बीरभूम हिंसा: दमकल कर्मियों को शव निकालने में लगे 10 घंटे, प्रत्यक्षदर्शी का दावा
नई दिल्ली, 26 मार्च। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में बीरभूम हिंसा (Birbhum case) को लेकर ममता सरकार (TMC) पर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना की जांच करने रामपुरहाट गांव (Rampurhat) में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम पहुंच चुकी है। सीबीआई की इस टीम का नेतृत्व डीआईजी अखिलेश सिंह कर रहे हैं। उनके साथ केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की भी टीम मौके पर गई है। वहीं मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा है कि घटना के बाद शव के पास जाने का कोई साहस तक नहीं जुटा पा रहा था। दमकल कर्मियों को शव को निकालने में 10 घंटे लग गए।

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट के बोगतई गांव में सोमवार रात(21 मार्च) हुई हिंसा(West Bengal Political Violence) को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। 3 महिलाओं और 2 बच्चों सहित 8 लोगों को नरसंहार से पहले बुरी तरह मारा-पीटा गया। यह खुलासा फोरेंसिक और पोस्टमार्टम (post-mortem or forensic examination)रिपोर्ट से हुआ है।
मामले में अब एक प्रत्यक्षदर्शी ने पश्चिम बंगाल के बोगतुई गांव ( Bogtui village) में हुई घटना को लेकर एक अहम खुलासा किया है। प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि दमकल कर्मियों ने बीरभूम में जले हुए घरों में भीषण गर्मी के कारण जले हुए शवों को निकालने के लिए 10 घंटे तक इंतजार किया। भीषण आग के बीच जले हुए घरों में जाना संभव नहीं था। लेकिन घायलों और प्रभावितों की तलाशी अभियान अगली सुबह सात बजे तक जारी रहा।
कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई बीरभूम हिंसा (Birbhum case) मामले को लेकर सक्रिय हो गई है। बीरभूम जिले में आठ लोगों को जिंदा जलाकर हत्या के मामले में 21 लोगों को आरोपी बनाया है. इन सभी आरोपियों पर गंभीर धाराओं में तहत मामला दर्ज किया गया है। घटना के बाद से लगातार विपक्षी दलों की ओर से ममता सरकार (Mamta Government) पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। बंगाल में कहीं अनुच्छेद 365 तो कहीं राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग भी की गई।
घटना यानी 21 मार्च की है। जब राज्य के बीरभूम जिले के शाम बोगतई गांव में एक टीमएसी (TMC) नेता व उप प्रधान भादू शेख की बम हमले में मौत हो गई थी। घटना के बाद लोग हिंसक हो गए थे। उन्होंने 5 घरों के दरवाजे को बंद कर आग लगा दी थी। संजू शेख के एक घर से सात जले हुए शव बरामद किए गए और एक व्यक्ति की अस्पताल में मौत हो गई। इस घटना के बाद एक बार फिर से पश्चिम बंगाल में हिंसा की व्यापकता और खराब कानून व्यवस्था की स्थिति सामने आ गई।












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