Waqf Bill: वक्फ संशोधन विधेयक के बीच आर्टिकल 26 की क्यों होने लगी चर्चा?
Waqf Bill: पूरे देश में वक्फ संशोधन बिल पर व्यापक विरोध देखने को मिल रहा है। विपक्ष के भारी हंगामे के बीच बुधवार, 2 अप्रैल को वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में पेश कर दिया गया। इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में सरकार और विपक्ष के बीच जबरदस्त तकरार देखने को मिली।
चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की अल्पसंख्यकों के प्रति संवेदना दिखाने की कोशिश महज एक दिखावा है। उन्होंने कहा, "ईद के दौरान मुसलमानों को सड़क पर नमाज तक नहीं पढ़ने दी गई, फिर भी बीजेपी उनके हितैषी बनने का नाटक कर रही है।"

Waqf Bill पर टीएमसी सांसद ने आर्टिकल 26 का दिया हवाला
वहीं टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने आर्टिकल 26 का हवाला देते हुए वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 का विरोध किया। TMC नेता बनर्जी ने कहा," ममता बनर्जी के नेतृत्व में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की ओर से मैं इस विधेयक का पूरी तरह से विरोध करता हूं। मेरे भाषण की भावना है 'तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा। इंसान की औलाद है इंसान बनेगा।"
टीएमसी सांसद के इस बयान के बाद से संविधान के अनुच्छेद 26 को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। क्या कहता है आर्टिकल 26? इसे हिंदू और मुस्लिम धर्मस्थलों पर लागू करने में व्यवहारिक अंतर क्यों है? इस विधेयक के पारित होने से क्या फर्क पड़ेगा?
Waqf Bill: क्या कहता है आर्टिकल 26?
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 26 धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद में यह प्रावधान भी है कि सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन रहते हुए प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी भी वर्ग के पास कुछ अधिकार होंगे।
आर्टिकल 26 के अंतर्गत कुछ अधिकार मिलते हैं जो कुछ इस तरह हैं...
- धार्मिक और हितकारी उद्देश्यों के लिये संस्थानों की स्थापना करना और उसका रखरखाव करना
- धार्मिक मामलों में अपने स्वयं के मामलों का प्रबंधन करना
- धार्मिक चल और अचल संपत्ति का स्वामित्व और अधिग्रहण करने का अधिकार देता है।
- ऐसी संपत्ति का प्रशासन कानून के अनुसार करना
वैसे तो संविधान का अनुच्छेद 26 सभी धर्मों और धार्मिक संप्रदायों को समान रुप से अधिकार प्रदान करता है, लेकिन इसमें हिंदू और मुस्लिम धर्मों के लिए कुछ व्यवहारिक और कानूनी अंतर देखे जाते हैं, जो धार्मिक परंपराओं और उनसे जुड़े कानूनों के आधार पर विकसित हुए हैं।
हिंदू धर्म के संबंध में आर्टिकल 26
आमतौर पर हिंदू धर्म में मंदिरों और मठों का प्रबंधन ट्रस्ट या न्यास के तहत किया जाता है। हालांकि, देश में कई ऐसे मंदिर हैं जिसमें राज्य सरकारों का हस्तक्षेप अधिक देखने को मिलता है।
उदाहरण के तौर पर देखें तो,
दक्षिण भारत के बड़े मंदिरों में शामिल तिरुपति बालाजी और सबरीमाला मंदिर का मैनेजमेंट सरकारी बोर्ड के द्वारा किया जाता है। इसकी देख-रेख और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार के द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इतना ही नहीं ये अनुच्छेद देश के कई राज्यों में सरकार को मंदिरों की संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार देता है। जबकि अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों जैसे चर्च, मस्जिदों पर सरकार का दखल ना के बराबर है।
मुस्लिम धर्म के संदर्भ में क्या कहता है अनुच्छेद 26
- मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर सरकार की दखलअंदाजी नहीं है। यहां धार्मिक संपत्तियों का प्रबंधन वक्फ बोर्ड करता है जो सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय की तरह काम करता है।
- यहां पर मस्जिद, दरगाह, कब्रिस्तान आदि धार्मिक संपत्तियां वक्फ बोर्ड के अंतर्गच आती हैं। धार्मिक स्थलों का प्रबंधन, वक्फ की चल-अचल संपत्ति सबका प्रबंधन वक्फ बोर्ड ही करता है।
- सरकार वक्फ संपत्तियों में प्रत्यक्ष रूप से दखल नहीं करती और ना ही उन्हें नियंत्रित नहीं करती।
- वक्फ बोर्ड के मुतवल्ली यानी प्रबंधक का जो चुनाव होता है वो समुदाय द्वारा वोटिंग के आधार पर किया जाता है। इसमें सरकार सीमित रुप से हस्तक्षेप करती है।
- मुस्लिम धार्मिक संपत्तियां वक्फ बोर्ड के अधीन होती हैं इन पर सरकारी नियंत्रण मंदिरों की तुलना में कम है।
Waqf Bill: सरकार का कितना हस्तक्षेप?
- वक्फ संशोधन बिल के पारित हो जाने के बाद वक्फ बोर्ड में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ जाएगा। पुराने बिल में जहां वक्फ की संपत्ति पर सभी निर्णय बोर्ड द्वारा लिए जाते थें वहीं नए बिल में कुछ संशोधन किया गया है।
- वक्फ संशोधन बिल में अब वक्फ संपत्ति से जुड़े किसी भी विवाद में हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है, जबकि पहले वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला ही अंतिम माना जाता था।
- अब वक्फ बिना दान मिले किसी संपत्ति पर अपना दावा नहीं कर सकता है। इससे पहले, अगर वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति पर दावा करता था, तो वह वक्फ की संपत्ति मानी जाती थी।
- नए विधेयक के तहत पंजीकृत हर वक्फ संपत्ति की जानकारी अधिनियम लागू होने के बाद छह महीने के अंदर सेंट्रल डाटाबेस में देना जरूरी है।
- विधेयक में शामिल इस संशोधन में कहा गया है कि अगर वक्फ संपत्ति को केंद्रीय पोर्टल में नहीं डाला गया तो इससे वक्फ की जमीन पर अतिक्रमण होने या विवाद पैदा होने पर अदालत जाने का अधिकार खत्म हो जाएगा।
- इसके अलावा वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का समर्थन किया गया है, ताकि वे वक्फ मामलों में रुचि रखने वाले या विवादों में पक्षकार बन सकें।
- वक्फ बोर्ड विधेयक में वक्फ बोर्डों के संचालन में अब गैर-मुस्लिम और कम से कम दो महिला सदस्यों को नामित किया जाना प्रस्तावित है।
- Waqf Bill: क्या है ज्वांइट पार्लियामेंट कमेटी (JPC) जिसने वक्फ संशोधन विधेयक में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका?
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