IMD: कोरोना संकट के बीच आई अच्छी खबर, इस साल सामान्य रहेगा Monsoon, जमकर बरसेंगे बादल

नई दिल्ली। मौसम विभाग ने इस साल मानसून के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस साल देश में सामान्य मानसून रहेगा। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचीव माधवन राजीवन ने जानकारी देते हुए कहा कि मॉडल एरर को ध्यान में रखते हुए दीर्घ अवधि मानसून में 5 फीसदी की कमी या 5 फीसदी की बढ़त हो सकती है, पूर्वानुमान के मुताबिक 2020 के दौरान मानसून सामान्य रहेगा और इसके 100 फीसदी औसत के रहने का अनुमान है, खास बात ये है कि इस बार मौसम के पूर्वानुमान को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जारी किया गया है।

इस साल सामान्य रहेगा Monsoon

इस साल सामान्य रहेगा Monsoon

बता दें कि चार महीने का दक्षिण पश्चिम मानसून हर साल जून से सितंबर चार महीने हर साल केरल से शुरु होता है। देश में कोरोना के मामलों और लॉकडाउन के बीच इस पूर्वानुमान का बेहद महत्वपूर्ण है,दक्षिण-पश्चिम मानसून खरीफ की फसल जैसे मोटे अनाज, धान, दहलन और तिलहन के जरूरी होते हैं। ऐसे में किसानों को अच्छी बारिश से राहत मिल सकती है।

मानसून आमतौर पर 1 जून को केरल से शुरू होता है

मानसून आमतौर पर 1 जून को केरल से शुरू होता है

बता दें कि चार महीने का दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर 1 जून को केरल से शुरू होता है, IMD का यह अनुमान खरीफ की फसल जैसे धान, मोटे अनाज, दालें और तिलहन बोने के लिए काफी अहम है। मालूम हो कि भारत में मानसून सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक होता है।

अच्छी बारिश के संकेत

वैसे इससे पहले अमेरिकी कंपनी 'वेदर' ने कहा था कि देश में इस साल मानसून जल्दी ही दस्तक देगा। अनुमान है कि इस साल मानसून की बारिश भी सामान्य से ज्यादा होगी। 'वेदर' के मुताबिक इस साल 30 मई को मानसून केरल तट से टकराएगा और अल नीनो की बजाए ला नीना की स्थितियां बनेंगी और लगातार दूसरी साल सामान्य से ज्यादा बारिश होगी। पिछले साल मानसून करीब एक सप्ताह की देरी से आठ जून को केरल तट से टकराया था। इस साल मौसम का पूर्वानुमान मानसून में अच्छी बारिश के संकेत दे रहा है।

जानिए मानसून के बारे में खास बातें

जानिए मानसून के बारे में खास बातें

मानसून मूलतः हिन्द महासागर एवं अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आनी वाली हवाओं को कहते हैं जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि में भारी वर्षा करातीं हैं। ये ऐसी मौसमी पवन होती हैं, जो दक्षिणी एशिया क्षेत्र में जून से सितंबर तक, प्रायः चार माह सक्रिय रहती है। इस शब्द का प्रथम प्रयोग ब्रिटिश भारत में (वर्तमान भारत, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश) एवं पड़ोसी देशों के संदर्भ में किया गया था। ये बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से चलने वाली बड़ी मौसमी हवाओं के लिये प्रयोग हुआ था, जो दक्षिण-पश्चिम से चलकर इस क्षेत्र में भारी वर्षाएं लाती थीं। हाइड्रोलोजी में मानसून का व्यापक अर्थ है- कोई भी ऐसी पवन जो किसी क्षेत्र में किसी ऋतु-विशेष में ही अधिकांश वर्षा कराती है।

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