देश में लाखों पद हैं खाली, पर नहीं हो रही हैं भर्तियां, मोदी सरकार कब करेगी भर्तियां

देश की आबादी 121 करोड़ से ज्‍यादा है और उसमें 31 फीसदी जनसंख्‍या 20 से 44 साल के उम्र के लोगों की है। इस उम्र के लोग ही सबसे ज्‍यादा नौकरियों का इंतजार इस समय कर रहे हैं।

नई दिल्‍ली। देश की आबादी 121 करोड़ से ज्‍यादा है और उसमें 31 फीसदी जनसंख्‍या 20 से 44 साल के उम्र के लोगों की है। इस उम्र के लोग ही सबसे ज्‍यादा नौकरियों का इंतजार इस समय कर रहे हैं। पर इन दिनों देश के अंदर महत्‍वपूर्ण सरकारी पदों पर भर्तियां ही नहीं हो रही हैं।

देश में लाखों पद हैं खाली, पर नहीं हो रही हैं भर्तियां, मोदी सरकार कब करेगी भर्तियां

टीओआई की खबर के मुताबिक ने छह केंद्रीय मंत्रालयों रक्षा, मानव संसाधन, स्वास्थ्य, गृह, वित्त और कानून मंत्रालय से प्राप्‍त आंकड़ों के मुताबिक कुछ ऐसा ही है। इन आंकड़ों के मुताबिक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रिक्त पड़े पदों की संख्या 10 फीसदी तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी वजह रिटायरमेंट और प्रमोशन है। पर सवाल उठता है कि हमारा देश जनसांख्यिकीय बढ़त का लाभ महत्वपूर्ण सेवाओं को मजबूत करने में क्यों नहीं ले पा रहा है? रिपोर्ट में महत्‍वपूर्ण चार सेक्‍टरों पर फोकस किया गया है जिनमें भर्तियां नहीं हो रही हैं।

शिक्षा-10 लाख शिक्षकों की जरूरत

शिक्षा-10 लाख शिक्षकों की जरूरत

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्राय से प्राप्‍त तथ्‍य बताते हैं कि देशभर में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के 10 लाख शिक्षकों की जरूरत है। आईआईटी, एनआईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में ही करीब 6,000 पद खाली पड़े हैं। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 6,000 पद खाली हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों में स्‍नातक स्‍तर की फैकल्टी के लिए स्वीकृत 4.2 लाख पदों का 29 प्रतिशत खाली है। आईआईआईटी बेंगलुरू के संस्‍थापक निदेशक प्रोफेसर एस सदगोपन ने टीओआई से बातचीत में कहा कि ज्यादातर रिक्तियां शहरी केंद्रों से दूर स्थित संस्थानों में हैं जो अक्सर अपर्याप्त सुविधाओं के कारण उत्साही प्रोफेसरों का मनोबल तोड़ने वाला होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ अच्छा वेतन देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जहां पर शिक्षक पढ़ाने जा रहे हैं उन जगहों को रहने लायक भी बनाने की जरूरत है।

स्वास्थ्य-1560 मरीजों पर एक डॉक्‍टर उपलब्‍ध

स्वास्थ्य-1560 मरीजों पर एक डॉक्‍टर उपलब्‍ध

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया(एमसीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में ऐलोपैथिक डॉक्टर और मरीज का अनुपात बहुत ज्‍यादा है। करीब 1560 मरीजों पर एक डॉक्‍टर उपलब्‍ध है। 7 लाख आयुष डॉक्टरों को भी जोड़ लें तो यह अनुपात 707 मरीजों पर 1 डॉक्‍टर आता है। पर आदर्श स्थिति बहुत अच्‍छी नहीं है। विशेषज्ञ बताते है कि ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों के पद सबसे ज्यादा खाली हैं। डॉक्टर भी सुविधाओं के अभाव में दूर-दराज इलाकों में जाना नहीं चाहते।

पुलिस, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय में भर्तियां कम

पुलिस, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय में भर्तियां कम

सुप्रीम कोर्ट देश में पुलिस की कमी पर पहले ही कई राज्‍यों को नोटिस जारी कर चुका है। पर अभी तक स्थिति सही नहीं हो पाई है। देश में 24 फीसदी कम पुलिस कर्मी तैनात हैं। वहीं देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई में 22 फीसदी तक पद खाली हैं। वहीं प्रवर्तन निदेशालय 36 फीसदी लोगों के दम पर ही काम कर रहा है। पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लई ने टीओआई को बताया कि शीर्ष स्‍तर पर अधिकारियों को समय पर भर्ती के लिए जोर लगाना चाहिए। पर सबसे दुख की बात यह है कि लोग दुर्भाग्य से देश की सरकारें इसमें दिलचस्पी लेती नहीं दिखतीं और अधिकारियों को सिर्फ अपने भविष्‍य की चिंता रहती है।

आयुध कारखानों में 41 फीसदी तकनीकी पद खाली

आयुध कारखानों में 41 फीसदी तकनीकी पद खाली

देश के आयुध कारखानों में 41 फीसदी तकनीकी पद और 44 फीसदी गैर-तकनीकी पद खाली हैं। इसका असर उत्पादन पर और शोध एवं अनुसंधान (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) पर भी पड़ रहा है। सशस्त्र बलों के तीनों विंग्‍स में 55,000 पद रिक्त हैं। रक्षा विशेषज्ञ जी जे सिंह ने कहा कि दूसरे क्षेत्रों में मौके यहां रिक्तियों की वजह हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें यह भी देखना होगा कि हम अपने सैनिकों और दिग्गजों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। अगर उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होगा तो दूसरों को सेना में आने का मन नहीं करेगा।

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