रामपाल के भक्तों के आगे बेबस और बंधक बनी भाजपा सरकार
नयी दिल्ली। हरियाणा का हिसार इन दिनों एक हठी संत और प्रशासन के बीच जंग का मैदान बना हुआ है। एक ऐसा संत जो खुद को भगवान से ऊपर मानता है। एक ऐसा संत जो खुद को पुलिस, प्रशासन और कानून से ऊपर मानता है। संत रामपाल को न तो कानून का डर है और न ही कोर्ट का।

बरवाला के सतलोक आश्रम के बाहर पुलिस बेबस की तरह खड़ी है। संत के समर्थक पुलिस को बेबस किए हुए है। हजारों की तादात में मोर्चे पर डटे संत रामपाल के भक्त पुलिस के हाथों को बांधे रखे हुए है। पुलिस और सुरक्षाबलों के जवान जिरहबख्तर डाले आश्रम के गेट की ओर बढ़ चले। दमकल की गाड़ियां, वज्र वाहन और पुलिस दस्ते की सक्रियता देख अचानक आश्रम की ओऱ से भी हमला शुरू हो गया।

आश्रम के दीवारों पर खड़े भक्त और भीतर और छतों पर मौजूद समर्थकों ने कानून हाथ में ले लिया। पुलिस के जवान पर ढेले-पत्थरों की बरसात हो गई। पुलिस पर पेट्रोल बम फेंके जा रहे है। पुलिस जब भक्तों पर काबू नहीं कर पाई तो पुलिस ने मौके पर मौजूद मीडिया पर अपना गुस्सा उतार दिया। पुलिस वालों ने बेवजह पत्रकारों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं।

संत रामपाल पिछले 3 बार से हरियाणा पुलिस और प्रशासन को छका रहे हैं। प्रशासन उनके आगे बेबस और बंधक नजर आ रहा है। बाबा महिलाएं और बच्चों के सुरक्षा कवच में छिपे हुए हैं। बाबा की प्राइवेट सेना ने आश्रम की किलेबंदी कर दी गई है तो पुलिस अब तक खाली हाथ।












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