व्यापमं घोटाला: क्राइम वर्ल्ड की तरफ मुड़ सकते हैं जेलों में कैद नौजवान!
भोपाल। मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले के सिलसिले में जेलों में कैद नौजवान जेल से बाहर आने के बाद अपराध की दुनिया की ओर मुड़ सकते हैं। ऐसा मानना है मनोचिकित्सकों का। इस मामले में फिलहाल लगभग 900 नौजवान जेलों में कैद हैं, जिन्होंने सुनहरे भविष्य के सपने संजोए रहे होंगे।

लेकिन इन नौजवानों का भविष्य अब अधर में है। भोपाल की प्रतिष्ठित मनोचिकित्सक डॉ. रूमा भट्टाचार्या ने कहा कि व्यापमं में पकड़े गए विद्यार्थी किशोर या युवा हैं। इस उम्र में मन पर जल्दी असर होता है, क्योंकि वे मानसिक तौर पर परिपक्व नहीं होते। डॉ. भट्टाचार्य ने कहा, "इन युवाओं के जेल से बाहर आने पर उनमें हताशा और हीन भावना से ग्रस्त होने का खतरा बना रहेगा और वे गलत दिशा में मुड़ सकते हैं।"
एसआईटी के मुताबिक, व्यापमं घोटाले के खुलासे के बाद से अबतक कुल 2,100 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इनमें 897 अभ्यर्थी हैं। इनकी उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच बताई जा रही है। पूर्व विधायक और सामाजिक कार्यकर्ता पारस सखलेचा के अनुसार, इस मामले में अबतक तीन हजार गिरफ्तारियां हुई हैं।
भारत विज्ञान सभा के डॉ एस आर आजाद का कहना है कि हर मां-बाप बच्चे का भविष्य संवारना चाहते हैं। बच्चे इसके लिए मेहनत करते हैं। लेकिन कई बार अभिभावक गलत कदम उठा लेते हैं। जरूरी था कि इन बच्चों की मानसिक स्थिति समझकर इनकी काउंसलिंग करानी चाहिए थी और उसके बाद कोई कदम उठाया जाता। मासूम बच्चों को जेल में डालकर अच्छा नहीं किया गया है।
बच्चों के लिए काम करने वाले डॉ आजाद ने कहा, "जेल से बाहर निकलने के बाद बच्चे जो भी कदम उठाएंगे उसके लिए ये हालात जिम्मेदार होंगे।" जेल में कैद बच्चों के भविष्य को लेकर समाज का हर तबका चिंतित है। क्योंकि बच्चे जेल से बाहर कब आएंगे, यह अनिश्चित है। उस समय उनकी उम्र क्या होगी और वे किस लायक होंगे, सब कुछ अनिश्चित।
उल्लेखनीय है उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित एसआईटी की देखरेख में एसटीएफ इस मामले की जांच कर रही है। इस मामले में अबतक 48 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से कई मौतें रहस्यमय परिस्थितियों में हुई हैं। व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) राज्य में इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज में दाखिले से लेकर वे सभी भर्ती परीक्षाएं आयोजित करती है, जो मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग आयोजित नहीं करता। मसलन पुलिस उपनिरीक्षक, आरक्षक, रेंजर, शिक्षक आदि। इन दाखिलों और भर्तियों में हुई गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद जुलाई 2013 में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।












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