गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण का पार्थिव शरीर ले जाने को नहीं मिली एंबुलेंस, पीएमसीएच में घंटों पड़ा रहा शव

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      Mathematician Vashishtha Narayan Singh का निधन, मौत के बाद भी सरकारी उपेक्षा के शिकार | वनइंडिया

      नई दिल्ली। गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का गुरुवार को बिहार की राजधानी पटना में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे सिंह पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में भर्ती थे, जहां आज उन्होंने दम तोड़ दिया। नासा के साथ काम करने वाले और आइंस्टीन के सिद्धान्त को चुनौती देने वाले गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन हुआ तो अस्पताल एक एंबुलेंस तक समय पर नहीं दे सका। पीएमसीएच में घंटो उनका शव स्ट्रेटर पर पड़ा रहा। उनके छोटे भाई ब्लड बैंक के बाहर शव लिए देर तक खड़े ये इंतजार करते रहे कि अस्पताल प्रशासन एंबुलेंस उपलब्ध कराएगा।

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      74 साल के नारायण सिंह के निधन के बाद पीएमसीएच प्रशासन ने मृत्यु प्रमाणपत्र देकर खुद को अलग कर लिया। इसको लेकर वशिष्ठ नारायण सिंह के छोटे भाई ने नाराजगी भी जताई, वो मीडिया के सामने ही रो भी पड़े। बताया गया है कि करीब दो घंटे बाद उनका शव ले जाने को एंबुलेंस दी गई।

      गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह बीते 40 साल से सिजोफ्रेनिया नामक मानसिक बीमारी से पीड़ित थे। वह बीते दिनों से काफी बीमार चल रहे थे। उनके निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक जताया है। पू्र्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी नारायण सिंह के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि नारायण सिंह के निधन से समाज को अपूरणीय क्षति पहुंची है। नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने भी उनकी मौत को बड़ी क्षति बताया है।

      1965 में अमेरिका गए पटना साइंस कॉलेज में पढ़ाई के दौरान कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन कैली की नजर नारायण सिंह पर पड़ी और उन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचाना। 1965 में वह अमेरिका चले गए। उन्होंने 1969 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए। उन्होंने नासा में भी काम किया। वह साल 1971 में भारत लौट आए थे। भारत लौटने के बाद नारायण सिंह ने आईआईटी कानपुर, आईआईटी बंबई और आईएसआई कोलकाता में नौकरी की। बाद में वह मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित हो गए।

      नारायण सिंह ने वैज्ञानिक आइंस्टीम के सिद्धांत को चुनौती दी थी। उनके बारे में जो सबसे ज्यादा मशहूर बात है, वो ये है कि जब नासा में अपोलो को लॉन्च किए जाने से पहले 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए थे, तब उनके ठीक होने पर नारायण सिंह और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक जैसा था।

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