Waqf Bill: क्या है ज्वांइट पार्लियामेंट कमेटी (JPC) जिसने वक्फ संशोधन विधेयक में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका?
Waqf Bill: वक्फ संशोधन बिल पर पूरे देश में घमासान बरकरार है लोकसभा में विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने इस संशोधित वक्फ विधेयक को आज, 2 अप्रैल को दोपहर 12 बजे पेश कर दिया। इससे पहले मंगलवार 1 अप्रैल को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस बिल को सदन में पेश करने का फैसला लिया गया था।
इस बिल में सबसे महत्तवपूर्ण भूमिका निभाने वाली कमेटी संयुक्त संसदीय कमेटी है जिसने इसमें कई सुधार किए। क्या है JPC? जेपीसी में इस विधेयक को लेकर कितने संशोधन पेश हुए? इनमें कितनों को मंजूरी मिली? जेपीसी से पास होने के बाद विधेयक में क्या बदलाव आया है? आइये विस्तार से जानते हैं...

Waqf Bill: क्या है ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी?
- संयुक्त संसदीय समिति (JPC) भारतीय संसद की एक विशेष समिति है, जो किसी विशेष विषय, विधेयक या घोटाले की जांच और समीक्षा के लिए गठित की जाती है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य शामिल होते हैं। JPC का मुख्य कार्य संबंधित मामले की गहन जांच करना, साक्ष्य एकत्रित करना, विशेषज्ञों से परामर्श लेना और अपनी सिफारिशें संसद को प्रस्तुत करना होता है।
- वैसे तो केंद्र ने इस वक्फ संशोधन विधेयक को अगस्त 2024 को लोकसभा में रखा था लेकिन उस दौरान इस पर विचार करने के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया।
- JPC ने छह महीनों तक इस विधेयक पर मिले सुझावों पर विचार किया और फिर 27 जनवरी 2025 को इसे सदन पेश करने की मंजूरी दी। इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट ने इस विधेयक पर अपनी मंजूरी दी और निचली सदन में इस पर बहस शुरू हुई है।
Waqf Bill: जेपीसी में इस विधेयक का क्या हुआ?
- जब जेपीसी के पास ये विधेयक गया तब इस पर करीब छह महीने तक विचार विमर्श किया गया। संसदीय समिति के सदस्यों की ओर से 572 संशोधनों का सुझाव दिया गया था। जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बताया कि हर सुझाव पर विस्तार से चर्चा हुई।
- 27 जनवरी को JPC ने इस पर आखिरी बैठक हुई थी और 44 संशोधनों पर गंभीरता से चर्चा हुई थी। समिति अध्यक्ष ने बताया कि हमने सभी सदस्यों से प्रस्तावित संशोधन मांगे थे। समिति ने 14 संशोधनों को बहुमत के आधार पर स्वीकार किया।
- विपक्ष ने भी समिति को कुछ संशोधन सुझाए थे, लेकिन जब इन्हें लेकर वोटिंग हुआ तो उन सभी सुझावों को बहुमत के आधार पर खारिज कर दिया गया। 108 घंटे विधेयक पर चर्चा हुई और 284 हित धारकों से बात की गई।
जेपीसी बैठकों में सरकार बनाम विपक्ष?
- इस बीच जेपीसी की बैठकों में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त असहमति देखी गई।
- इस दौरान संयुक्त संसदीय समिति की ओर से 10 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। जिसके बाद सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी और जेपीसी अध्यक्ष पर अपनी बातों को अनसुना करने के आरोप लगाए।
- 29 जनवरी को संसदीय समिति ने वक्फ संशोधन विधेयक को 15-11 वोटों के अंतर से मंजूरी दे दी। समिति ने वक्फ विधेयक की समीक्षा के बाद 655 पन्नों की रिपोर्ट जारी की गई। इसे बाद में लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को सौंपा गया।
- समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने विधेयक में किए गए संशोधनों पर जो रिपोर्ट जारी की थी उसमें कहा गया कि वक्फ बोर्ड को अपने काम को पारदर्शी और प्रभावी तरीके से करने में मदद मिलेगी।
- हालांकि, मंजूरी मिलने के बाद विपक्ष ने इस विधेयक की आलोचना की और इसे असंवैधानिक बताया और कहा धार्मिक मामलों में केंद्र का हस्तक्षेप बढ़ जाएगा और वक्फ बोर्ड का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
- विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध करते हुए अंतिम रिपोर्ट का अध्ययन करने और अपनी असहमति व्यक्त करने के लिए बहुत कम समय दिया गया।
- विपक्ष ने यह आरोप लगाया था कि 655 पन्नों की रिपोर्ट उन्हें बहुत कम समय में दी गई और इसे पढ़ने का समय नहीं मिला।
Waqf Bill: जेपीसी ने विधेयक में क्या बदलाव किए
हर कोई अपनी संपत्ति 'वक्फ' नहीं कर सकेगा
विधेयक में एक संशोधन करते हुए वक्फ द्वारा उपयोगकर्ता का खंड हटाया गया है, और यह साफ किया गया है कि वक्फ संपत्ति से संबंधित मामले अब पूर्वव्यापी तरीके से नहीं खोले जाएंगे, जब तक कि वे विवादित न हों या सरकारी संपत्ति न हों।
गैर-मुस्लिमों की उपस्थिति
इसके अलावा वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का समर्थन किया गया है, ताकि वे वक्फ मामलों में रुचि रखने वाले या विवादों में पक्षकार बन सकें। विधेयक में वक्फ बोर्डों के संचालन में अब कम से कम दो महिला सदस्यों को नामित किया जाना प्रस्तावित है।
इसके अलावा, केंद्रीय वक्फ परिषद में एक केंद्रीय मंत्री, तीन सांसद, दो पूर्व न्यायाधीश, चार 'राष्ट्रीय ख्याति' के व्यक्ति और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल होंगे इनमें से कोई भी इस्लामिक धर्म से संबंधित नहीं होगा।
सरकारी अधिकारी को जांच की शक्ति
नए विधेयक में वक्फ से जुड़े विवादों के मामलों में जिला कलेक्टर को जांच की शक्ति दी गई थी। हालांकि, जेपीसी ने जिला कलेक्टर वाली शक्ति को खत्म करने पर सहमति जता दी और राज्य सरकार को अब इन मामलों की जांच करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नामित करने का अधिकार देना प्रस्तावित कर दिया।
वक्फ संपत्ति का केंद्रीय डाटाबेस में पंजीकरण
नए विधेयक के तहत पंजीकृत हर वक्फ संपत्ति की जानकारी अधिनियम लागू होने के बाद छह महीने के अंदर सेंट्रल डाटाबेस में देना जरूरी है। विधेयक में शामिल इस संशोधन में कहा गया है कि अगर वक्फ संपत्ति को केंद्रीय पोर्टल में नहीं डाला गया तो इससे वक्फ की जमीन पर अतिक्रमण होने या विवाद पैदा होने पर अदालत जाने का अधिकार खत्म हो जाएगा।
हालांकि, एक अन्य स्वीकृत संशोधन अब मुतवल्ली (कार्यवाहक) को राज्य में वक्फ न्यायाधिकरण की संतुष्टि बाद कुछ स्थितियों में पंजीकरण के लिए अवधि बढ़ाने का अधिकार देगा।
वक्फ ट्रिब्यूनल का अधिकार खत्म
वक्फ संशोधन बिल में अब वक्फ संपत्ति से जुड़े किसी भी विवाद में हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है, जबकि पहले वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला ही अंतिम माना जाता था। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ये एक धार्मिक संपत्ति है इसमें कोर्ट का दखल सही नहीं है इससे ट्रिब्यूनल के अस्तित्व पर खतरा आ सकता है।
बिना दान संपत्ति पर दावा नहीं
अब वक्फ बिना दान मिले किसी संपत्ति पर अपना दावा नहीं कर सकता है। इससे पहले, अगर वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति पर दावा करता था, तो वह वक्फ की संपत्ति मानी जाती थी।
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