BJP की हार पर तोगड़िया का तंज, कहा- हिंदुत्व और विकास के मुद्दे पर फेल हो गई मोदी सरकार
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नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया ने गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। तोगड़िया ने कहा कि, मोदी सरकार न तो हिंदुत्व के वादे तो पूरा कर पाई और न ही विकास के बादे को निभा पाई। उपचुनाव में बीजेपी की हार के मौके पर विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक संवेदनशील पत्र लिखा है। तोगड़िया ने पीएम से मिलने का समय मांगा है। केंद्र सरकार से कई मुद्दों को लेकर नाराज चल रहे तोगड़िया ने पीएम को कई पुरानी बातें भी याद दिलाई हैं। पत्र में तोगड़िया ने मोदी को उनके साथ गुजारे गए दिनों की याद दिलाई है।

करोड़ों लोगों की उम्मीद पर खरी नहीं उतरी मोदी सरकार
पत्र में लिखा है,'सत्ता मिलने के साथ आपने हमसे और मूल विचारधारा से ही दूरी बना ली फिर भी हमारे दिल में आज भी वही संवाद की उम्मीद है और इसलिए यह पत्र लिख रहा हूं।' पत्र में आगे लिखा है कि वह अयोध्या में राम मंदिर, गोवंश हत्या बंदी का राष्ट्रीय कानून, समान नागरिक संहिता, जम्मू कश्मीर में धारा 370 और धारा 35ए हटाने सहित करोड़ों किसानों और मजदूरों के विषय पर चर्चा करना चाहते हैं।

'बहुत वक्त से हम दोनों का दिल से संवाद नहीं हुआ'
इसमें लिखा है, 'बहुत वक्त से हम दोनों का दिल से संवाद नहीं हुआ, जो 1972 से 2005 तक होता रहा था। समय-समय पर देश के, गुजरात के और आपके भी जीवन में जो प्रश्न उपस्थित हुए, उनपर हम दोनों ने साथ रहकर बहुत काम किया। हमारे घर, ऑफिस में आपका आना, साथ में भोजन, चाय ठहाके लगाकर हंसना... मुझे विश्वास है आप कुछ भी नहीं भूले हो।' पत्र में कई तंज भी कसे गए हैं। तोगड़िया ने लिखा है, 'विकास के लिए हिंदुओं को अपमानित करने की आवश्यकता नहीं होती। दोनों साथ साथ चल सकते हैं, लेकिन बातचीत होनी चाहिए।

अचानक बदली आर्थिक नीतियों से हजारों बेरोजगार हो गए
तोगड़िया ने लिखा कि, गौरक्षकों को गुंडा कहना, देवालय के पहले शौचालय जैसे तुलनात्मक बयान, कश्मीर में सेना पर हत्या के मुकदमे और जिहादी पत्थरबाजों पर मुकदमे वापस लेना, सीमा पर जवान और खेत में किसान की मौत, अचानक बदली आर्थिक नीतियों से हजारों बेरोजगार होना, यह कोई विकास नहीं है।' तोगड़िया ने लिखा है कि देशभर में इसकी प्रतिक्रिया हो रही है और लोगों की आवाज को सरकार दबा रही है। पत्र के मुताबिक, 3 साल से ज्यादा जनता ने राह देखी अब उनका धैर्य जवाब देने लगा है। बड़े-बड़े विज्ञापनों से, विदेशी एजेंसियों के विज्ञापन से और उत्सवों से, अब व्यक्तिगत इमेज बन सकती है, लेकिन देश और जनता तंग आ चुकी है।












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