Vice President Dhankhar के स्टाफ राज्य सभा पैनल में शामिल! विपक्षी दल बोले- अजीबोगरीब मामला
उपराष्ट्रपति और राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ के स्टाफ को राज्य सभा के पैनल में शामिल किया गया है। इस फैसले के बाद विपक्षी पार्टियों ने कहा, नियुक्ति का फैसला अजीबो-गरीब है।

Vice President Dhankhar के स्टाफ राज्य सभा पैनल में शामिल किए गए हैं। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ राज्य सभा के सभापति भी हैं। इनके स्टाफ को राज्य सभा के पैनल में शामिल किए जाने की खबरों पर विपक्षी दलों ने अजीबोगरीब मामला करार दिया। खबर के मुताबिक परंपरा से इतर राज्य सभा की समितियों में धनखड़ ने अपने व्यक्तिगत कर्मचारियों में से कम से कम आठ कर्मचारियों को नियुक्त किया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि ऐसा "विभिन्न समितियों पर करीबी नजर रखने के लिए किया गया है।
परंपरा तोड़ने का आरोप क्यों
संसद के उच्च सदन में जगदीप धनखड़ के फैसले को परंपरा तोड़ने वाला और स्पष्ट रूप से मौजूदा तंत्र में उनके अविश्वास को दर्शाने वाला बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार जो अधिकारी राज्यसभा महासचिव को विभिन्न समितियों के विकास और विचार -विमर्श के बारे में बताते हैं, उन्हें सचिवालय और राज्यसभा के अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है। अधिकारियों को इस उद्देश्य के लिए स्थापित एक सामान्य पूल से नियुक्त किया जाता है।
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हालांकि, राज्यसभा सचिवालय की तरफ से जारी ताजा नोटिस के अनुसार आठ नए अधिकारियों को राज्यसभा के दायरे में आने वाली 20 स्थायी समितियों से जोड़ा गया है। यह मौजूदा अधिकारियों के अलावा और उनसे ऊपर होंगे। जनि कर्मचारियों की नई एंट्री हुई है, वे जूनियर स्तर के अधिकारी हैं, जो कामकाज में समितियों की सहायता करेंगे। इनमें से अधिकांश कार्यवाही को गोपनीय रखा जाता है। विपक्ष ने इस फैसले को "विचित्र कदम" बताते हुए कहा कि इस अजीबोगरीब मामले की संसदीय इतिहास में कोई दूसरी मिसाल नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चेयरपर्सन अपने व्यक्तिगत कर्मचारियों में से इन अधिकारियों को नियुक्ति करके, विभिन्न समितियों पर कड़ी नजर रखने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं के अनुसार धनखड़ का यह फैसला स्पष्ट रूप से दिखाता है कि उन्हें अधिकारियों के मौजूदा तंत्र पर कोई विश्वास नहीं। इसी समिति के विचार -विमर्श के बाद विभिन्न घटनाक्रमों के लिए राज्यसभा के महासचिव को जानकारी दी जाती है।
पश्चिम बंगाल की सत्तारुढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि बिलों की जांच (Scrutiny) 2014 में 67 प्रतिशत हुई थी। अब इसमें गिरावट हुई है। अब महज 14 प्रतिशत बिल की स्क्रूटनी होती है। धनखड़ के पूर्ववर्ती वेंकैया नायडू के कार्यकाल के दौरान, पिछले पांच वर्षों में नियम 267 के तहत भी कोई चर्चा नहीं की गई है। सूत्रों ने कहा कि पार्टी कल मामले पर एक बयान जारी करेगी।












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