हरीश रावत,क्यों उत्तराखंड सरकार मान रही है योग को ‘भाजपाई’ ?
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार को कौन समझाए कि योग का संबंध किसी धर्म से नहीं है। उसने विश्व योग दिवस से खुद को अलग कर एक बार फिर संकुचित मानसिकता का परिचय दिया है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत सरकार का योग दिवस से पल्ला झाडऩा भारतीयता विरोधी मानसिकता को दिखाता है। जब दुनिया के 46 मुसलिम देशों सहित 196 देश 21 जून को विश्व योग दिवस मना रहे होंगे तब देवभूमि की सरकार का यह रवैया शर्मनाक ही कहा जा सकता है।
योग का राजनीतिकरण
बेशक,कांग्रेस योग का राजनीतिकरण कर रही है। अभी ज्यादा पुरानी बात नहीं है लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की शर्मनाक पराजय के कारणों की तलाश करने बैठी एंटनी कमेटी ने सबसे बड़ा कारण कांग्रेस के प्रति बहुसंख्यक विरोधी होने की धारणा बनना बताया था।
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मोदी की तारीफ
यही बात बाद में कांग्रेस के महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने अपने ढंग से कही कि नरेंद्र मोदी खुद को भारतीयता से ओतप्रोत नेता साबित करने में सफल रहे। राजनेताओं के अलावा कांग्रेस समर्थक माने जाने वाले शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज भी कह चुके हैं कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हिंदू विरोध की कीमत चुकानी पड़ी।
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सबक नहीं लिया
लगता है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अभी सबक नहीं सीखा है। सबसे बड़ी बात यह है कि उत्तराखंड उन राज्यों में से है जहाँ अल्पसंख्यक आबादी अपेक्षाकृत बहुत कम है और वहाँ की सरकार के लिए अल्पसंख्यकों को खुश करना बड़ा उद्देश्य भी नहीं लगता। लगता है हरीश रावत अपनी कुर्सी की कसरत में सोनिया गांधी को खुश करने के लिए यह प्रयास कर रहे हैं।
गलत फैसला
उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार विजेन्द्र रावत कहते हैं कि हरीश रावत सरकार का योग दिवस समारोह से अपनो को अलग करना कोई बहुत बेहतर फैसला नहीं माना जा सकता। उत्तराखंड में लाखों लोग योग करते हैं। उन्हें आपको योग दिवस पर जोड़ना चाहिए था।













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