नोटबैन पर शिवसेना का यू-टर्न, फैसले को बताया ऐतिहासिक कदम

शिवसेना ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कदम बेहद बोल्ड और ऐतिहासिक है। शिवसेना ने सरकार के कदम को पूरे समर्थन की बात कही है।

नई दिल्ली। नोटबंदी के फैसले को लेकर अभी तक विरोध का सुर बुलंद करने वाली शिवसेना ने मोदी सरकार को बड़ी राहत दी है। शिवसेना ने इस मुद्दे पर पूरी तरह से यूटर्न ले लिया है।

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शिवसेना ने दी सरकार को बड़ी राहत

नोटबंदी पर जहां विपक्ष लगातार सरकार को घेरने पर जुटा हुआ है, वहीं सरकार की सहयोगी पार्टी शिवसेना भी इस मुद्दे पर अभी तक सरकार के खिलाफ नजर आ रही थी। हालांकि अब शिवसेना के रुख में बदलाव आया है। उन्होंने सरकार के फैसले की तारीफ की है।

शिवसेना ने नोटबंदी के फैसले पर पूरी तरह से यू-टर्न लेते हुए मोदी सरकार के फैसले को ऐतिहासिक करार दिया है। शिवसेना ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कदम बेहद बोल्ड और ऐतिहासिक है। शिवसेना ने सरकार के कदम को पूरे समर्थन की बात कही है।

शिवसेना के रुख में ये बदलाव उस वक्त आया जब उनके सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिवसेना सांसदों को मुलाकात के लिए बुलाया था।

पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बदला सरकार का रुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिवसेना सांसदों से कहा कि आप बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के अहम घटक हैं। शिवसेना के वरिष्ठ नेता ने बताया कि हमारे सांसदों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात काफी अच्छी रही। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को विश्वास दिलाया कि वो एनडीए के अहम सहयोगी हैं।

उन्होंने कहा कि इस बात का ज्यादा अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि शिवसेना ने तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी के नेतृत्व में निकाले गए विरोध मार्च का समर्थन किया था।

सूत्रों के मुताबिक माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने सीधे तौर पर शिवसेना को बीजेपी का सबसे पुराना साथी करार दिया।

पीएम से मिला था शिवसेना का प्रतिनिधिमंडल

इस दौरान दो पेज का मेमोरेंडम भी प्रधानमंत्री को सौंपा गया, जिसमें ये बताने की कोशिश की गई कि जिस तरह से नोटबंदी का फैसला लिया गया है 13 दिन बाद भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं।

इस पत्र में शिवसेना सांसद संजय राउत और पार्टी के दूसरे सांसद आनंदराव अडसुल, चंद्रकांत खैरे और अरविंद सावत के हस्ताक्षर हैं। इसमें सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया है कि ग्रामीण और को-ऑपरेटिव बैंक और क्रेडिट सोसाइटी करेंसी बदलने की स्थिति को संभालने की स्थिति में नहीं हैं।

पत्र में कहा गया है कि बड़ी आबादी ऐसी है जिनका राष्ट्रीयकृत बैंकों में अकाउंट नहीं है, यही इस फैसले की सबसे परेशानी वाली बात है।

शिवसेना ने मांग की है कि को-ऑपरेटिव सेक्टर में भी प्रतिबंधित नोट जमा किए जाएं। जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिल सके।

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