Waqf Bill: वक्फ संशोधन बिल के कानून बनते ही ये 5 बड़े बदलाव कर सकते हैं, वक्फ बोर्ड को सबसे ज्यादा परेशान!
Waqf Bill Amendment: वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 लोकसभा से पास हो गया है और अब 03 अप्रैल को इसे राज्यसभा में पेश कर दिया गया है। इसे ''यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पावरमेंट, इफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट'' का नाम दिया गया है। लोकसभा में बिल के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े हैं। राज्यसभा के नंबर गेम को देखते हुए ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को पास कराने में ज्यादा मुस्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पास होते ही इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा...जैसे ही इसे राष्ट्रपति की मुहर मिलेगी...यह बिल कानून बन जाएगा और देश में वक्फ संपत्तियों पर लागू हो जाएगा। वक्फ विधेयक का उद्देश्य 1995 के अधिनियम में संशोधन करना है, जिसे आखिरी बार 2013 में संशोधित किया गया था।

वक्फ संशोधन बिल के कानून बनते ही वक्फ बोर्ड को कई बड़े बदलाव करने होंगे। इसमें से 5 बदलाव ऐसे हैं...जिनकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा है...जिसको लेकर कहा जा रहा है कि कानून बनने के बाद ये कुछ प्रमुख बदलाव हैं...जो वक्फ बोर्ड को सबसे ज्यादा परेशान कर सकते हैं।
वक्फ संशोधन बिल के कानून बनते ही क्या होंगे बड़े बदलाव?
🔴 1.वक्फ के मामले सिविल कोर्ट या हाई कोर्ट में अपील किए जा सकेंगे
वक्फ संशोधन बिल के कानून बनते ही वक्फ को लेकर सिविल कोर्ट या हाई कोर्ट में अपील किया जा सकेगा। बिल में कहा गया है कि अब डोनेशन में मिली संपत्ति ही वक्फ की होगी। जमीन पर दावा करने वाला ट्रिब्यूनल, रेवेन्यू कोर्ट में अपील कर सकेगा।
इसके अलावा सिविल कोर्ट या हाई कोर्ट में भी अपील की जा सकेगी। पहले वक्फ न्यायाधिकरण के फैसलों को हाई कोर्ट में अपील नहीं की जा सकती थी। लेकिन कानून बनने के बाद वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ 90 दिन के अंदर हाई कोर्ट और सिविल कोर्ट में अपील कर सकते हैं। ये बदलाव वक्फ बोर्ड को सबसे ज्यादा परेशान करने वाला हो सकता है क्योंकि इससे वक्फ प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ जाएगी।
इसके अलावा किसी भी विवाद की स्थिति राज्य सरकार के अधिकारियों को फैसला करने का अधिकार होगा कि उक्त संपत्ति वक्फ की है या सरकार की।
🔴 2. वक्फ बोर्ड में दो मुस्लिम महिलाओं को शामिल करना होगा अनिवार्य
बिल में कहा गया है कि राज्यों के वक्फ बोर्ड में दो मुस्लिम महिलाएं और दो गैर-मुस्लिम सदस्य का होना अनिवार्य हैं। इसके अलावा शिया, सुन्नी और पिछड़े मुस्लिमों से भी एक-एक सदस्य को होना चाहिए। इसमें बोहरा और आगाखानी समुदायों के सदस्यों को भी जगह देना अनिवार्य होगा
🔴 3. वक्त बोर्ड का डेटाबेस और जमीन का डेटा करना होगा ऑनलाइन
बिल में कहा गया है कि कानून लागू होने के 6 महीने के अंदर वक्त की संपत्ति का डेटा सेंट्रल डेटाबेस पर रजिस्टर्ड करना अनिवार्य होगा। वक्फ में दी गई जमीन का पूरा ब्यौरा 6 महीने के अंदर ऑनलाइन अपलोड करना होगा।
इसके अलावा डोनेशन में दी गई हर जमीन का डेटाबेस ऑनलाइन करना होगा। जिसमें जमीन किसकी है, किसको डोनेट किया गया है, वक्फ के पास कहां से आई, वक्फ को इससे कितनी कमाई होती है...ये सारी जानकारी ऑनलाइन सबमिट करनी होगी। इससे वक्फ की संपत्तियों के बारे में आम आदमी को ट्रांसपरेंसी आएगी।
🔴 4. वक्फ बोर्ड में अब गैर-मुस्लिमों को भी करना होगा शामिल
बिल में कहा गया है कि कानून बनने के बाद वक्फ बोर्ड में अब गैर-मुस्लिम सदस्य को शामिल करना अनिवार्य होगा। दूसरे धर्म से जुड़े दो लोगों को शामिल करना ही होगा। इतना ही नहीं, क्फ बोर्ड में नियुक्त किए गए सांसद और पूर्व जजों का मुस्लिम होना जरूरी नहीं है।
🔴 5. वक्फ की जमीन की उत्तराधिकारी महिलाएं भी होंगी
बिल में यह भी कहा गया है कि 'वक्फ-अल-औलाद' के तहत महिलाओं को भी वक्फ की जमीन में उत्तराधिकारी माना जाएगा। पहले इसमें महिलाओं को उत्तराधिकारी नहीं माना जाता था।
इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों के पास वक्फ के खातों का ऑडिट कराने का अधिकार होगा। कानून बनने के बाद वक्फ बोर्ड सरकार को किसी भी जमीन की जानकारी देसे से मना नहीं कर सकता है।












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