GST क्षतिपूर्ति को लेकर ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को लिखा खत, कहा- राज्यों पर वित्तीय बोझ डालना उचित है?

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) क्षतिपूर्ति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा है। उन्होंने कहा है कि जीएसटी क्षतिपूर्ति नहीं मिलने पर उनका केंद्र सरकार से विश्वास उठ रहा है। साथ ही उन्होंने इसे संघवाद के आधार का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि राज्यों को आश्वासन देने के बजाय दो एकतरफा विकल्प दिए गए हैं, जिनमें उनसे लाखों और करोड़ों रुपये का उधार लेने की बात कही गई है। वो भी ऐसे वक्त में जब अधिकतर राज्य अपने कर्मचारियों का वेतन नहीं दे पा रहे हैं।

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ममता बनर्जी ने लिखा कि राज्यों की मदद करने के बजाय क्या केंद्र सरकार का सहायता रोकना और अधिक वित्तीय बोझ डालना उचित है? यह मौलिक आधार का हनन है। ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ये याद दिलाने की कोशिश भी की कि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने विभिन्न आधारों पर जीएसटी का विरोध किया था। खत में उन्होंने लिखा, 'स्वर्गीय श्री अरुण जेटली ने भी दिसंबर 2013 में स्पष्ट रूप से और सार्वजनिक तौर पर कहा था कि बीजेपी जीएसटी का विरोध इसलिए कर रही थी क्योंकि बीजेपी को जीएसटी क्षतिपूर्ति को लेकर उस समय की भारत सरकार पर भरोसा नहीं था, इसमें राज्यों का नुकसान है!'

उन्होंने सुझाव दिया कि अगर भारत सरकार राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति की कमी की भरपाई के लिए पैसे उधार लेती है तो वो बेहतर होगा। बता दें गैर बीजेपी राज्य सरकारों ने केंद्र के जीएसटी को लेकर दिए गए विकल्पों को मानने से इनकार कर दिया है। दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, केरल के बाद पश्चिम बंगाल ने भी इसपर विरोध जताया है। दरअसल कोरोना वायरस महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। अनलॉक की प्रक्रिया बेशक जारी है, लेकिन फिर भी अर्थव्यवस्था को पटरी पर आने में वक्त लगेगा। इस बीच अप्रैल से राज्यों का जीएसटी भुगतान भी केंद्र सरकार की ओर से नहीं किया गया है। जिस पर शनिवार को केंद्र सरकार ने कहा कि वो जल्द ही सभी राज्यों का बकाया भुगतान कर देंगे। साथ ही इसके लिए दो विकल्प भी सुझाए गए हैं।

कौन से हैं दो विकल्प-

राज्यों को जो दो विकल्प दिए गए हैं, उनमें पहला विकल्प ये है कि राज्यों को रिजर्व बैंक से 97,000 करोड़ का विशेष कर्ज मिलेगा। जिसपर ब्याज काफी कम लगेगा। दूसरा विकल्प ये है कि राज्‍य इस साल के 2,35,000 करोड़ रुपये के जीएसटी क्षतिपूर्ति गैप को आरबीआई के साथ ​सलाह मशवरा कर भरें।

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