कौन हैं BJP सांसद अनंत महाराज और क्यों इनके करीब आ रही है TMC? ममता का मास्टरस्ट्रोक या सियासी मजबूरी?

West Bengal Election 2026 Ananta Maharaj: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, लेकिन उत्तर बंगाल की राजनीति में अचानक आई एक तस्वीर ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। BJP के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने राज्य सरकार के प्रतिष्ठित 'बंगा विभूषण' सम्मान से नवाजा और खुद उनके साथ मंच साझा किया। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर TMC और अनंत महाराज के बीच नजदीकियां क्यों बढ़ रही हैं।

कौन हैं अनंत महाराज और क्यों हैं अहम (Who is Ananta Maharaj

अनंत महाराज का असली नाम नगेंद्र राय है। वह लंबे समय से ग्रेटर कूचबिहार को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग उठाते रहे हैं। इस मुद्दे पर उनका रुख कई बार BJP की केंद्रीय लाइन से अलग नजर आया है। यही वजह है कि उनकी पहचान एक स्वतंत्र रुख वाले राजबंशी नेता की रही है।

West Bengal Election 2026 Ananta Maharaj

2023 में BJP ने उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा भेजा, क्योंकि उत्तर बंगाल खासकर कूचबिहार और आसपास के जिलों में राजबंशी समुदाय पर उनका खास प्रभाव माना जाता है।

अनंत महाराज का सम्मान समारोह और बदले हुए सुर

कोलकाता में हुए सम्मान समारोह में ममता बनर्जी ने अनंत महाराज को उत्तरीय और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। मंच पर TMC के वरिष्ठ नेता अरूप विश्वास और इंद्रनील सेन भी मौजूद थे।

ममता ने मंच से कहा कि वह अनंत महाराज और उनके समुदाय का सम्मान करती हैं और चाहती हैं कि वह समाज के लिए काम करते रहें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज राजबंशी समुदाय के साथ-साथ बाउरी, बागदी, मतुआ और बाउल समाज के प्रतिनिधि भी मौजूद हैं।

लेकिन असली चर्चा अनंत महाराज के बयान पर हुई। उन्होंने केंद्र सरकार पर अपने क्षेत्र और समुदाय की उपेक्षा का आरोप लगाया। जब उनसे पूछा गया कि वह तो केंद्र की सत्ताधारी पार्टी से हैं, तो उन्होंने पलटकर कहा कि क्या वह देश के विकास की बात भी नहीं कर सकते।

राजबंशी फैक्टर कितना बड़ा

2011 की जनगणना के मुताबिक पश्चिम बंगाल की अनुसूचित जाति आबादी में राजबंशी समुदाय की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत से ज्यादा है। यह समुदाय कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और उत्तर दिनाजपुर के कुछ हिस्सों में निर्णायक भूमिका निभाता है। यही वजह है कि उत्तर बंगाल की कई विधानसभा सीटों पर राजबंशी वोट चुनाव का रुख तय कर सकते हैं।

TMC की पुरानी रणनीति

TMC पहले से इस समुदाय को साधने की कोशिश करती रही है। 2017 में राजबंशी डेवलपमेंट बोर्ड बनाया गया और बंशीबदन बर्मन को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

राजबंशी भाषा अकादमी की स्थापना भी की गई। 2020 में पंचानन बर्मा की जयंती पर राज्य अवकाश घोषित किया गया और 2021 में पांच जिलों के प्राथमिक स्कूलों में राजबंशी भाषा में पढ़ाई शुरू करने की घोषणा हुई।इन कदमों को BJP के बढ़ते प्रभाव को रोकने की रणनीति के तौर पर देखा गया।

लोकसभा और विधानसभा के नतीजे क्या कहते हैं?

2019 के लोकसभा चुनाव में BJP ने उत्तर बंगाल की सभी सात सीटें जीत ली थीं। लेकिन 2024 में तस्वीर बदली और TMC ने कूचबिहार सीट जीत ली। यहां से जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने BJP के पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रामाणिक (Nishith Pramanik) को हराया।

2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने उत्तर बंगाल की 54 में से 23 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी बिमल गुरुंग (Bimal Gurung) के नेतृत्व वाले गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (Gorkhaland Janmukti Morcha) को एक सीट मिली। BJP को 30 सीटों पर जीत मिली थी।

क्या पाला बदलेंगे अनंत महाराज?

लोकसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी ने सिलिगुड़ी से लौटते वक्त अचानक चकचका में अनंत महाराज के घर जाकर उनसे मुलाकात की थी। उस 35 मिनट की बैठक ने अटकलों को हवा दी थी कि वह TMC में शामिल हो सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

TMC के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि अनंत महाराज के बयान BJP के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं। वहीं BJP के नेता मानते हैं कि ऐसे कदम नुकसान पहुंचा सकते हैं और इस पर केंद्रीय नेतृत्व को ध्यान देना होगा।

फिलहाल साफ है कि उत्तर बंगाल में चुनावी जंग सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों की है। अनंत महाराज की मौजूदगी और उनके बयान आने वाले चुनाव में किसका खेल बिगाड़ेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

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