इंडियन नेवी को अलविदा कहने जा रही देश में निर्मित यह पहली वॉरशिप
मुंबई। आईएनएस गोदावरी, देश में निर्मित वह वॉरशिप जो अब तक इंडियन नेवी और देश का मान बढ़ाती आई थी, 23 दिसंबर को अलविदा कह देगी।
नेवी की ओर से इस पर बयान दिया गया है कि इस वॉरशिप ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है। नेवी ने इस वॉरशिप को दुनिया के सामने देश की बढ़ती सैन्य ताकत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक करार दिया है।
आईएनएस गोदावरी ने कई ऑपरेशंस में भाग लिया है और हर बार देश के दुश्मनों को इसके आगे सिर झुकाना पड़ा है। आइए आपको इस वॉरशिप से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में बताते हैं।

सन 1893 में बनी थी नेवी का हिस्सा
आईएनएस गोदावरी ने इंडियन नेवी को तीन दशक दिए हैं। इन तीन दशकों के दौरान इसने कई अहम ऑपरेशंस में हिस्सा लिया। 1988 में श्रीलंक में ऑपरेशन ज्यूपिटर, इसके बाद ऑपरेशन शील्ड और ऑपरेशन बॉल्स्टर के साथ ही अदन की खाड़ी में वर्ष 2009 और 2011 में एंटी-पाइरेसी मिशन का हिस्सा रही।

आर्मी की भी मददगार
वर्ष 1994 में सोमालिया में आईएनएस गोदावरी को इंडियन आर्मी से अलग कर दिया गया था।

1998 की बड़ी सफलता
इस वॉरशिप को वर्ष 1998 में ऑपरेशन कैक्टस का हिस्सा बनाया गया था। इस ऑपरेशन के तहत मालद्वीप सरकार के खिलाफ तख्तापलट की साजिश को नाकाम किया गया था। जो लोग दूसरे व्यावसायिक जहाज की मदद से माले छोड़कर भागने की कोशिशों में थे उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

पांच वर्ष में शामिल इंडियन नेवी में
इस वॉरशिप के निर्माण का कार्य तीन नवंबर 1978 में शुरू हुआ था। 15 मई 1980 को इसे लांच कर दिया गया। इसके बाद 10 दिसंबर 1983 में इसे इंडियन नेवी में कमीशंड कर दिया गया। नेवी के मुताबिक इस वॉरशिप ने 32 वर्षों तक देश की सेवा की है।

सफलता का नया आयाम
आईएनएस गोदावरी गोदावरी क्लास की पहली वॉरशिप है। इसके बाद गंगा और गोमती हैं। तीन ब्रह्मपुत्र क्लास की वॉरशिप्स को इसकी डिजाइन के अनुरुप ही तैयार किया गया।

आत्मनिर्भरता का प्रतीक
इस वॉरशिप के जाने से नेवी के साथ जुड़े नेवी ऑफिसर काफी निराश भी हैं। एक ऑफिसर ने इसके जाने पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की और कहा आईएनएस गोदावरी का निर्माण 70 के दशक में शुरू हुआ था। इसने नेवी को मजबूत बनाया और साथ ही साथ आत्मनिर्भरता का भी एक नया प्रतीक साबित हुई।

हमेशा रहेगी इसकी याद
इस शिप से जुड़े इस अधिकारी ने बताया कि आईएनएस गोदावरी को मझगांव डॉकयार्ड में यूके के सहयोग से तैयार किया गया था। अब जबकि यह इंडियन नेवी को अलविदा कह रही है तो यह उनके लिए काफी अफसोस का पल है। आईएनएस गोदावरी इस अधिकारी की पहली वॉरशिप थी। उनके लिए यह वॉरशिप कभी न भूलने वाले कई मौके लेकर आई।












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