Waqf Amendment Act पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की दलीलें, जानें सुनवाई की 10 अहम बातें
Waqf Amendment Act Case Hearing: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को वक्फ एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक्ट का मजबूती से बचाव करते हुए कोर्ट के समक्ष कई अहम तर्क प्रस्तुत किए।
उन्होंने वक्फ की धार्मिक और कानूनी स्थिति, वक्फ बाय यूजर की वैधता, संपत्ति पर सरकार का अधिकार और बोर्ड की कार्यप्रणाली जैसे मुद्दों पर विस्तार से अपना पक्ष रखा।

Waqf Amendment Act Case: आज की सुनवाई से जुड़ी 10 अहम बातें
1. वक्फ इस्लामी अवधारणा, पर इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं
SG तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि वक्फ एक इस्लामी चैरिटी व्यवस्था है, लेकिन यह इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि दान सभी धर्मों में होता है - चाहे हिन्दू हों, सिख हों या ईसाई - लेकिन इसे किसी धर्म में "जरूरी" नहीं माना गया है।
2. वक्फ बाय यूजर कोई मौलिक अधिकार नहीं
सरकार ने कहा कि वक्फ बाय यूजर के तहत संपत्तियों को धार्मिक उपयोग के आधार पर वक्फ घोषित किया जा सकता है, भले ही दस्तावेज न हों। लेकिन यह कोई मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि कानून द्वारा मान्यता प्राप्त व्यवस्था है।
3. सरकारी जमीन पर कोई दावा नहीं कर सकता
SG मेहता ने तर्क दिया कि कोई भी व्यक्ति सरकारी जमीन पर वक्फ का दावा नहीं कर सकता। यदि ऐसी संपत्ति वक्फ घोषित हुई है तो सरकार को उसे पुनः प्राप्त करने का पूरा कानूनी अधिकार है।
4. वक्फ बोर्ड धर्मनिरपेक्ष निकाय, दो गैर-मुस्लिम सदस्य कोई समस्या नहीं
उन्होंने कोर्ट में कहा कि वक्फ बोर्ड पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष तरीके से कार्य करता है। बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की मौजूदगी से किसी भी धार्मिक कार्य या मान्यता को कोई फर्क नहीं पड़ता।
5. झूठी कहानियां गढ़ी जा रही हैं, दस्तावेज़ दिखाने की बाध्यता नहीं
मेहता ने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि यदि वक्फ को दस्तावेज न दिखाए गए तो सामूहिक कब्जा हो जाएगा। जबकि कानून में स्पष्ट प्रावधान हैं कि यदि कोई दावे करता है, तो प्रमाण देने का दायित्व उस पर है।
6. पुराने कानूनों से बेहतर है वर्तमान वक्फ कानून
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 1923 से चली आ रही वक्फ से जुड़ी समस्याओं को अब नए अधिनियम द्वारा सुलझा लिया गया है। यह कानून व्यापक विचार-विमर्श और 96 लाख सुझावों के आधार पर बनाया गया है।
7. संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की 36 बैठकें हुईं
SG ने कोर्ट को बताया कि वक्फ कानून के प्रारूप पर JPC की 36 बार बैठकें हुईं, और देशभर के मुस्लिम संगठनों से विचार लेकर ही इसे अंतिम रूप दिया गया। याचिकाकर्ता पूरे मुस्लिम समुदाय की राय के प्रतिनिधि नहीं हो सकते।
8. रजिस्ट्रेशन की शर्त का उद्देश्य पारदर्शिता
संपत्ति रजिस्ट्रेशन की शर्त पहले के कानून में भी थी, अब समय सीमा को 3 महीने से बढ़ाकर 6 महीने किया गया है। रजिस्ट्रेशन न होने पर संपत्ति जब्त कर ली जाएगी - ऐसा प्रचार पूरी तरह भ्रामक है।
9. हिन्दू मंदिरों की तरह ही निगरानी व्यवस्था
SG ने कहा कि जिस तरह हिन्दू धर्मस्थलों के लिए राज्य सरकार बंदोबस्ती आयुक्त नियुक्त करती है और नियमन होता है, उसी तरह वक्फ बोर्ड सिर्फ प्रबंधन करता है, धार्मिक मामलों में दखल नहीं देता।
10. संवैधानिकता के सिद्धांत के तहत अधिनियम को चुनौती नहीं दी जा सकती
सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि वक्फ अधिनियम की संवैधानिक वैधता संदेह से परे है, और इसे रोका नहीं जा सकता क्योंकि यह कानून धर्मनिरपेक्ष उद्देश्यों के साथ, समाज की भलाई हेतु लाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही इस महत्वपूर्ण सुनवाई में जहां याचिकाकर्ता वक्फ अधिनियम को धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बता रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार इसे पारदर्शिता और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा का जरिया बता रही है। अब देखना होगा कि कोर्ट इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है।












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