विनोद खन्ना ने क्यों कहा था मुशर्रफ आएं भारत और पीएम वाजपेई से मिलाएं हाथ?
पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था विनोद खन्ना का जन्म। विदेश राज्य मंत्री रहते हुए विनोद खन्ना ने हमेशा पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से की थी शांति कायम करने की अपील।
नई दिल्ली। बॉलीवुड ने विनोद खन्ना के रूप में अपना एक और बेहतरीन कलाकार गुरुवार को खो दिया। 70 वर्ष की उम्र में कैंसर से जूझते विनोद खन्ना ने दुनिया को अलविदा कह दिया। विनोद खन्ना सिर्फ एक कलाकार ही नहीं थे बल्कि उन्होंने राजनीति में एक अच्छी पारी भी खेली और खुद को यहां भी एक 'मंझा' हुआ राजनेता साबित किया।

आजादी से पहले पेशावर में हुआ जन्म
विनोद खन्ना का पाकिस्तान के साथ भी एक गहरा नाता रहा है। उनका जन्म छह अक्टूबर 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था। वह बॉलीवुड के पहले ऐसे एक्टर थे जिन्होंने सबसे पहली बीजेपी में एंट्री ली थी। 90 के दशक में वह बीजेपी के साथ जुड़ गए थे। वर्ष 1997 में उन्होंने बीजेपी ज्वॉइन की थी।

वर्ष 2003 में बने विदेश राज्यमंत्री
पंजाब के गुरदासपुर संसदीय क्षेत्र से उन्होंने पहली बार वर्ष 1998 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था। वर्ष 1999 में फिर इसी सीट से चुनाव मैदान में उतरे और चुनावों में फिर जीत हासिल की। जनवरी 2003 में उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने विदेश राज्य मंत्री का पद दिया। इस पद से पहले जुलाई संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री थे। जब वह विदेश राज्य मंत्री बने तो उन्होंने हमेशा पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्तों की वकालत की लेकिन आक्रामक रवैये के साथ।

बस से भारत आएं मुशर्रफ
विदेश राज्य मंत्री रहते हुए उन्होंने हमेशा भारत और पाकिस्तान के बीच की दूरी को फिल्मों के जरिए कम करने की कोशिश की। विनोद खन्ना ने जनवरी 2003 को एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि जिस तरह से प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई बस से लाहौर गए थे, उसी तरह से तत्कालीन पाक राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को भी बस से भारत आना चाहिए।

वाजपेई से हाथ मिलाकर कम करें तनाव
उन्होंने यह बात उस समय भारत और पाकिस्तान के बीच संसद पर आतंकी हमले के बाद जारी तनाव को कम करने के लिए कही थी। विनोद खन्ना ने विदेश मंत्रालय संभालते हुए यह बयान दिया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि मुशर्रफ को भी पीएम वाजपेई से हाथ मिलाना चाहिए और शांति कायम करने की कोशिशें करनी चाहिए।

पाक में क्यों है भारतीय कलाकारों को मनाही
उनका मानना था कि बॉलीवुड भारत और पाकिस्तान के बीच की दूरी को कम करने में कारगर साबित हो सकता है। उन्हें विदेश मंत्री रहते हुए यह बात कभी समझ नहीं आई कि अगर भारत, पाकिस्तान के कलाकारों को यहां पर काम करने की इजाजत देता है, उनके लिए नए रास्ते खोलता है तो फिर पाकिस्तान को ऐसा करने में क्या परेशानी है।

जारी रहेंगी रिश्ते बेहतर करने की कोशिशें
विनोद खन्ना ने कहा था कि पाकिस्तान में भारतीय फिल्में इतनी लोकप्रिय हैं कि उनकी स्मगलिंग तक होती है। उनका मानना था कि पाकिस्तान के साथ रिश्तों को बेहतर करने की भारत सरकार की कोशिशें जारी रहेंगी और इन कोशिशों में योगदान करके उन्हें काफी खुशी होगी। उस समय उन्होंने मजाक में एक बात भी कही कि रिश्तों को बेहतर करने की कोशिशों के लिए वह पाकिस्तान में मौजूद अपनी फैन फॉलोइंग की भी मदद लेंगे।












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