Bengal Election 2026: बंगाल में आखिरी चरण की वोटिंग,कब आएंगे एग्जिट पोल? क्या दीदी की कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा
Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 बुधवार, 29 अप्रैल को अपने अंतिम और सबसे निर्णायक दौर में पहुंच गया है। राज्य की 142 सीटों पर दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग जारी है। इस चरण में सिर्फ उम्मीदवारों की किस्मत ही नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक दिशा भी तय होनी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट समेत कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

कोलकाता और कलकत्ता प्रेसिडेंसी के शहरी इलाकों को बंगाल की राजनीति का 'नर्व सेंटर' माना जाता है। यही वजह है कि इस चरण को पूरे चुनाव का सबसे अहम मुकाबला बताया जा रहा है।
West Bengal Exit Poll 2026 Date Time: कब आएंगे एग्जिट पोल के नतीजे?
मतदान के साथ ही लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एग्जिट पोल कब सामने आएंगे। निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक, जब तक मतदान की पूरी प्रक्रिया खत्म नहीं हो जाती, तब तक एग्जिट पोल के नतीजे सार्वजनिक नहीं किए जा सकते।
पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को शाम तक पूरी हो जाएगी। इसके बाद शाम 6 बजे के बाद टीवी चैनलों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज पोर्टलों पर एग्जिट पोल के नतीजे और राजनीतिक विश्लेषण दिखाए जाने शुरू हो जाएंगे। इस बार बंगाल चुनाव को लेकर देशभर में उत्सुकता काफी ज्यादा है, क्योंकि पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान ने चुनावी समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है।
Bengal Election 2026 में रिकॉर्ड वोटिंग के क्या हैं मायने?
पहले चरण में पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड 90 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी भारी वोटिंग कई संकेत देती है। एक वर्ग इसे बदलाव की चाहत और एंटी-इंकंबेंसी का संकेत मान रहा है, जबकि दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस इसे लोकतंत्र में जनता की बढ़ती भागीदारी और ममता बनर्जी के प्रति समर्थन बता रही है।
बंगाल में पिछले कुछ साल के दौरान भ्रष्टाचार, शिक्षक भर्ती घोटाला, सीमा सुरक्षा, घुसपैठ, हिंसा और बेरोजगारी जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। विपक्ष इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरता रहा है। वहीं टीएमसी ने महिला योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा और बंगाली अस्मिता को अपने चुनावी अभियान का केंद्र बनाया।
'दीदी' के किले भवानीपुर पर टिकी देशभर की नजर, क्या ममता बनर्जी की कुर्सी खतरे में?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार एंटी-इंकंबेंसी की लहर ममता बनर्जी की सत्ता को चुनौती दे पाएगी? रानीतिक जानकारों के मुताबिक, शहरी सीटों पर मुकाबला पहले के मुकाबले ज्यादा कड़ा दिखाई दे रहा है। बीजेपी जहां हिंदुत्व, भ्रष्टाचार विरोध और केंद्रीय योजनाओं के दम पर चुनाव लड़ रही है, वहीं ममता बनर्जी ने बंगाली पहचान और कल्याणकारी योजनाओं को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट इस चरण का सबसे चर्चित मुकाबला बनी हुई है। यहां टीएमसी की प्रतिष्ठा दांव पर है। बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने भवानीपुर को सत्ता के खिलाफ जनमत संग्रह की तरह पेश करने की कोशिश की है। इसके अलावा कोलकाता की कई शहरी सीटों पर भी मुकाबला बेहद कांटे का माना जा रहा है, जहां मध्यम वर्ग, युवा वोटर और अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अलावा इस चुनाव में नई पार्टियों और क्षेत्रीय चेहरों की मौजूदगी ने भी मुकाबले को त्रिकोणीय और कई जगहों पर चतुष्कोणीय बना दिया है। युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं का रुझान भी इस बार परिणामों में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
4 मई को आएंगे चुनावी नतीजे
हालांकि एग्जिट पोल आज शाम तस्वीर साफ करने की कोशिश करेंगे, लेकिन असली फैसला 4 मई को मतगणना के बाद ही सामने आएगा। तब यह तय होगा कि क्या ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी करेंगी या बंगाल में राजनीतिक बदलाव की पटकथा लिखी जाएगी। फिलहाल बंगाल की जनता का फैसला ईवीएम में कैद हो रहा है और पूरे देश की नजर अब एग्जिट पोल और अंतिम परिणामों पर टिकी हुई है।












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