Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

क्या अंग्रेजों के समय भारत के सारे राजा अय्याश और ख़राब शासक थे?

भारत में आज़ादी से पहले जो राजा-महाराजा थे उनकी छवि ऐसी है जिसमें हाथी-घोड़े, नर्तकियाँ, राजमहल की कल्पना तैरने लगती है. मगर क्या वो बस ऐसे ही थे? इतिहासकार मनु पिल्लई ने भारत के महाराजाओं के दौर का फिर से अवलोकन किया है.

Were all the kings during British rules in india idle and bad?

यदि आप गहनों से लदी उनकी तस्वीरों, महलों और भव्य दरबारों के परे देखेंगे, तो भारत के इन महाराजाओं के बारे में कुछ और भी बातें पता चल पाएंगी. आप ये पाएंगे कि उनका बहुत तिरस्कार किया गया, मज़ाक बनाया गया, और मज़ा लेने के इरादे से उनकी ज़िंदगी को देखा जाता रहा.

अंग्रेजों ने अपने जमाने में "देशी" राजकुमारों को घोर पतनशील इंसानों के रूप में पेश किया, जिनका मन राज-काज से ज़्यादा सेक्स और फ़ैशन जैसी चीज़ों में रमता था.

उदाहरण के लिए, एक गोरे अधिकारी ने महाराजाओं को "दैत्य जैसे, मोटे, दिखने में घिनौने" और किसी नाचने वाली की तरह "हार-कुंडल पहने" इंसानों के रूप में बताया. उसने कहा कि ये महाराजा गोरों जैसे नहीं बल्कि स्त्रियों की तरह दिखने वाले "बेवकूफ़" हैं.

राजाओं को बदनाम करने का सुनियोजित प्रयास

राजाओं की ये बनी बनाई पहचान दशकों तक ऐसे ही बनी रही. 1947 में, लाइफ़ मैगज़ीन तो आंकड़ों के साथ इस होड़ में शामिल हो गई. उसने बताया कि एक साधारण महाराजा के पास ''11 उपाधियाँ, 3 यूनिफॉर्म, 5.8 पत्नियाँ, 12.6 बच्चे, 5 महल, 9.2 हाथी और 3.4 रोल्स रॉयस कारें" हैं.

ये सब मज़ेदार था, मगर ये संख्याएँ भरमाने वाली थीं, क्योंकि सारे राजा एक जैसे नहीं थे. कुल 562 "राज्यों" में से ज़्यादातर छोटी रियासतें ही थीं, जिनकी राजनीतिक प्रासंगिकता न के बराबर थी.

लाखों लोगों पर शासन करने वाले क़रीब 100 राजाओं को बहुत छोटी मिल्कियत वाले ज़मींदारों के बराबर खड़ा कर देना उचित नहीं था, और इससे ना केवल उनकी हैसियत कमज़ोर हुई बल्कि वो एक कार्टून जैसे भी बनकर रह गए.

सच्चाई ये थी कि ये रजवाड़े तब भारतीय उपमहाद्वीप के क़रीब 40 फ़ीसदी इलाके में फैले थे और उनपर ब्रिटिश शासकों का सीधा शासन नहीं था. ये राजा ब्रिटिश राज के साथ की गई संधियों और समझौतों के ज़रिए उनसे बतौर जागीरदार जुड़े हुए थे. लेकिन ये सब के सब वैसे क़तई नहीं थे जैसी कि इनकी छवि गढ़ी गई है. इन रियासतों के शासकों की छवि

कई राजा योग्य और अनुशासित भी थे

लाइफ़ मैगज़ीन ने अपनी उसी रिपोर्ट में ये भी स्वीकार किया था कि कोचीन के महाराजा के किसी रखैल की गोद की बजाय किसी संस्कृत पांडुलिपि में मगन होने की संभावना अधिक थी. वहीं गोंडल के राजा एक प्रशिक्षित डॉक्टर थे.

बड़े राज्यों पर शराब और व्याभिचार में डूबे रहने वाले तानाशाहों का राज नहीं था. वहां गंभीर राजनीतिक हस्तियां राज कर रही थीं.

बेशक, शासकों की सनक के आरोपों में थोड़ी सच्चाई है. जैसे एक महाराजा ने स्कॉटलैंड की एक सैन्य टुकड़ी को देख उनकी ही तरह की स्कर्ट वाली पोशाक अपने सैनिकों को पहना दी. वहीं एक दूसरे राजा का मानना था कि वो फ़्रांस का शासक लुई चौदहवें है जिसने पंजाबियों के बीच पुनर्जन्म लिया है.

वैसे इस तरह की सनक की कहानियाँ ब्रिटिश शासकों की भी रही हैं. जैसे भारत के वायसराय रहे लॉर्ड कर्ज़न को एक बार नंगा होकर टेनिस खेलते पाया गया था.

कई शासकों का काम बड़ा शानदार था

अपनी नई किताब के लिए रिसर्च करते वक़्त मैंने पाया कि महाराजाओं की "आत्मकेंद्रित मूर्खों" वाली छवि के चलते न केवल दिलचस्प कहानियां छूट गईं, बल्कि ऐसी कई कहानियों को जान-बूझकर छिपा दिया गया.

मैसूर के राजा के पास हाथी थे, पर उनके राज में उद्योग भी लगे. बड़ौदा में एक पत्रकार ने पाया कि वहां के महाराजा ने शिक्षा के लिए 55 लोगों पर 5 डॉलर के बराबर की राशि खर्च की, जबकि दूसरी ओर ब्रिटिश शासकों के भीतर आने वाले क्षेत्र में इतना खर्च 1,000 लोगों पर किया गया था.

उधर, त्रावणकोर यानी आज के केरल को स्कूलों और बुनियादी ढांचे पर किए गए निवेश के मामले में एक "मॉडल राज्य" माना जाता था. वास्तव में, भारत में संवैधानिकता को लेकर शुरुआती चर्चा रियासतों में हुई.

तो ऐसा क्यों है कि जब हम राजाओं के बारे में बातें करते हैं, तो हमें केवल हरम, आकर्षक कार और सेक्स स्कैंडल ही सूझता है?

पहली बात तो ये कि ब्रिटिश शासन को ये स्थिति बेहतर लगती थी कि जिसमें वो ख़ुद को ऐसे निष्ठावान शिक्षक के तौर पर पेश कर सकता था जो उद्दंड बच्चों को अनुशासित करने की कोशिश कर रहे थे.

वो यदि ये स्वीकार कर लेते कि भारत के लोग न केवल शासन कर सकते हैं, बल्कि कई मामलों में अंग्रेजों को भी पीछे छोड़ सकते हैं, तो इससे ब्रिटिश साम्राज्य के तथाकथित "सभ्य बनाने वाले" मिशन का पर्दाफाश हो जाता.

ब्रिटिश राज से इनके संबंध थे जटिल

असल में ये कहानी राज को परिभाषित करने वाली नज़ाकत और पागलपन को भी बताती है: ये महाराजा भले औपचारिक तौर पर ''साम्राज्य के स्तंभ" थे, पर व्यवहार में वो अशांत भागीदार थे और हमेशा अपने स्वामी की परीक्षा लेते रहते थे.

उदाहरण के लिए, बड़ौदा रियासत ब्रिटिश-विरोधी क्रांतिकारी साहित्य का स्रोत थी. वहां "सब्जियों की दवा" जैसे टाइटल के तहत ऐसी क्रांतिकारी किताबें छपा करती थीं.

मैसूर रियासत अपने राजपरिवार के पीछे पड़ने वाले स्थानीय प्रेस को तो बर्दाश्त नहीं करता था, लेकिन ब्रिटिश राज की आलोचना करने की अनुमति वहां के संपादकों को थी.

जयपुर के शासकों ने अधिक ​राजस्व देने से बचने के लिए अपने खातों में खुशी-खुशी हेराफेरी की और इससे लाखों बचाए. इसके अलावा, कई शासकों ने आजादी की लड़ाई में कांग्रेस पार्टी को वित्तीय मदद दी. वहीं लॉर्ड कर्ज़न का 1920 के दशक में ही मानना था कि आजादी की मुहिम के समर्थन के लिए भारतीय राजाओं के बीच भी कई "फिलिप एग्लिट्स" (बोरबॉन का एक राजा, जिन्होंने फ्रांसीसी क्रांति का समर्थन किया) मौजूद थे.

ये सुनने में भले अजीब लगे, पर आजादी की अधिकांश लड़ाई में राजाओं को नायकों के रूप में देखा गया.

बड़े राज्यों की उपलब्धियों ने महात्मा गांधी सहित कई राष्ट्रवादियों को अभिभूत किया. उन्होंने उस नस्लवादी धारणा को खत्म किया कि "मूल निवासी" ख़ुद पर शासन नहीं कर सकते. लेकिन 1930 और 1940 के दशक में चीजें बदल गईं.

कई रियासतों में, शिक्षा तक लोगों की पहुंच को व्यापक बनाने की उनकी सफलता के चलते वहां लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की मांग उठी. भारत से अंग्रेजों की वापसी के पहले कई महाराजाओं ने अपनी व्यापक विरासत को धूमिल कर लिया और दमनकारी बन गए.

लेकिन इतिहास से यही सबक मिलता है कि मामला जितना दिखता है, उससे कहीं अधिक जटिल होता है. और इन महाराजाओं के बारे में भी ये उतना ही सच है. राजाओं में कई दूरदर्शी आधुनिकतावादी और चतुर राजनेता भी थे. नर्तकियों और हाथियों की पुरानी बातों के पीछे बहुत लंबे समय का एक ब्यौरा भी छिपा हुआ है.

(मनु पिल्लई एक इतिहासकार होने के साथ 'फॉल्स एलायंस: इंडियाज महाराजास इन द एज ऑफ रवि वर्मा' के लेखक हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+