के लिए जो प्रतिरोध किया उसे आंदोलन की शक्ल देकर ममता बनर्जी ने 2011 के चुनाव में वामपंथियों की 34 साल से जारी सत्ता का अंत कर दिया.
नंदीग्राम एक बार फिर से चर्चा में है, बल्कि सबसे ज़्यादा चर्चा में है. 2021 में छह राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में सबसे ज़्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की हो रही है और पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में भी सबसे ज़्यादा चर्चा जिस सीट की हो रही है वो है - नंदीग्राम.
ममता बनर्जी को नंदीग्राम के अपने सहयोगी और वहाँ के विधायक शुभेन्दु अधिकारी की बग़ावत ने ऐसा चोट पहुँचाया कि उन्होंने एलान कर दिया, वो उनके गढ़ से ही चुनाव लड़ेंगी.
शुभेन्दु ने भी जवाब दिया - अगर मुख्यमंत्री को 50 हज़ार वोटों से नहीं हराया, तो राजनीति छोड़ दूँगा.
अब 1 अप्रैल को नंदीग्राम के लोगों को तय करना है कि वो दीदी का साथ देंगे या दादा का.

नंदीग्राम में क्या हुआ था
नंदीग्राम में क्या हुआ था, यदि इसे संक्षेप में समझाना हो तो कहानी बस ये है कि राज्य सरकार ने एक निजी कंपनी की फ़ैक्टरी के लिए किसानों की ज़मीन लेनी चाही, किसानों ने विरोध किया, और फिर हिंसा हुई, और सरकार जाती रही.
2007 में जब नंदीग्राम में हिंसा हुई तब राज्य में वाम मोर्चे की सरकार थी और मुख्यमंत्री थे बुद्धदेव भट्टाचार्य. उन्होंने वर्ष 2000 में तब वाम मोर्चे की सत्ता की बागडोर संभाली जब 1977 से मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु ने 86 साल की उम्र में ज़िम्मेदारी से हटने का फ़ैसला किया.
बुद्धदेव भट्टाचार्य ने वामपंथियों के उद्योग विरोधी होने की छवि को बदलने की कोशिश की. इसी के तहत 2005 में जब भारत सरकार ने देश भर में केमिकल हब बनाने का विचार किया तो उसमें नंदीग्राम का भी नाम आया.
तय हुआ कि बंदरगाह वाले औद्योगिक शहर हल्दिया के पास स्थित नंदीग्राम को एक पेट्रोलियम, केमिकल और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र तथा एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) के रूप में विकसित किया जाएगा.
14,000 एकड़ इलाक़े में विकसित होनेवाले इस केमिकल हब के लिए बुद्धदेव सरकार ने इंडोनेशिया की दिग्गज औद्योगिक कंपनी सलीम ग्रुप से निवेश हासिल किया.
मगर इस प्रोजेक्ट को लेकर नंदीग्राम के किसानों के मन में संदेह पैदा हो गया कि सरकार पुलिस और अपने समर्थकों के ज़ोर पर जबरन उनकी ज़मीन ले लेगी.
तृणमूल कांग्रेस ने किसानों के विरोध को एक आंदोलन की शक्ल दी. नंदीग्राम में पार्टी के समर्थकों और नेताओं ने विरोधी किसानों का एक संगठन खड़ा कर दिया जिसका नाम रखा गया - भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति.

हिंसा और परिवर्तन
विरोध और तनाव बढ़ता गया जो कई महीनों तक बरक़रार रहा. गाँववालों ने सड़कों को कई जगहों पर काट दिया या उनके सामने रूकावट डाल दी जिससे पुलिस और प्रशासन के लिए वहाँ पहुँचना मुश्किल हो गया.
मगर जनवरी 2007 से बात बढ़ने लगी और जनवरी से मार्च के बीच कई बार पुलिस और सत्ताधारी दल के सदस्यों और ग्रामीणों के बीच संघर्ष हुआ.
14 मार्च 2007 को सबसे गंभीर हिंसा हुई जब 14 लोगों की मौत हो गई.
नंदीग्राम के गोकुलपुर गाँव की कंचन माल भी उस दिन प्रदर्शन में शामिल हुई थीं जब एक गोली उनके हाथ में भी आकर लगी.
60 वर्षीया कंचन माल बताती हैं,"मैं एक घायल लड़के को पानी पिला रही थी तभी मुझे भी गोली लग गई, मुझे पहले नंदीग्राम ले गए, फिर तामलुक के अस्पताल, तब वहाँ ममता दीदी आईं और मुझे देखने के बाद फौरन कोलकाता के पीजी अस्पताल ले जाने के लिए कहा."

इस घटना के बाद कोलकाता में हंगामा खड़ा हो गया, सरकारी बसें जला दी गईं, रेल पटरियों को बाधित कर दिया गया, उधर नंदीग्राम में हज़ारों लोग विरोध पर निकल पड़े, एक सरकारी दफ़्तर में आग लगाने की कोशिश हुई, पुलिस को आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा.
पश्चिम बंगाल के बाहर भी प्रदर्शन हुए, पाँच दिनों तक संसद में भी काम नहीं हो सका, विपक्षी दलों बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग कर दी.
कोलकाता हाईकोर्ट ने दो दिन बाद गोलीबारी को असंवैधानिक बताते हुए सीबीआई को जाँच करने के निर्देश जारी कर दिए.
बुद्धदेव भट्टाचार्य ने उसी महीने नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए परियोजना को रद्द करने की घोषणा की और कहा - "हम ख़ून-ख़राबा नहीं चाहते, भले ही मरनेवाले किसी भी पार्टी के हों."
सात साल बाद 2014 में सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बुद्धदेव सरकार को क्लीन चिट दे दी. लेकिन बुद्धदेव इससे तीन साल पहले ही सत्ता से हाथ धो चुके थे.

2007 में हिंसा के बाद 2008 में नंदीग्राम के पंचायत और ज़िला परिषद के चुनावों में उनकी हार और तृणमूल कांग्रेस की जीत का जो सिलसिला शुरू हुआ उसकी परिणति 2011 में हुई. वाम मोर्चा की 34 साल पुरानी सरकार को ममता बनर्जी ने बेदखल कर दिया.
नंदीग्राम से ममता बनर्जी ने जो लड़ाई छेड़ी और जिसका अंत कोलकाता पर फ़तह से हुआ उसमें उनके सबसे विश्वस्त सिपहसालार थे शुभेन्दु अधिकारी.
फ़ेक न्यूज़?
वाम नेता कहते हैं नंदीग्राम में जो हुआ उसे फ़र्ज़ी तरीक़े से पेश किया गया और हंगामा हो गया जबकि किसी भी किसान की ज़मीन नहीं ली गई.
तब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) के महासचिव प्रकाश कारत ने एक लेख में कहा था कि इस मामले में केवल इतना हुआ था कि हल्दिया डेवलपमेंट ऑथोरिटी की ओर से एक सार्वजनिक नोटिस जारी की गई थी जिसमें बताया गया था कि परियोजना कहाँ लग सकती है. और इसी नोटिस के कारण विरोध होने लगा.
पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम नंदीग्राम को फ़ेक न्यूज़ की शुरूआत बताते हुए इस बात से भी इनकार करते हैं कि जिन लोगों की मौत हुई वो सब किसान थे.
मोहम्मद सलीम कहते हैं,"जिन 14 लोगों की मृत्यु हुई, उनमें से 9 की पहचान हुई, 5 लोग माओवादी या बाहर से लाए गए लोग थे, उनकी आज तक शिनाख़्त नहीं हुई, और जो मरे उनमें पुलिस की गोली से कम और बम के छर्रों से ज़्यादा लोग मारे गए थे.
ये कहते हुए कि ममता बनर्जी ने सीबीआई की जो जाँच माँगी थी उसे फ़ौरन मान लिया गया. सलीम पूछते हैं कि 'आज ममता बनर्जी की सरकार दस साल से है, तो उन्होंने सीबीआई की रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की'.
हालाँकि नंदीग्राम में हुए विरोध की अगुआई करने वाले नेताओं में शामिल तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता शेख सूफ़ियाँ कहते हैं,"'वाम मोर्चा सरकार के दौरान पुलिस ने सारे मामलों को कमज़ोर कर दिया जिससे ना पुलिस को सज़ा मिल पाई ना नेताओं को."
नंदीग्राम - 14 साल बाद
नंदीग्राम हिंसा के 14 साल बाद इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं.
हालाँकि कई जानकार कहते हैं, ये लड़ाई दरअसल तृणमूल के ख़िलाफ़ तृणमूल की ही लड़ाई है, पार्टी भले अलग-अलग हो, लोग वही हैं जो पहले एक साथ थे.
इलाक़े में बीजेपी के एक स्थानीय नेता अभिजीत मैती कहते हैं, "पहले जो आंदोलन था वो तो लेफ़्ट फ़्रंट के ख़िलाफ़ था, तब जो भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमिटी बनी थी वो केवल तृणमूल का नहीं, हर नंदीग्राम वासी का आंदोलन था, ममता बनर्जी भी तब एनडीए के साथ थीं."
नंदीग्राम में तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं का कहना है 'ममता बनर्जी की जीत निश्चित'.
2021 के चुनाव में ममता बनर्जी के चुनाव एजेंट शेख सूफ़ियाँ कहते हैं," देखिए जैसे मैं एक नेता हूँ, शुभेन्दु भी एक नेता हैं, तो लीडर के आने या जाने से कोई असर नहीं पड़ता, जो आम लोग हैं उन्होंने फ़ैसला किया हुआ है कि यहाँ टीएमसी की ही ज़रूरत है."
वहीं सत्ता जाने के दस साल बाद वाम मोर्चा पिछले एक-दो सालों में नंदीग्राम में फिर से पाँव जमाने की कोशिश कर रहा है.
2019 में 12 साल बाद सीपीएम ने नंदीग्राम में अपना दफ़्तर फिर से खोला.
पिछले वर्ष लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद भी वामपंथी दल नंदीग्राम में सभाएँ और जुलूस कर रहे हैं.
नंदीग्राम में सीपीएम के नेता परितोष पटनायक कहते हैं," जिस शुभेन्दु अधिकारी ने कहा था, लाल झंडा पकड़ने वाला कोई आदमी नहीं मिलेगा, आज समय का परिहास देखिए, वो खुद अपनी पार्टी का झंडा छोड़ चुके हैं, आज भगवा झंडा पकड़ चुके हैं, यही होता है इतिहास."
मलाल
नंदीग्राम में राजनीतिक लड़ाई अपनी जगह है, मगर ऐसे लोग बड़ी संख्या में मिलते हैं जिन्हें फ़ैक्ट्री ना लग पाने का मलाल है, और उन्हें लगता है कि वाममोर्चा सरकार का इरादा ग़लत नहीं था.
स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत मैती कहते हैं,"फ़ैक्टरी बनने से तो अच्छा ही रहता, हम चाहते थे कि फ़ैक्टरी हो यहाँ, मगर लेफ़्ट फ़्रंट का सिस्टम सही नहीं था, अगर वो एक-एक कर यहाँ कंपनियाँ लाते तो सही रहता, लेकिन वो तो हज़ारों एकड़ ज़मीन लेने लगे, वो सही नहीं था."
शुभेन्दु अधिकारी के लिए वोट माँगनेवाले अभिजीत कहते हैं 'अगर ये सिस्टम सही रहता तो नंदीग्राम और पश्चिम बंगाल में जो बेरोज़गारी है, वो नहीं रहती'.
नंदीग्राम में तब लेफ़्ट फ़्रंट का विरोध करने वाले ऐसे भी लोग मिलते हैं जो कहते हैं कि बुद्धदेव भट्टाचार्य की सरकार सावधानी से क़ाम लेती तो ये नौबत ना आती.
नंदीग्राम के एक स्थानीय निवासी जयदेव दास कहते हैं," फ़ैक्टरी का ज़रूरत है यहाँ, उनलोगों की ग़लती यही थी कि लोगों को समझाना चाहिए था कि क्या होने जा रहा है और कहाँ से कहाँ तक फ़ैक्टरी होगी."
बहरहाल, 2011 के चुनाव में परिवर्तन का प्रतीक बना नंदीग्राम एक बार फिर परिवर्तन का पैमाना बन चुका है.
बंगाल एक बार फिर बदलेगा या नहीं, जीत ममता दीदी की होगी या शुभेन्दु दादा की, इस सवाल का जवाब तो दो मई 2021 को मिल जाएगा, मगर 14 मार्च 2007 को घायल हुईं कंचन माल को पता है कि उनके सवाल का जवाब ना दीदी के पास है, ना दादा के पास.
टूटे-फूटे घर में, जहाँ-तहाँ पैबंद लगे कपड़ों में लिपटी,अपनी हाल ही में विधवा हुई बहू और उनके दो बच्चों के लिए हर रोज़ ज़िंदा रहने की लड़ाई लड़तीं विधवा कंचन माल कहती हैं, "वो लोग तो मंत्री-नेता हैं, मेरे कुछ कहने से कोई करेगा क्या, हम साधारण लोग हैं, एक वोट के अलावा तो हमारे पास कुछ है नहीं.
डबडबाती आँखों से वो कहती हैं,"बचाने वाला बचाएगा, मारनेवाला मारेगा, हमारे लिए तो इसके साथ भी हार है, उसके साथ भी हार है."
परिवर्तन का प्रतीक बना नंदीग्राम भारत की राजनीति का वो आईना है जिसमें आख़िरी क़तार पर बैठे आम लोग नज़र ही नहीं आते.
-
Uttar Pradesh Silver Rate Today: ईद पर चांदी बुरी तरह UP में लुढकी? Lucknow समेत 8 शहरों का ताजा भाव क्या? -
US-Iran War: ‘पिछले हालात नहीं दोहराएंगे’, ईरान के विदेश मंत्री ने Ceasefire पर बढ़ाई Trump की टेंशन? -
iran Vs Israel War: ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला, अमेरिका-इजराइल की भीषण बमबारी से दहला नतांज -
Hyderabad Bengaluru Bullet Train: 626 किमी के प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, DPR पर बड़ा अपडेट आया -
Mathura News: 'फरसा वाले बाबा' की हत्या से ब्रज में उबाल! दिल्ली-आगरा हाईवे जाम, CM योगी ने लिया एक्शन -
Silver Rate Today: चांदी के दाम में भारी गिरावट, ₹5000 तक सस्ती,आपके शहर में क्या 100g और 1kg का ताजा भाव -
Himanta Biswa Sarma Net Worth: ₹64 लाख बढ़ी CM की संपत्ति, कौन हैं पत्नी रिनिकी, दोनों में कौन ज्यादा अमीर? -
LPG Crisis: 5 साल तक गैस और तेल की रहेगी किल्लत! दुनिया की सबसे बड़ी एनर्जी कंपनी के CEO के दावे से हड़कंप -
Dhurandhar-2 में 'अतीक अहमद' बनने वाले Salim Siddiqui कौन? कितनी ली फीस? UP माफिया का खुला PAK काला चिट्ठा! -
दुष्कर्म के आरोपी बाबा के चरण धोती दिखीं महिला आयोग अध्यक्ष, CM फडणवीस ने तुरंत मांगा इस्तीफा, छिनी कुर्सी -
Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh: दिल्ली में आज क्या खुला, क्या बंद? ईद पर बैंक, स्कूल-बाजारों की लेटेस्ट अपडेट -
Iran War Updates: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के लिए गुड न्यूज, एक साथ कितने टैंकर होंगे रवाना? आ गया अपडेट












Click it and Unblock the Notifications