Bengal Chunav: सुबह-सुबह सड़कों पर क्यों दिखीं ममता बनर्जी! भवानीपुर में सुवेंदु से महामुकाबला, EC पर फोड़ा बम
West Bengal Election 2026 (Mamata Banerjee): पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और फाइनल फेज की वोटिंग के बीच 29 अप्रैल की सुबह एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) मतदान वाले दिन सुबह से ही सड़कों पर नजर आईं। यह तस्वीर इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के दौरान उनका ऐसा सक्रिय सार्वजनिक मूवमेंट नहीं दिखा था।
इस बार उन्होंने सुबह से ही अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर (Bhabanipur) की गलियों, मतदान केंद्रों और आसपास के इलाकों का दौरा शुरू कर दिया। कोलकाता से वनइंडिया बांग्ला के अनुभवी पत्रकार रितेश घोष, जो पिछले एक दशक से बंगाल की राजनीति को करीब से देख रहे हैं, बताते हैं कि ममता का यह तेवर काफी कुछ बयां कर रहा है।

कोलकाता से ग्राउंड इनपुट देते हुए रितेश घोष ने कहा कि ममता बनर्जी का यह चुनावी दिन का मूवमेंट सामान्य राजनीतिक गतिविधि से अलग है। वह लगातार इलाके में घूमती रहीं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करती नजर आईं। राजनीतिक एक्सपर्ट इसे केवल चुनावी उपस्थिति नहीं, बल्कि एक संदेश के तौर पर देख रहे हैं।
▶️पिछला रिकॉर्ड टूटा: आखिर क्यों सड़कों पर उतरीं ममता बनर्जी?
पिछले कुछ चुनावों पर नजर डालें, चाहे वह 2021 का विधानसभा चुनाव हो या पिछला लोकसभा चुनाव, ममता बनर्जी मतदान के दिन आमतौर पर अपने घर पर ही रहती थीं। वह फोन और वॉर रूम के जरिए अपनी पार्टी की गतिविधियों पर नजर रखती थीं। लेकिन 29 अप्रैल की सुबह कुछ अलग थी। जैसे ही भवानीपुर में वोटिंग शुरू हुई, तृणमूल सुप्रीमो खुद सड़कों पर निकल पड़ीं। वह अपनी गाड़ी में बैठकर भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के कोने-कोने का दौरा कर रही हैं।
जानकारों का मानना है कि अपनी ही सीट पर सुवेंदु अधिकारी के साथ 'नंदीग्राम पार्ट-2' जैसा मुकाबला होने के कारण ममता कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं। वह खुद बूथों पर जाकर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा रही हैं और जमीनी स्थिति का जायजा ले रही हैं।
▶️चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों पर बरसीं दीदी
सड़कों पर उतरने के साथ ही ममता बनर्जी का गुस्सा सातवें आसमान पर दिखा। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ममता ने आरोप लगाया कि बंगाल में बाहर से ऑब्जर्वर्स को बुलाया गया है, जो स्थानीय स्थिति को समझने के बजाय सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारों पर काम कर रहे हैं।
ममता का सीधा आरोप है कि "ये ऑब्जर्वर्स और सुरक्षा बल वही कर रहे हैं जो उन्हें बीजेपी हेडक्वार्टर से करने को कहा जा रहा है।" उन्होंने शिकायत की कि उनकी पार्टी के पोस्टर हटाए जा रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल दिया जा रहा है। ममता ने मीडिया से बात करते हुए पूछा कि "क्या चुनाव इसी तरह होते हैं? यह लोकतंत्र का त्योहार है या आतंक का?"
▶️कार्यकर्ताओं पर हमला और 'आतंक' का आरोप
भवानीपुर में माहौल तब और गरमा गया जब मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके कार्यकर्ताओं को रात के अंधेरे में पीटा गया है। ममता ने कहा, "हमारे कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किया जा रहा है। यह सरासर गुंडागर्दी है। बीजेपी चाहती है कि डर का माहौल बनाकर चुनाव में धांधली की जाए।" उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि उनके कार्यकर्ता और बंगाल की जनता जान दे देगी लेकिन पीछे नहीं हटेगी।
ममता बनर्जी ने साफ तौर पर कहा कि वोट जनता को डालना चाहिए, न कि पुलिस या सुरक्षा बलों के दबाव में पड़कर। उन्होंने केंद्रीय बलों की नई तैनाती को 'आतंक' फैलाने वाला कदम बताया।
▶️दक्षिण बंगाल का चक्रव्यूह: 142 सीटों का गणित
आज की वोटिंग बंगाल की सत्ता की चाबी तय करने वाली है। 142 सीटों पर हो रहा यह मतदान कोलकाता, हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली और पूर्व बर्धमान जैसे जिलों में फैला हुआ है। यह इलाका तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत किला माना जाता है।
- 2021 का प्रदर्शन: पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने इन 142 में से 123 सीटों पर एकतरफा जीत हासिल की थी।
- वोटिंग का उत्साह: सुबह 9 बजे तक ही 18.39% मतदान हो चुका है। लोग सुबह 5:30 बजे से ही कतारों में खड़े हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा दिख रही है।
- पिछले फेज का असर: पहले चरण की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को 93% की रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी, जिसके बाद दूसरे फेज में भी भारी मतदान की उम्मीद है।
▶️कैसे तय होते हैं बंगाल में जीत-हार के समीकरण? (How Election Dynamics Work in West Bengal)
पश्चिम बंगाल में चुनाव महज एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक अस्मिता का मुद्दा बन चुका है। यहां वोटिंग के दौरान दो बड़े फैक्टर काम करते हैं:
- जमीनी संगठन: जिस पार्टी का कार्यकर्ता बूथ पर टिका रहता है, जीत उसी की होती है। ममता का आज सड़क पर उतरना इसी संगठन को मजबूती देना है।
- केंद्रीय बल बनाम लोकल पुलिस: ममता बनर्जी हमेशा से 'बाहरी' सुरक्षा बलों और 'बाहरी' नेताओं का मुद्दा उठाकर स्थानीय लोगों की भावनाएं जीतती रही हैं। आज भी उन्होंने इसी दांव को चला है।
- महिला मतदाता: बंगाल में महिलाएं गेमचेंजर मानी जाती हैं। दीदी की योजनाओं और उनके जुझारू व्यक्तित्व का महिलाओं पर गहरा असर रहता है, जो लंबी कतारों में साफ नजर आ रहा है।
▶️4 मई को आएगा फैसला: क्या भवानीपुर में होगा उलटफेर?
भवानीपुर इस चुनाव का केंद्र बिंदु है। शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी का मुकाबला सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि साख की जंग है। शुभेंदु जहां बीजेपी के आक्रामक प्रचार के दम पर सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं, वहीं ममता बनर्जी ने खुद मोर्चा संभालकर यह संदेश दिया है कि वह अपनी जमीन किसी भी कीमत पर छोड़ने वाली नहीं हैं।
दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग शाम 6 बजे तक चलेगी। इसके बाद सभी की निगाहें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी होंगी। क्या ममता बनर्जी का यह 'स्ट्रीट फाइटर' अवतार उन्हें एक बार फिर सत्ता के शिखर पर पहुंचाएगा या बीजेपी का 'ऑपरेशन बंगाल' सफल होगा? इसका जवाब ईवीएम में कैद हो रहा है।














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