Vande Mataram Debate: वंदे मातरम पर राज्यसभा में क्यों भिड़ें अमित शाह- खड़गे? सदन में जमकर दिखा हंगामा
Vande Mataram Debate: संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार, 9 दिसंबर को राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' पर हुई चर्चा ने राजनीति का तापमान बढ़ा दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने आरोपों का जवाब देते हुए साफ कहा कि इस बहस का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। वह लोकसभा में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के सोमवार को दिए बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।
राज्यसभा में अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इसी बयान को लेकर दोनों सदनों में गहमागहमी रही।

अमित शाह का जवाब: "बंगाल चुनाव से जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण"
अमित शाह ने कहा कि कुछ लोग इस चर्चा को आने वाले बंगाल चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि वंदे मातरम् भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रतीक है। उन्होंने कहा, जो लोग इस चर्चा को बंगाल चुनाव से जोड़ रहे हैं, उन्हें अपनी समझ पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह गीत भारत की आत्मा को जगाने वाला मंत्र है। शाह ने आगे कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान थी और 2047 में 'विकसित भारत' के समय भी रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने 1937 में राजनीतिक कारणों से कविता को दो हिस्सों में बाँटा और केवल दो पदों को अपनाया। शाह ने इसे "तुष्टिकरण राजनीति की शुरुआत" करार दिया और यहाँ तक कहा कि यही रास्ता आगे चलकर विभाजन का कारण बना।
खड़गे का पलटवार: "ध्यान भटकाने की कोशिश"
अमित शाह के जवाब में खड़गे ने कहा कि सरकार वंदे मातरम् के बहाने देश की असली समस्याओं से ध्यान हटाना चाहती है। उन्होंने कहा कि हम तो हमेशा वंदे मातरम् गाते रहे हैं, लेकिन जिन्हें गाने की आदत नहीं थी, वे भी आज गा रहे हैं-यही है वंदे मातरम् की शक्ति। खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि जब कांग्रेस कार्यकर्ता स्वतंत्रता आंदोलन में जेल जा रहे थे, तब आरएसएस और हिंदू महासभा ब्रिटिशों की मदद कर रहे थे।
नेहरू ही क्यों? खड़गे ने किया सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा जवाहरलाल नेहरू पर उठाए गए सवालों के जवाब में खड़गे ने कहा कि 1937 का निर्णय किसी एक व्यक्ति का नहीं था। उन्होंने कहा, "यह फैसला महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष बोस, नेहरू और अन्य नेताओं के साथ मिलकर लिया गया था। आप सभी महान नेताओं का अपमान कर रहे हैं, केवल नेहरू को क्यों निशाना बनाते हैं?" खड़गे ने टैगोर का वह बयान भी उद्धृत किया जिसमें उन्होंने कहा था कि पहले दो पदों को बाकी से अलग करने में उन्हें कोई कठिनाई नहीं थी।
वंदे मातरम् विवाद का मुख्य कारण
वंदे मातरम् को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में संस्कृतनिष्ठ बंगला में लिखा। मूल कविता के छह पद हैं, जिनमें अंतिम चार में हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख है, जबकि पहले दो व्यापक रूप से मातृभूमि की स्तुति करते हैं, जो अधिक समावेशी माने गए।
1937 में कांग्रेस ने व्यापक सहमति से पहले दो पदों को अपनाया। संविधान सभा ने 1950 में इन्हीं दो पदों को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया। पीएम मोदी, बीजेपी और RSS का आरोप है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की आपत्तियों के चलते तुष्टिकरण में ऐसा किया।
संसद में राजनीतिक गर्मी जारी
अमित शाह ने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा को तैयार है-यहां तक कि नेहरू की विरासत पर भी। वहीं विपक्ष ने सरकार पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। सत्र के दौरान दोनों सदनों में वंदे मातरम्, नेहरू, बंगाल चुनाव और स्वतंत्रता आंदोलन के विमर्श को लेकर खूब तीखी बहस हुई, जिससे माहौल लगातार गरम बना हुआ है।












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